मेरी गंगा यात्रा भाग 97
एक प्रयास गंगा बचे
आज देश एक विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है जिनका इतिहास वैदिक युग से भी पुराना हैं जिनके रीतिरिवाज लाखो वर्ष पुराने हैं जो हर खुशी को उत्सव त्यौहार की तरह मनाते हैं जो धरती,पेड़,नदियों सब मे दैव रूप देखते हो,आज वह अपने घर मे ही बंधक लगते है अपने रीतिरिवाज मनाने की मानो स्वतन्त्रता नही है विसर्जन रिवाज़ो का हिस्सा हैं क्या विसर्जन से ही नदियाँ प्रदूषित होती हैं..?कल को सरकारें स्नान पर भी प्रतिबंध लगा दे तो ,…?करोड़ों लोगों के स्नान से गंगा मैली हो रही हैं त्योहारी सीजन में यदि आपने गंगा या उससे जुड़ी किसी सहायक नदी में मूर्ति विसर्जन करने की योजना बनाई है तो इसका परिणाम 50 हजार रुपये का जुर्माना चुकाकर भुगतना पड़ सकता है। राष्ट्रीय क्लीन गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने ये दिशा-निर्देश 16 सितंबर 19 को जारी किए थे। इनमें कहा गया है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों में किसी भी तरह के मूर्ति विसर्जन की अनुमति नहीं दी जाएगी हा यह आदेश केवल जनता पर ही लागू है सरकारी संस्था का कचरा नाले जा सकते है उसकी अनुमति हैं उसके लिये कोई कठोर कार्यवाही और जुर्माना नही है केंद्र सरकार ने गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए राज्यों को 15 बिंदु वाला दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसमें मूर्ति विसर्जन करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का आदेश दिया गया है।
भई कोई ऐसा कानून भी लाओ की सरकारी तंत्र पर भी कार्यवाही हो, नियमों का अनुलंघ्न करने वालो पर शिकंजा कसै,
No comments:
Post a Comment