मेरी गङ्गा यात्रा भाग 92
इक प्रयास गंगा बचे
आपको लगा होगा काफ़ी समय के बाद गंगा यात्रा पर लेख आया है कुम्भ 2019 मे काफ़ी समय बिता दिया भले कोई लेख नही लिखा पर गंगा जी पर चिंतन और प्रयास जारी था ये मरने के बाद ही समाप्त होगा या गङ्गा प्रदूषण मुक्त होने पर ,मित्रो कभी लगता हैं जीते जी गङ्गा पर प्रदूषण मुक्त देख लेंगे कभी लगता हैं अब के भी जीवन व्यर्थ गया
बड़े जोश के साथ इलाहाबाद मे सम्पन्न हुए धर्म संसद मे भी भाग लिया तीन दिवसीय कार्य कर्म में दो दिन ही रहे हम, आप कहेंगे क्यो, मेरी निगाह में धर्म संसद सुंदर ढोल पर शोर ही शोर रहा कोई सार्थक प्रयास नही था साहब बात है बातो का क्या है, बस्ता बन्द प्रस्ताव पारित हुए और कोई सार्थक प्रयास नही था
कुछ न हुआ
बस शोर हुआ
बस शोर हुआ
कहा हैं प्रयास
धरा तो खाली हैं
बह रही प्रदूषित
युही सब नदिया
कैसी है ये जिम्मेदारी
कैसी है ये रखवाली हैं
न धर्म ध्वजा उठा
तेरे बस की बात नही
चलो छोड़ो बात गंगा जी की करे यही तो कर्म हैं कुम्भ में सुंदर प्रयास रहे पर चोरी चोरी गङ्गा मे नाले भी गिरते रहे उस दौरान वाराणसी भी जाना हुआ वहाँ गंगा की स्थिति का क्या कहना काशी के विश्व सुंदरी पुल से लेकर वरुणा संगम स्थल तक गंगा काशी में ही रहती हैं। इस लगभग पांच किलोमीटर के क्षेत्र में शहर के 20 लाख आबादी वाले क्षेत्र के लिए करीब 832 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई गई करीब 350 एमएलडी मलजल और औद्योगिक प्रदूषित जल बाहर निकलता है, जबकि इसके शोधन के लिए केवल तीन प्लांट हैं। मै मन्दिर बाद में गया पर इनके दर्शन पहले हुए पता चला कि यह 9.8 एमएलडी क्षमता वाला भगवानपुर, 80 एमएलडी का दीनापुर और 12 एमएलडी का डीएलडब्लू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कुल 102 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट कर पा रहा है। बाकी का 248 एमएलडी सीवेज प्रतिदिन गंगा में मिलता है। जाहिर है कि काशी में प्रवेश करते समय गंगा साफ-सुथरी होती है। इसमें गिरने वाले नालों की गंदगी से गंगा में प्रदूषण दोगुना तक बढ़ जाता है।
Sunday, October 13, 2019
मेरी गंगा यात्रा 92
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