मेरी गंगा यात्रा भाग-25
हमारी नदीयो के विनाश का नया अध्याय 1980 से आरम्भ कहा जाता हैं आप को याद होगा जब प्रधानमंत्री अटल जी थे तो उनका सपना था कि सभी नदियों को मिला देना चाहिए पर ऐसा हुआ नही अगर ऎसा होता तो आज हिंदुस्तान की बात ही अलग होती आप मे से कम लोग ही जानते होंगे आज आजादी के 72 वर्षो के पश्चात भी हमारी नदियों का 90% पानी व्यर्थ समुन्द्र मे बह जाता है उस पर कभी बाढ़ तो कही सूखा आम बात है आज भी हमारी सरकारें पानी को बचाने के लिये कुछ नही करती उलटे पानी के बटवारे पर राज्य सरकारों मे आपस मे तलवारें खिंची रहती हर वर्ष करोड़ो रूपये साफई के नाम खर्च किये जाते हैं पर कोई ठोस प्रयास नही किया जाता ऐसी स्थिति मे आज पापों को धोने वाली गंगा अब मैली पर मैली होती जा रही हैं
राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के तहत गंगा अविरल और निर्मल धारा बनाने के वर्तमान प्रयासों में अनेक तकनीकी और प्रशासनिक कमियां हैं। इसे निम्न प्रकार से देख,..
गंगा नदी पर काम कर रही एजेंसियो तथा सरकारी प्रशासन मे उचित ताल मेल का अभाव था
इन्होने गंगा ने विनाश के कारणों का गहन आकलन नही किया न कोई सूची तैयार की थी
गंगा एक्शन प्लान -1 और गंगा एक्शन प्लान-2 में हुई गलतियों के बारे में मात्र जुबानी जमा खर्च किया जा रहा था ठोस कुछ नही था वास्तव में गलतियाँ कहाँ और क्यों हुई इसकी कोई गंभीर और गहन समीक्षा नहीं की गई। वही गलतियां फिर बड़े पैमाने पर दोहराई जाने की सम्भावना बनने लगी गलतियों के लिये किसी की जिम्मेवारी तय नहीं की गई।काम को पूरा करने का समय निर्धारित नही था
चिन्तको से कोई रॉय नही ली गई जो सेवा भाव से कम करते ,फिर सलाहकारों और विशेषज्ञों द्वारा ली गई महंगी सलाह भी क्यों विफल रही इसका कोई आकलन नहीं हुआ है।
राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण को तकनीकी सलाह देने के लिये बने आईआईटी कंसोर्टियम का नेतृत्व एक “ई टी आई डायनमिक्स” नामक अंतर्राष्ट्रीय निगम द्वारा किया जाना भी जाँच-परख की विषय वस्तु थी
गंगा प्रदूषण मुक्ति के जैविक और विकेन्द्रित उपायों पर भी ध्यान नही दिया गया क्या इन उपायों को सिरे से नकारे जाने की प्रवृती संदेह उत्पन्न नही करती है।
वर्तमान में NGRBA के अधिदेष में “निर्मल और अविरल धारा का मुद्दा शामिल नहीं है, यह केवल गंगा नदी प्रबंधन और प्रदूषण मुक्त करने की बात करता था।
वही प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी शहरी स्थानीय निकायों के पास है परन्तु 73वें संविधान संशोधन के बावजूद वास्तविक शक्तियां उनके पास नहीं है। यह भी परेशानी की बात है
आखिर कार राजीव गांधी की शुरू की गई योजना राजीव जी साथ मिट गई और गङ्गा सफाई रिश्वतखोरी की भेट चढ़ गई वही आज भी मोदी जी का मुहिम उसकी की राह पर है
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