मेरी गङ्गा यात्रा भाग-9
जाने क्यू गङ्गा जी की दशा देख कर भारतीयों का मन नही पसीजता, क्यू लोग बूत बेसुध होकर जी रहे है जो गङ्गा करोड़ों जीवो की प्राण रेखा है वह अपने ही पुत्रों की मार झेल रही , या यू कहो अंतिम साँसे ले रही हैं क्या माँ गङ्गा जी का कोई उपचार नही है अब और नही अब सार्थक प्रयास हो बस सार्थक, झूठे वादे और व्यर्थता का प्रयास दिखावा न हो,
ऐसे दिखावे के काम हर बार कुछ कुछ कुछ समय मैं होते रहे हैं पर परिणाम तो शून्य ही हर बार रहा मित्रो 3साल पहले मोदी जी प्रधानमंत्री बने, राजीव गांधी की तर्ज़ पर गङ्गा जीको बचाने के लिये फ़ौज बना दी गई , ख्वाव देखना आरम्भ होगी 2019 तक गङ्गा को प्रदूषण मुक्त करने का कार्यक्रम बना, पर कितने प्रतिशत गङ्गा प्रदूषण मुक्त हुई..? क्या आपको ऐसा लगता है कि 2 अक्टूबर 2019 में " नमामि - गङ्गे " प्रोजेक्ट सहित हमारा भारत, साफ - सुथरा हो जाएगा ? मुझे तो ऐसा दिख रहा है - कि 2019 क्या 2029 तक भी, हमारी गङ्गा और हमारा भारत, साफ - सुथरा नहीं हो सकता । अब आप ही बताइए .माननीय मोदी जी कागज की नाव, और कागज पर प्रोजेक्ट ,किस काम के,मोदी जी लँगड़े घोड़े रेस नही जीतते, बस मीटिंग पर मीटिंग, और उस मीटिंग के लिये मीटिंग, चाय पार्टी बहुत हो चुका , अब मन की बात नही, जतन करने की बात हो। अधिकारी कहते हैं
मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा सफाई अभियान का एक्शन प्लान तैयार हो गया है।अथार्त (कागज की नाव तैयार ) हैं पर ऐसे प्लान राजीव गांधी ने भी आनन फानन मे बनाये थे क्या हुआ बस अधिकारी ही बदले सोच नही, इस अभियान में अब तक हजारों करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं पर अब तक गंगा साफ नहीं हुई, बल्कि उलटे और मैली हो गई है। गंगा सफाई अभियान के नाम पर 'गंगा एक्शन प्लान' के तहत हजारों करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। गंगा में प्रदूषण कम होने के बजाय गंगा और ज्यादा प्रदूषित हुई है। गंगा के नाम पर रोज नई-नई योजना-परियोजना बनाना एक तमाशा बनता जा रहा है और जनता तमाशबीन, मात्र,मोदी जी शायद आपको जानकारी होगी की हमारी गंगा की पहचान दुनिया की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में से एक के रूप में की जाने लगी हैं आंकड़े कहते है और यूईसीपीसीबी (UECPCB) अध्ययन के अनुसार, जबकि पानी में मौजूद कोलिफोर्म (coliform) का स्तर पीने के प्रयोजन के लिए 50 से नीचे, नहाने के लिए 500 से नीचे तथा कृषि उपयोग के लिए 5000 से कम होना चाहिए- हरिद्वार में गंगा में कोलिफोर्म का वर्तमान स्तर 5500 पहुंच चुका है। और कितना इन्तजार करेंगे साहब, जब सब समाप्त हो जायेगा
कोलिफोर्म (coliform), घुलित ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन के स्तर के आधार पर, अध्ययन ने पानी को ए, बी, सी और डी श्रेणियों में विभाजित किया है। जबकि श्रेणी ए पीने के लिए, बी नहाने के लिए, सी कृषि के लिए और डी अत्यधिक प्रदूषण स्तर के लिए उपयुक्त माना गया। बस एक मानक और बनाना डबल ज़ेड,?क्योंकि जल्दी ही ऐसा मानक चाहिए चूंकि हरिद्वार में गंगा जल में 5000 से अधिक कोलिफोर्म (coliform) है और यहां तक कि जल में घुली हुई ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन का स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, इसे श्रेणी डी में रखा गया है।
अध्ययन के अनुसार, गंगा में कोलिफोर्म (coliform) के उच्च स्तर का मुख्य कारण इसके गौमुख में शुरुआती बिंदु से इसके ऋषिकेश के माध्यम से हरिद्वार पहुँचने तक मानव मल, मूत्र और मलजल का नदी में सीधा निपटान है।एक अनुमान के अनुसार सनातन द्वारा पवित्र मानी जाने वाली गङ्गा जी में बीस लाख लोग रोजाना धार्मिक स्नान करते हैं।इस गङ्गा नदी के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व की तुलना प्राचीन मिस्र वासियों के लिए नील नदी के महत्त्व से की जा सकती है। जबकि गंगा को पवित्र माना जाता है। यहां गङ्गा रासायनिक कचरे, नाली के पानी मल मूत्र और मानव व पशुओं की लाशों के अवशेषों से भरी हुई है और गंदे पानी में सीधे नहाने से ( संक्रमण) अथवा इसका जल पीने से स्वास्थ्य संबंधी बड़े खतरे हैं
कुछ समय पूर्व नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि गंगा नदी की सफाई सरकार के इसी कार्यकाल में पूरी हो जाएगी. प्रमुख सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि केंद्र सरकार 2018 तक यह महात्वाकांक्षी परियोजना पूरी करेगी. तो मेरी सरकार 2018 भी आने वाला है जनता को अवगत कराये कहा तक आपकी सरकार सफल रही शुद्ध गङ्गा के बिना हिंदुस्तान का विकास अधूरा है साहब,
वही गौ मॉस को खाने वालो के देश मे गङ्गा शुद्ध करने सोच वैसै ही है जैसे भैंस के आगे बीन बजाना
जहाँ खुद को हिंदू कहने वाले ही गौ मॉस खाते, गौ हत्या का समर्थन करते हो उस देश और समाज़ को कोई मिटने से कोई बचा सकता..?
ऐसे दिखावे के काम हर बार कुछ कुछ कुछ समय मैं होते रहे हैं पर परिणाम तो शून्य ही हर बार रहा मित्रो 3साल पहले मोदी जी प्रधानमंत्री बने, राजीव गांधी की तर्ज़ पर गङ्गा जीको बचाने के लिये फ़ौज बना दी गई , ख्वाव देखना आरम्भ होगी 2019 तक गङ्गा को प्रदूषण मुक्त करने का कार्यक्रम बना, पर कितने प्रतिशत गङ्गा प्रदूषण मुक्त हुई..? क्या आपको ऐसा लगता है कि 2 अक्टूबर 2019 में " नमामि - गङ्गे " प्रोजेक्ट सहित हमारा भारत, साफ - सुथरा हो जाएगा ? मुझे तो ऐसा दिख रहा है - कि 2019 क्या 2029 तक भी, हमारी गङ्गा और हमारा भारत, साफ - सुथरा नहीं हो सकता । अब आप ही बताइए .माननीय मोदी जी कागज की नाव, और कागज पर प्रोजेक्ट ,किस काम के,मोदी जी लँगड़े घोड़े रेस नही जीतते, बस मीटिंग पर मीटिंग, और उस मीटिंग के लिये मीटिंग, चाय पार्टी बहुत हो चुका , अब मन की बात नही, जतन करने की बात हो। अधिकारी कहते हैं
मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा सफाई अभियान का एक्शन प्लान तैयार हो गया है।अथार्त (कागज की नाव तैयार ) हैं पर ऐसे प्लान राजीव गांधी ने भी आनन फानन मे बनाये थे क्या हुआ बस अधिकारी ही बदले सोच नही, इस अभियान में अब तक हजारों करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं पर अब तक गंगा साफ नहीं हुई, बल्कि उलटे और मैली हो गई है। गंगा सफाई अभियान के नाम पर 'गंगा एक्शन प्लान' के तहत हजारों करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। गंगा में प्रदूषण कम होने के बजाय गंगा और ज्यादा प्रदूषित हुई है। गंगा के नाम पर रोज नई-नई योजना-परियोजना बनाना एक तमाशा बनता जा रहा है और जनता तमाशबीन, मात्र,मोदी जी शायद आपको जानकारी होगी की हमारी गंगा की पहचान दुनिया की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में से एक के रूप में की जाने लगी हैं आंकड़े कहते है और यूईसीपीसीबी (UECPCB) अध्ययन के अनुसार, जबकि पानी में मौजूद कोलिफोर्म (coliform) का स्तर पीने के प्रयोजन के लिए 50 से नीचे, नहाने के लिए 500 से नीचे तथा कृषि उपयोग के लिए 5000 से कम होना चाहिए- हरिद्वार में गंगा में कोलिफोर्म का वर्तमान स्तर 5500 पहुंच चुका है। और कितना इन्तजार करेंगे साहब, जब सब समाप्त हो जायेगा
कोलिफोर्म (coliform), घुलित ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन के स्तर के आधार पर, अध्ययन ने पानी को ए, बी, सी और डी श्रेणियों में विभाजित किया है। जबकि श्रेणी ए पीने के लिए, बी नहाने के लिए, सी कृषि के लिए और डी अत्यधिक प्रदूषण स्तर के लिए उपयुक्त माना गया। बस एक मानक और बनाना डबल ज़ेड,?क्योंकि जल्दी ही ऐसा मानक चाहिए चूंकि हरिद्वार में गंगा जल में 5000 से अधिक कोलिफोर्म (coliform) है और यहां तक कि जल में घुली हुई ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन का स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, इसे श्रेणी डी में रखा गया है।
अध्ययन के अनुसार, गंगा में कोलिफोर्म (coliform) के उच्च स्तर का मुख्य कारण इसके गौमुख में शुरुआती बिंदु से इसके ऋषिकेश के माध्यम से हरिद्वार पहुँचने तक मानव मल, मूत्र और मलजल का नदी में सीधा निपटान है।एक अनुमान के अनुसार सनातन द्वारा पवित्र मानी जाने वाली गङ्गा जी में बीस लाख लोग रोजाना धार्मिक स्नान करते हैं।इस गङ्गा नदी के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व की तुलना प्राचीन मिस्र वासियों के लिए नील नदी के महत्त्व से की जा सकती है। जबकि गंगा को पवित्र माना जाता है। यहां गङ्गा रासायनिक कचरे, नाली के पानी मल मूत्र और मानव व पशुओं की लाशों के अवशेषों से भरी हुई है और गंदे पानी में सीधे नहाने से ( संक्रमण) अथवा इसका जल पीने से स्वास्थ्य संबंधी बड़े खतरे हैं
कुछ समय पूर्व नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि गंगा नदी की सफाई सरकार के इसी कार्यकाल में पूरी हो जाएगी. प्रमुख सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि केंद्र सरकार 2018 तक यह महात्वाकांक्षी परियोजना पूरी करेगी. तो मेरी सरकार 2018 भी आने वाला है जनता को अवगत कराये कहा तक आपकी सरकार सफल रही शुद्ध गङ्गा के बिना हिंदुस्तान का विकास अधूरा है साहब,
वही गौ मॉस को खाने वालो के देश मे गङ्गा शुद्ध करने सोच वैसै ही है जैसे भैंस के आगे बीन बजाना
जहाँ खुद को हिंदू कहने वाले ही गौ मॉस खाते, गौ हत्या का समर्थन करते हो उस देश और समाज़ को कोई मिटने से कोई बचा सकता..?








