मेरी गंगा यात्रा भाग-45
एक प्रयास गंगा बचे
70 प्रतिशत भूमि से जल के लेवल का स्तर 20 फुट से 200,300 फुट नीचें खिसक गया हैं जंगलों मे आपने जल के लिये जानवरों की लड़ाई सुनी होगी पर ये स्थिति और गम्भीर होने लगी हैं एक सर्वेक्षण के अनुसार विश्व के कई देशो में पीने के पानी को लेकर सँघर्ष अब खूनी सँघर्ष में बदलने लगे है ऐसी स्थिति भारत मे भी नज़र आने लगी हैंP
मित्रों आप जानते ही होंगे कि भारत में जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरीकरण और उसकी अनियंत्रित दर है। जिसे देखो गांव से कस्बे की ओर कस्बे से शहर की ओर फिर महानगरों की और,भागे जा रहे है पिछले दो दशको में शहरीकरण की दर बहुत तेज गति से बढ़ी है या ये कहे कि जनसंख्या विस्फोट हो रहा हैं जहाँ देखो भीड़ ही भीड़ सड़को पर वाहन ही वाहन,जाम(इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यू हैं)दूसरे शब्दों मे कहै कि इस शहरीकरण ने देश के जल स्त्रोतों पर अपनी काली छाया डाल दी हैं। ऐसे ही जनसँख्या विस्फोटक होता रहा तो शहरीय जीवन नरक हो जायेगा इसके कारण से लंबी अवधि के लिए कई पर्यावरणीय समस्याएं पैदा होने लगी हैं। इनमें जल आपूर्ति की कमी प्रमुख है नदियों के पानी के प्रदूषित होने के कारण पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है जो नदियों पीने के पानी का प्रबंधन करती थी उन्हीं मे शहरों का गन्दा पानी कचरा सम्मलित होने से पानी प्रदूषित हो गया हैं शहरों मे जल को संग्रहण करने,बरसाती पानी को सम्भालना जैसे पहलू प्रमुख हैं। जीने नज़र अंदाज़ किया जाता है हमारा बरसाती पानी व्यर्थ नदियों मे बह जाता हैं क्यो..? क्योंकि अब प्रकृति संसाधनों की अनदेखी होती जा रही हैं गाँव शहरों से तालाब,तलया झोड़, सब समाप्त हो गये जो बरसाती पानी सँजोकर रखें थे ये वह संसाधन हैं जो भूमिगत जल के लेबल को संभाल कर रखते थे पर कहा है ये सब..? जंगल खेत, तालाब कुआ सब की जगह कंक्रीट के जंगलों ने ले ली हैं जिस पर काम करना अति आवश्यक है साहब प्रदूषित पानी का निपटान और ट्रीटमेंट एक बहुत बड़ा मुद्दा है। जैसा कि मैंने कहा कि हार कर कोई रास्ता नही मिलने पर सब नदियों मे छोड़ना आखिर रास्ता हैं गंगा के पास कई शहर और कस्बे हैं, जिन्होंने इन समस्याओं को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आज गङ्गा यमुना की क्या स्थिति हैं आपसे छुपी नही है इन इलाकों में अनियंत्रित शहरीकरण से सीवेज का पानी तेज़ाब बन रहा है। हमारे घरेलू इस्तेमाल का 80 प्रतिशत पानी खराब हो चुका है। ज्यादातर मामलों में पानी का ट्रीटमेंट अच्छे से नहीं होता और इस तरह जमीन की सतह पर बहने वाले ताजे पानी को प्रदूषित करता है। यह प्रदूषित जल सतह से गुजरकर भूजल में भी जहर घोल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक एक लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में 16,662 मिलियन लीटर खराब पानी एक दिन में निकलता है। आश्चर्य इस बात का है कि इन शहरों के 70 प्रतिशत लोगों को सीवेज की सुविधा मिली हुई है। गंगा यमुना आदि नदी के किनारों पर बसे शहरों और कस्बों में देश का करीब 33 प्रतिशत पानी खराब हैं विश्व का 29 प्रतिशत भूभाग हैं और जिसके पास 15 प्रतिशत पीने का पानी हैं जिसमें सबसे अधिक 4 प्रतिशत भारत के पास हैं अगर हिमालय के ग्लेशियर की बात करें तो हमारे पास और 30 वर्ष का पीने का पानी हैंएक प्रयास गंगा बचे
70 प्रतिशत भूमि से जल के लेवल का स्तर 20 फुट से 200,300 फुट नीचें खिसक गया हैं जंगलों मे आपने जल के लिये जानवरों की लड़ाई सुनी होगी पर ये स्थिति और गम्भीर होने लगी हैं एक सर्वेक्षण के अनुसार विश्व के कई देशो में पीने के पानी को लेकर सँघर्ष अब खूनी सँघर्ष में बदलने लगे है ऐसी स्थिति भारत मे भी नज़र आने लगी हैंP

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