मेरी गंगा यात्रा भाग 95
इक प्रयास गङ्गा बचे
कहते है कि गंगा जी का जल कभी ख़राब नहीं होता पर लगता हैं यह अब किताबी कहानी मात्र रह गई हैं जैसे कल्पना की कहानी अलिफ़ लैला हो, गंगा अपने पहले मैदानी तीर्थस्थान ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही थी जैसा कि आप जानते ही हैं गंगा के लगभग 2525 कि.मी. लंबे सफर तय करती हैं कितनी सुन्दर गणना हैं मानो भगवान सदाशिव ने स्वयं गंगा जी का सफर मार्ग तय किया हो. कहते है ऋषिकेश पहला मैदानी पड़ाव है. यहां नाले और सीवर का पानी गिरने से गंगा में प्रदूषण शुरू हो जाता है. पर अब नज़ारा कुछ और हैं। गंगा मे पहला नाला उत्तराखंड के शहर उत्तरकाशी से आरम्भ हो जाता है कुछ साल पहले तक त्रीवेणी घाट में सरस्वती नदी, गंगा में मिलती थी जो अब विलुप्त हो चुकी है. यही रहा तो गंगा भी विलुप्त हो जायेगी.विलुप्त सरस्वती नदी की जगह सरस्वती नाला ने ले ली है. इसमें पूरे शहर की गंदगी बहायी जा रही है जो आगे चलकर गंगा में मिल जाती है. गंगा किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं. इसलिए ये गंदगी भी गंगा में मिल रही है.पहाड़ी गङ्गा प्रदूषण के लिये मैदानी आबादी को,और मैदानी लोग पहाड़ियों को दोषी बताते है पर कम कोई भी नही ऐसे मे नुकसान नदियों के नाश के साथ हमारी आने वाली नस्लो का हो रहा है जो प्रदूषित वायु,जल,थल,नभ, और अब अंतरिक्ष को पायेंगे अगर आने वाली पीढ़ी का चित्र बनाये तो कैसा होगा कमर पर आक्सीजन का सिलेंडर, नाक मे पाइप, पेट के अगर भाग पर वाटर फ़िल्टर औऱ पानी की ख़ोज में मारा मारा फिरता जीवन,..मैं कई बार लिख चुका हूं कि विश्व के सभी राष्ट्र को एक होना होगा और मिलकर प्रयास करने होंगे क्योंकि मनुष्य एक जाति हैं और उसकी रक्षा मिलकर हो सकती हैं आज मनुष्य के विकास क्रम को लाखों वर्ष हो गये हैं पर आज भी हम आपस मे भेद भाव से जीते है तो साहब विकास कैसा..?विकास ने मानव उन्नति से अधिक विनाश को जन्म दिया हैं
Tuesday, October 15, 2019
मेरी गंगा यात्रा भाग 95
Monday, October 14, 2019
मेरी गङ्गा यात्रा भाग 94
मेरी गंगा यात्रा भाग 94
मित्रों ये तो अच्छा है कि नदियों के उथान के लिये विश्व के सभी देश प्रयासरत हैं वही भारत की नदियों की बात करे तो यह हमेशा से ही सरकार व समाज द्वारा अनदेखी का शिकार रही, या यूं कहे सरकार लापरवाह रही समाज नदियों की हत्या करता रहा और भूल गया कि जल ही जीवन हैं आज नदियों की अनदेखी का परिणाम आने लगा है प्रदूषित पानी बीमारियों का घर हो गया आज भारत मे कैंसर किड़नी फैलियर के मरीज क्यो बढ़ रहे है..? जिसका एक मुख्य कारण जल प्रदूषण नदियों की हत्या ही है ये मैं नही कहता ये WHO और सीपीसीबी की रिपोर्ट भी बताती है वही यह देखे साल 2013 के मुक़ाबले कई सारी जगहों पर गंगा के पानी का बीओडी लेवल बढ़ गया है, यानि पहले के मुकाबले गंगा और ज़्यादा दूषित हुई हैं साल 2017 की सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 80 में से 36 जगहों पर गंगा नदी का बीओडी लेवल 3 मिलीग्राम/लीटर से ज़्यादा था और 30 जगहों पर बीओडी लेवल 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था. वहीं साल 2013 में 31 जगहों पर गंगा का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा था और 24 जगहों पर 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था.सीपीसीबी के मापदंडों के मुताबिक अगर पानी का बीओडी लेवल 2 मिलीग्राम/लीटर या इससे नीचे है और डीओ लेवल 6 मिलीग्राम/लीटर या इससे ज़्यादा है तो उस पानी को बगैर ट्रीटमेंट (मशीन द्वारा पानी साफ करने की प्रक्रिया) किए पिया जा सकता है.वहीं अगर पानी का बीओडी 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में है तो उसका ट्रीटमेंट करना बेहद ज़रूरी है. अगर ऐसी स्थिति में बगैर ट्रीट किए पानी पीया जाता है तो कई सारी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.इसी तरह अगर पानी का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा और डीओ लेवल 5 मिलीग्राम/लीटर से कम है तो वो पानी नहाने के लिए भी सही नहीं है. इस पानी को पीने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. और लोग आस्था के नाम पर आचमन कर रहे है और बोतलों मे बन्द कर घर ले जा रहे तो परिणाम क्या होगा हालांकि गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादातर जगहों पर पानी की दशा ठीक नहीं है.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) साल 1980 से भारत की नदियों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर रहा है और इस समय ये 2,525 किलोमीटर लंबी गंगा नदी की 80 जगहों पर जांच करता है. इससे पहले सीपीसीबी 62 जगहों पर गंगा के पानी की जांच करता था.सीपीसीबी गंगोत्री, जो कि गंगा नदी का उद्गम स्थल है, से लेकर पश्चिम बंगाल तक गंगा के पानी की गुणवत्ता की जांच करता है. यह देखकर यही कह सकते है 2014 से उम्मीद हुई थी पर जय हो नमामि गङ्गे,.. निश्चित ही कठोर पर परिमाण आना बाकि के हैं मंगल पर जाने वाले भारत को नदियों की भी चिन्ता करनी होगी
मेरी गंगा यात्रा भाग 93
मेरी गंगा यात्रा भाग 93
इक प्रयास गंगा बचे
गंगाजी चेतन हैं और निरन्तर बहकर जहाँ जहाँ से गुजरती हैं उस भूमि को और वहाँ के रहने वाले सभी प्रणियों को भी चेतन कर देती हैं यही विशेषता गंगा जी को विश्व की अन्य नदियों से भिन्न करती हैं आप जानते ही हैं कि झूठे-सच्चे प्रयास तो हो ही रहे गंगा जी को बचाने के लिये,,राजनीति हो या समाज हित की सोच, पर प्रयास तो नज़र आ रहे है कुछ वर्षों से केंद्र और राज्य सरकारें भी प्रयासरत हैं राष्ट्रहित के लिये किया गया वोट मोदी जी के रूप मे सार्थक जान पड़ता हैं..? अगर इच्छा शक्ति और डण्डा मजबूत हो सब हो जाता है पर लापरवाही किसी भी सार्थक प्रयास की हत्या कर सकती हैं जो हो सकता हैं,गंगा जी को लेकर नितिन गड़गरी जी कठोर कहै जाते है देखे उमाजी के बाद ये कितने सार्थक सिद्ध होते है पर अभी मेरी भेट नही हुई बरहाल यहाँ देखें कुछ समय पहले दिल्ली में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपने ताजा अध्ययन में बताया कि जिन 39 स्थानों से होकर गंगा नदी गुजरती है उनमें से सिर्फ एक स्थान पर इस साल मानसून के बाद गंगा का पानी साफ था...? कुछ समझै यह ‘गंगा नदी जैविक जल गुणवत्ता आकलन (2017-18)’ की रिपोर्ट के अनुसार हैं रिपोर्ट कहती हैं गंगा बहाव वाले 41 स्थानों में से करीब 37 पर इस वर्ष मानसून से पहले जल प्रदूषण मध्यम से गंभीर श्रेणी में रहा नाश नही सवा सत्यानाश, वही.सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सीपीसीबी ने हाल ही में यह रिपोर्ट जारी की है.माना जाये तो अभी तक नमामि गङ्गा के नाम का पैसा, पानी मे बह गया,.. क्या यही ठोस प्रयास हैं चार वर्षों के, यही तो राजीव गांधी के समय में हुआ था क्या समय वही हालत पैदा कर रहा है..? मानसून से पहले 41 में से केवल चार स्थानों पर पानी की गुणवत्ता साफ या मामूली प्रदूषित कही जा रही हैं और मानसून के बाद 39 में से केवल एक स्थान पर नदी का पानी साफ था. इसमें मानसून के बाद केवल ‘हरिद्वार’ में ही गंगा का पानी ‘साफ’ था ये तब जब ये सरकारी रिपोर्ट हैं यदि ये काम कोई समाजसेवी संस्था करती तो परिणाम और विकट नज़र आते क्योंकि हम सभी हरिद्वार की स्थिति से अवगत हैं वहाँ गंगा मे गिरने वाले नालों की संख्या कम नही है फिर कैसे कहै की हरिद्वार मे पानी साफ है,.सीपीसीबी के द्वारा गुणात्मक विश्लेषण के लिए मानसून से पहले और मानसून के बाद पानी के नमूने लिए गए. इन्हें पांच श्रेणियों में रखा गया, साफ (ए), मामूली प्रदूषित (बी), मध्यम प्रदूषित (सी), बेहद प्रदूषित (डी) और गंभीर प्रदूषित (ई).रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 मानसून पूर्व अवधि में 34 स्थान मध्यम रूप से प्रदूषित थे, जबकि तीन स्थान गंभीर रूप से प्रदूषित थे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की दो बड़ी सहायक नदियां, पांडु नदी और वरुणा नदी गंगा में प्रदूषण बढ़ रहा है जो गंगा जी को प्रदूषित कर रही हैं मैंने पहले भी लिखा गङ्गा जी की सहायक नदियों पर काम किये बिना गंगा को बचाना असम्भव हैं वही दूसरी और मित्रो मद्रास हाईकोर्टअध्ययन में ये भी कहा गया है कि गंगा नदी की मुख्यधारा पर कोई भी स्थान गंभीर रूप से प्रदूषित नहीं था लेकिन अधिकतर जगह मध्यम रूप से प्रदूषित पाए गए. रिपोर्ट में कहा गया कि गंगा बहाव वाले 41 स्थानों में से करीब 37 पर इस वर्ष मानसून से पहले जल प्रदूषण मध्यम से गंभीर श्रेणी में रहा.इसी अध्ययन रिपोर्ट के एक अन्य अंश, जिसका शीर्षक है गंगा नदी के जैविक जल की गुणवत्ता की तुलना (2014-18), में बताया गया है कि रामगंगा और गर्रा नदी के पानी में मानसून बाद 2017-18 में भारी मात्रा में प्रदूषण था.सीपीसीबी की ये रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले चार सालों में गंगा नदी का पानी किसी भी जगह पर साफ नहीं हुआ है. अध्ययन के मुताबिक उत्तराखंड के जगजीतपुर और उत्तर प्रदेश के कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में गंगा नदी का पानी साल 2014-15 के मुकाबले साल 2017-18 में और ज्यादा दूषित हो गया है.साल 2017-18 में हरिद्वारा बैराज का पानी मानसून से पहले और मानसून के बाद दोनों समय साफ था हालांकि कानपुर और वाराणसी जैसे क्षेत्रों में नदी का पानी बहुत ही ज्यादा दूषित था. मालूम हो कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है.सीपीसीबी ने कहा, ‘प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए ताकि सभी स्थानों पर पानी की गुणवत्ता कम से कम ‘बी’ श्रेणी का हो सके.’ ‘बी’ श्रेणी के पानी की गुणवत्ता का मतलब है कि जलीय जीवन का समर्थन करने के लिए नदी का संरक्षण किया जाना चाहिए.बता दें कि गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता का आंकलन सीपीसीबी द्वारा दो तरीके से किया जाता है. एक तरीका होता है कि पानी का बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) , डीओ (डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन), तापमान, पीएच और कोलिफॉर्म बैक्टीरिया इत्यादि मापने के बाद पानी के गुणवत्ता की जानकारी दी जाए.वहीं दूसरा तरीका होता है पानी की जैविक निगरानी यानि की बायोलॉजिकल मॉनिटरिंग की जाए. सीबीसीबी का मानना है कि बायोलॉजिकल मॉनिटरिंग प्रदूषण के स्तर को बताने का ज्यादा बेहद तरीका है.द वायर ने सीपीसीबी द्वारा मुहैया कराए गए बीओडी और डीओ लेवल के आधार पर रिपोर्ट किया जिसमें ये बताया गया था कि पहले की तुलना में किसी भी जगह पर गंगा साफ नहीं हुई है, बल्कि साल 2013 के मुकाबले गंगा नदी कई सारी जगहों पर और ज्यादा दूषित हो गई हैं.केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गंगा सफाई के लिए ‘नमामि गंगे’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना चलाई जा रही है. जिसका को महत्व नही रह जाता,बस महत्वकांक्षी परियोजनाओ के नाम बदले गंगा जी हालत नही,या मैं तो यू ही कहूँगा राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप ढोते ढोते, गंगा साफ हुई हो या न हो पैसा साफ हो गया,गंगा के नाम पर 2014 से लेकर नवंबर 2018 तक में गंगा सफाई के लिए 4800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं पर कहा ..? सब कागज की बावड़ी, कागज मे रह गई चोर माल ले गये सरकार सोती रह गई, मॉरल इस देश का कुछ नही हो सकता
Sunday, October 13, 2019
मेरी गंगा यात्रा 92
मेरी गङ्गा यात्रा भाग 92
इक प्रयास गंगा बचे
आपको लगा होगा काफ़ी समय के बाद गंगा यात्रा पर लेख आया है कुम्भ 2019 मे काफ़ी समय बिता दिया भले कोई लेख नही लिखा पर गंगा जी पर चिंतन और प्रयास जारी था ये मरने के बाद ही समाप्त होगा या गङ्गा प्रदूषण मुक्त होने पर ,मित्रो कभी लगता हैं जीते जी गङ्गा पर प्रदूषण मुक्त देख लेंगे कभी लगता हैं अब के भी जीवन व्यर्थ गया
बड़े जोश के साथ इलाहाबाद मे सम्पन्न हुए धर्म संसद मे भी भाग लिया तीन दिवसीय कार्य कर्म में दो दिन ही रहे हम, आप कहेंगे क्यो, मेरी निगाह में धर्म संसद सुंदर ढोल पर शोर ही शोर रहा कोई सार्थक प्रयास नही था साहब बात है बातो का क्या है, बस्ता बन्द प्रस्ताव पारित हुए और कोई सार्थक प्रयास नही था
कुछ न हुआ
बस शोर हुआ
बस शोर हुआ
कहा हैं प्रयास
धरा तो खाली हैं
बह रही प्रदूषित
युही सब नदिया
कैसी है ये जिम्मेदारी
कैसी है ये रखवाली हैं
न धर्म ध्वजा उठा
तेरे बस की बात नही
चलो छोड़ो बात गंगा जी की करे यही तो कर्म हैं कुम्भ में सुंदर प्रयास रहे पर चोरी चोरी गङ्गा मे नाले भी गिरते रहे उस दौरान वाराणसी भी जाना हुआ वहाँ गंगा की स्थिति का क्या कहना काशी के विश्व सुंदरी पुल से लेकर वरुणा संगम स्थल तक गंगा काशी में ही रहती हैं। इस लगभग पांच किलोमीटर के क्षेत्र में शहर के 20 लाख आबादी वाले क्षेत्र के लिए करीब 832 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई गई करीब 350 एमएलडी मलजल और औद्योगिक प्रदूषित जल बाहर निकलता है, जबकि इसके शोधन के लिए केवल तीन प्लांट हैं। मै मन्दिर बाद में गया पर इनके दर्शन पहले हुए पता चला कि यह 9.8 एमएलडी क्षमता वाला भगवानपुर, 80 एमएलडी का दीनापुर और 12 एमएलडी का डीएलडब्लू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कुल 102 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट कर पा रहा है। बाकी का 248 एमएलडी सीवेज प्रतिदिन गंगा में मिलता है। जाहिर है कि काशी में प्रवेश करते समय गंगा साफ-सुथरी होती है। इसमें गिरने वाले नालों की गंदगी से गंगा में प्रदूषण दोगुना तक बढ़ जाता है।
Saturday, October 12, 2019
मेरी गंगा यात्रा भाग-88
इक प्रयास गंगा बचे
पहले गंगा जी इंसानो से कहती थी5 प्रदूषण न करें प्रकृति संसाधनों पर दया करे पर कोई सुनता ही नही था मानो कान मे रुई लगा कर घूम रहे हो अब गंगा जी ने कानों मे रुई लगा रखी हैं गंगा जी व उनकी सभी नदियों ने रौद्र रूप मे तांडव मचा रखा है पिछले भाग मे हमने हरिद्वार से वाराणसी तक बाढ़ की चर्चा की थी आज बिहार के राज्यों मे बाढ़ की क्या स्थिति हैं उसको देखेंगे बिहार में एक बार फिर कई नदियां उफान पर हैं. पिछले साल राज्य के 17 जिलों में बाढ़ आई थी. इससे करीब 1.71 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. 8.5 लाख लोगों के घर टूट गए थे और करीब 8 लाख एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी. क्षेत्रों में लगातार बारिश और बाणसागर व वाल्मिकीनगर बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सूबे की नदियां उफान पर हैं। कई जिलों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बक्सर, गोपालगंज, वैशाली, आरा, पटना से लेकर कटिहार तक कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बक्सर में तो एक ओर कर्मनाशा उफान पर हैं वहीं गंगा भी खतरे के निशान से महज आधा मीटर नीचे है। वहीं वाल्मिकीनगर बराज से 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यहां के निचले इलाकों में पानी भर गया है। बक्सर में बांध की सतह के करीब पहुंचा पानी सोमवार सुबह से जलस्तर में जारी वृद्धि देर रात से तेज हो गई। मंझरियां और उमरपुर के बीच बांध की सतह के करीब पानी पहुंच गया है। गंगा की विकराल स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया।केंद्रीय जल आयोग के कनीय अभियंता कन्हैया कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह तीन बजे से जलस्तर बढऩे की रफ्तार तीन सेमी प्रति घंटा है। ये सुबह 6 बजे से पुन: घटकर एक सेमी हो गई। बक्सर में अपराह्न तीन बजे 59.81 मीटर है। यहां खतरे का निशान 60.32 मीटर है। यहां बनारपुर के दर्जनों घरों में पानी समा गया था। इलाहाबाद से वाराणसी तक बढ़ा जल-स्तर बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता एजाज कलीम ने बताया कि इलाहाबाद से वाराणसी तक अभी भी पानी लगातार बढ़ रहा है। इलाहाबाद में रफ्तार आज थोड़ी कम हो गई है। उधर, वाराणसी में अभी समान गति से पानी बढऩे की सूचना है। बाणसागर से छोड़े गए पानी से भोजपुर में संभावित बाढ़ की भयावह स्थिति का खतरा टल गया है। गंगा नदी में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन आधी रात के बाद से सोन नदी के जल स्तर में लगातार गिरावट जारी है। वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने का सिलसिला फिर शुरू होने से गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढऩे लगा है। मंगलवार को वाल्मिकी नगर बराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से निचले इलाके के गांवों में नदी का पानी फैलने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।जलस्तर बढऩे के साथ ही गंडक नदी का कटाव भी तेज हो गया है। नदी के कटाव से विशम्भरपुर, धुपसागर आदि गांव में स्थिति बिगड़ती जा रही है। कटाव रोकने के लिए हो रहा प्रशासनिक कवायद नाकाफी साबित हो रहा है। गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से कुर्सेला और मनिहारी प्रखंड के कई गांव जलमग्न हो गए हैं।कुर्सेला प्रखंड के सलमारी चांय टोला, मैहर मियां टोला, पचकुट्टी, बाघमारा, पत्थर टोला मलिनिया गांव में बाढ़ से परेशानी बढ़ गई है।कई घरों के भीतर भी पानी घुस गया है। फसल को भी नुकसान पहुंचा है। स्कूलों में पठन-पाठन बाधित है। चांय टोला, पत्थर टोला में सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। प्रखंड मुख्यालय सहित कुर्सेला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना असंभव-सा हो गया है।गोबराही दियारा, घाट टोला, कैंप टोला रानी दियारा के ग्रामीण घरों में पानी प्रवेश कर जाने से नाव पर खाने पीने की सामग्री, जलावन लाद कर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ का पानी सड़क पर बहने के कारण पत्थर टोला में सड़क पर कटाव हो रहा हैं गंगा के जलस्तर में वृद्धि से मनिहारी प्रखंड के उतरी कांटाकोश, दक्षिणी कांटाकोश के अधिकांश हिस्से में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। धुरियाही पंचायत की हालत ज्यादा खराब है। अंचाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आवागमन के लिए प्रशासनिक स्तर से नाव भी उपलब्ध कराए जा रहे