मेरी गंगा यात्रा भाग-56
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों गंगा जी की महिमा अपार हैं गंगा जीवन हैं गंगा जी जहां जहां से गुजरी वह जगह सोना उगलने लगी लाखो को जीवन देने वाली गंगा आज उदासीन मृत समाज का पोषण कर रही हैं कहते है गंगाजल का प्रवाह हिमालय के जिस भूमि भाग पर से आया है उसमें रेडियम के समान वस्तु है, जिससे प्रवाहित जल में उपयुक्त गुण दिखाई पड़ते है। भारत ही नही सम्पूर्ण विश्व गंगा जी की महिमा मण्डित करता हैं जो गंगा की प्रवाह धारा के समीप आया वो गंगा के कल कल करते सम्मोहन के मोह पाश में बंद कर रह गया और गंगा जी का होकर रह गया डॉक्टर रिचर्डसन कहते है कि ‘गंगा-गंगा’ कहने और उसके दर्शन करने मात्र से भी मानव हृदय पर अत्यन्त उत्तम प्रभाव पड़ता है। सुविख्यात डॉक्टर मि. डेरेल ने भी गंगा जी पर शोध किया है। वह कहते है भारत में जब हैजे और आँव के रोग व्यापक रूप में फैले हुए थे और इन रोगों से मरे व्यक्तियों के शव गंगा में फेंक दिये जाते थे तब उक्त डॉक्टर महोदय ने इन शवों के कुछ ही फुट नीचे गंगाजल की परीक्षा करके देखा कि हैजे और आँव के कीटाणुओं के होने की आशा थी वहाँ वास्तव में उनका एक भी कीटाणु नहीं था।कप्तान एडवर्ड मूर ने, जिसने टीपू सुलतान के साथ युद्ध में भाग लिया था, लिखाता है- “सबन्नर के नवाब केवल गंगाजल ही पीते थे।” और भी अनेक मुस्लिम नवाबों तथा बादशाहों का इतिहास पढ़ने से यह ज्ञात होता है कि वे अपने पीने में केवल गंगाजल का ही प्रयोग करते थे। प्रसिद्ध इतिहासकार श्री गुलाम हुसैन ने बंगाल के इतिहास ‘रियाजुप्त सलातीन’ में गंगाजल की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उक्त परीक्षा के उपरान्त डॉक्टरो ने गंगाजल के प्रयोग से एक औषधि का आविष्कार भी किया जिसका नाम ‘बैक्टीरिया फैज’ है और जिसे वर्तमान समय में अनेक रोगों की चिकित्सा में प्रयोग किया जा सकता है।हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के वैज्ञानिकों की टीम ने पशुओं और इंसानों में निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर के अलावा बर्न, घाव,सर्जरी व यूरिनल इन्फेक्शन का कारण बनने वाले क्लबसेला, स्यूडोमोनास, स्टेफाइलोकॉकस आदि बैक्टीरिया के चार बैक्टिरियोफाज (जीवाणुभोजी) को गंगा के जल से खोज निकाला है वैज्ञानिकों की टीम ने गंगाजल से मिले कुल आठ बैक्टिरियोफाज के अलावा विभिन्न स्थानों की मिट्टी व डंग आदि से 100 के करीब विभिन्न बैक्टिरियोफाज निकालकर एक फाज बैंक बना लिया है,डॉक्टर कहाविटा के प्रयोगों के अनुसार गंगाजल से सन्निपात ज्वर और संग्रहणी भी नष्ट हो जाते हैं। क्या कोई और नदी हैं जिसमें इस तरह के गुण पाये जाते है बहुत से लोगो ने मुझसे प्रश्न किया कि आप के केवल गङ्गा ही बचाने पर बल क्यू देते हैं ऐसा नही है कि मैं केवल गङ्गा जी को प्रदूषण मुक्त की बात करता हूं पिछले अंक मे मैंने दक्षिण की नदियों पर भी चर्चा की थी पर मेरी सोच कहि हैं गंगा भारत की प्रधान नदी हैं जिसकी अपनी धार्मिक मान्यताऐ हैं यदि गंगा प्रदूषण मुक्त हुई तो गंगा के प्रताप से अन्य नदियों को बचा आसान होगा यदि गंगा जी का अस्तित्व नही रहा तो ये हमारी संस्कृति और सभ्यता का हास् होगा विश्व की एक मात्र नंदी जिसका अपना गर्व है साहब महत्व है
Saturday, June 30, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-56
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment