Monday, May 15, 2017

मेरी गङ्गा यात्रा - 2

मेरी गङ्गा यात्रा - 2
यू तो कई वर्षो से मे हर वर्ष कुछ समय गंगोत्री के क्षेत्रो मे व्यतीत करता हूं पर मुझे सबसे बड़ा दुख इसी बात का रहा 
लोगो के मन मे पर्यवरण के प्रति कोई अच्छी सोच नही है, पहाड़ का आदमी मैदानी लोगो को पर्यावरण को दुषित करने का दोष मानता है और मैदानी सारा दोष पहाड़ के वासी को मढ़ते है की वो प्रकृति धरोहर को सँजोकर नही रख पाये,पर दोनों ही दोषी है 
पहाड़ो और नदियों का नाश करने के लिये,गङ्गा जी वा नदियों को प्रदूषित करने वाले नालो का विलय हो या उद्योगिक कचरा है तो हमारा, कोई दूसरी दुनिया से तो आया नही तो दोषी भी हम ही है गङ्गा जी किनारे बसने वाले शहरों न गङ्गा जी को केवल नदी मानकर उसका शोषण करना आरम्भ कर दिया विकास के नाम पर विनाश ने अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया जिसका परिणाम सभी से अवगत है कभी आपने सोचा है कि मानव ने जो विकास 1लाख वर्ष मे नही किया ,वो विकास और विनाश 150 वर्ष मे कर लिया हम पहियों के अविष्कार से वाई फाई पर आ गये, या यूं कहै मानव के अंत की ओर बढ़ गये, जल्दी ही मानव को रहने के लिये दूसरी धरती खोजनी होगी यह सत्य है हम स्वयं परमात्मा की दी सुंदर धरती का नाश कर रहे है खैर इतना लम्बा नही सोचते, बात केवल गङ्गा जी की ही करते है पिछले 1हजार वर्षों गङ्गा जी को मिटाने का मुहिम आरम्भ हो गया था बाकी बचा खुचा अंग्रजो वा अंग्रजो के हम बंधवा मजदूरों ने 150 वर्षो मे कर दिया और आज भी ब दस्तूर जारी है पिछले 30 वर्षों में मैंने देखा है गंगोत्री वा आस पास पक्के घरो की बाढ़ सी आ गई हैं विशेष रूप से गङ्गा के किनारों पर लोगो ने घर बना लिये है और गङ्गा की धारा भी अवरूद्ध होने लगी है सन्त महात्मा भी कहा कम है बड़े बड़े 5 स्टार आश्रमो का निर्माण गङ्गा की भूमि पर होने लगा है और सब का मल मूत्र गङ्गा जी को समर्पितं है जय हो, छोटी छोटी नालियों ने बड़े नालो का रूप ले लिया है होटलों की भी बाढ़ सी आ गई हैं
सुंदर पहाड़ बदरंग कर दिये जा रहे हैं निर्मल बहने वाली गङ्गा जी पर जगह जगह बांधो का निर्माण और गङ्गा जी को बाँधा जा रहा है जिससे गङ्गा की स्वरूप बदलता जा रहा है जो कि चिंता का विषय है
शेष कल

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