Tuesday, June 5, 2018

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-38

इक प्रयास मेरी गंगा यात्रा भाग-38
मित्रों कुछ दिन पहले एक बार फिर से माँ गंगा जी के दर्शन गंगोत्री मे करने का अवसर प्राप्त हुआ ! यूं तो हर वर्ष ऐसा सुंदर आशीष प्राप्त होता है फिर से सुंदर कलकल करती, इठलाती,मधुर संगीत सुनाती  जीवनदायिनी गंगा जी को देख मन प्रसन्न हो जाता है यहाँ आकर लगता हैं गंगा प्रदूषण मुक्त है और भविष्य मे सम्पूर्ण भारत के वासियो को गङ्गा प्रदूषण मुक्त नजर आयेगी, ईश्वर करें ऐसा ही हो, गंगा जी को साफ करने के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। सन्यासियों, महात्मा,वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम जनता गंगा को स्वच्छ करने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन गंगा आज भी मैली की मैली है। पहाड़ हो या मैदान सभी जगह मैली होती जा रही है हालत बतर होते जा रहैं हैं गंगा जी का पानी पीने लायक छोड़िए, नहाने और खेती करने लायक भी नहीं बचा है। गंगा को बचाने की कोशिशें नाकाफी रही हैं। और नेताओं के वादे खोखले! मात्र उत्तर प्रदेश के कुल सात शहरों से 11 नमूने लिए गए लेकिन बैक्टीरिया के मामले में सबसे खराब पानी वाराणसी में मिला। यहां एमपीएन कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की तादाद बेहद चौंकाने वाली थी वाराणसी के गंगाजल में इन बैक्टीरिया के अलावा ई-कोलाई, रेत, आयरन, मैंगनीज और कॉपर भी काफी मात्रा में पाया गया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में भी गंगाजल की स्थिति बहुत खराब है इसी तरह रेत, आयरन, मैंगनीज और पानी में शीशे की मौजूदगी भी पाई गई। कुल मिलाकर हरिद्वार से बलिया तक यही नतीजा निकला कि उत्तर प्रदेश में ही राम की गंगा ज्यादा मैली है।

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