मेरी गंगा यात्रा भाग 100
इक प्रयास गंगा बचे
आज मेरी यात्रा अपने 100 कदम पर है पर अफसोस कि गंगा प्रदूषित ही रही, 100 वर्षो से मैला ढोती गंगा बत से बतर हो गई ओर हमने भी 50 वे वर्ष की ओर कदम बढ़ा दिया आज से 30 वर्ष पूर्व आरम्भ प्रयास जारी है ताजा स्थिति मोदी काल मे यह हैं कि आज भी नालों के जरिये गंगा जल में घुल गए मानव मल में ई. कॉलि जैसा फीकल कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया पाया जाता है। इसका उच्चस्तर पानी में बीमारी पैदा करने वाले रोगाणु की मौजूदगी को बढ़ाता है। FC की अनुमति प्राप्त सीमा प्रति 100 मिलीलीटर पानी में 2500 एमपीएन है। इसका अपेक्षित स्तर प्रति 100 मिलीलीटर में 500 एमपीएन है। सबसे ज्यादा एफसी पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में खाग्रा में पाया गया है। यहां प्रति मिलीलीटर 30,000 एमपीएन मिला है जो अनुमति प्राप्त स्तर से 12 गुना और अपेक्षित स्तर से 60 गुना ज्यादा है। तब जब आज गंगा पर विशेष ध्यान दिया जा है मोदी जी आने के बाद एक मंत्री का तबादला कर नया भार गड़गड़ी जी दिया गया पर प्रयास राजनीति से प्रेरित ही नजर आये सरकार ने गंगा को लेकर शोर मचाया तो मीडिया भी चिंतित दिखा यू लगा समाज मे परिवर्तन आ गया पर ,..? सब शेर कुछ दिन दहाड़े फिर सो गये आज न सरकार न समाज न मीडिया मे कोई चर्चा है न हलचल,..
क्या गंगा पर कार्यक्रम बना कर गंगा प्रदूषण मुक्त होगी सदियों से सबसे पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी का जल नालों से आने वाली गंदगी की वजह से और प्रदूषित हो गया है। ,उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड से गुजरने वाली नौ अंतर-राज्यीय सीमाओं पर पानी की गुणवत्ता के आंकड़ा बताते गंगा प्रदूषण मुक्त नही प्रदूषण युक्त हुई । गंगा की स्वच्छता को धन उगाही या व्यावसायिक व औद्योगिक धंधे के भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता है।यह बेहद दुखद है कि देश की नदियों के 351 हिस्से प्रदूषित हैं।