मेरी गंगा यात्रा भाग-88
इक प्रयास गंगा बचे
पहले गंगा जी इंसानो से कहती थी5 प्रदूषण न करें प्रकृति संसाधनों पर दया करे पर कोई सुनता ही नही था मानो कान मे रुई लगा कर घूम रहे हो अब गंगा जी ने कानों मे रुई लगा रखी हैं गंगा जी व उनकी सभी नदियों ने रौद्र रूप मे तांडव मचा रखा है पिछले भाग मे हमने हरिद्वार से वाराणसी तक बाढ़ की चर्चा की थी आज बिहार के राज्यों मे बाढ़ की क्या स्थिति हैं उसको देखेंगे बिहार में एक बार फिर कई नदियां उफान पर हैं. पिछले साल राज्य के 17 जिलों में बाढ़ आई थी. इससे करीब 1.71 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. 8.5 लाख लोगों के घर टूट गए थे और करीब 8 लाख एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी. क्षेत्रों में लगातार बारिश और बाणसागर व वाल्मिकीनगर बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सूबे की नदियां उफान पर हैं। कई जिलों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बक्सर, गोपालगंज, वैशाली, आरा, पटना से लेकर कटिहार तक कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बक्सर में तो एक ओर कर्मनाशा उफान पर हैं वहीं गंगा भी खतरे के निशान से महज आधा मीटर नीचे है। वहीं वाल्मिकीनगर बराज से 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यहां के निचले इलाकों में पानी भर गया है। बक्सर में बांध की सतह के करीब पहुंचा पानी सोमवार सुबह से जलस्तर में जारी वृद्धि देर रात से तेज हो गई। मंझरियां और उमरपुर के बीच बांध की सतह के करीब पानी पहुंच गया है। गंगा की विकराल स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया।केंद्रीय जल आयोग के कनीय अभियंता कन्हैया कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह तीन बजे से जलस्तर बढऩे की रफ्तार तीन सेमी प्रति घंटा है। ये सुबह 6 बजे से पुन: घटकर एक सेमी हो गई। बक्सर में अपराह्न तीन बजे 59.81 मीटर है। यहां खतरे का निशान 60.32 मीटर है। यहां बनारपुर के दर्जनों घरों में पानी समा गया था। इलाहाबाद से वाराणसी तक बढ़ा जल-स्तर बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता एजाज कलीम ने बताया कि इलाहाबाद से वाराणसी तक अभी भी पानी लगातार बढ़ रहा है। इलाहाबाद में रफ्तार आज थोड़ी कम हो गई है। उधर, वाराणसी में अभी समान गति से पानी बढऩे की सूचना है। बाणसागर से छोड़े गए पानी से भोजपुर में संभावित बाढ़ की भयावह स्थिति का खतरा टल गया है। गंगा नदी में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन आधी रात के बाद से सोन नदी के जल स्तर में लगातार गिरावट जारी है। वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने का सिलसिला फिर शुरू होने से गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढऩे लगा है। मंगलवार को वाल्मिकी नगर बराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से निचले इलाके के गांवों में नदी का पानी फैलने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।जलस्तर बढऩे के साथ ही गंडक नदी का कटाव भी तेज हो गया है। नदी के कटाव से विशम्भरपुर, धुपसागर आदि गांव में स्थिति बिगड़ती जा रही है। कटाव रोकने के लिए हो रहा प्रशासनिक कवायद नाकाफी साबित हो रहा है। गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से कुर्सेला और मनिहारी प्रखंड के कई गांव जलमग्न हो गए हैं।कुर्सेला प्रखंड के सलमारी चांय टोला, मैहर मियां टोला, पचकुट्टी, बाघमारा, पत्थर टोला मलिनिया गांव में बाढ़ से परेशानी बढ़ गई है।कई घरों के भीतर भी पानी घुस गया है। फसल को भी नुकसान पहुंचा है। स्कूलों में पठन-पाठन बाधित है। चांय टोला, पत्थर टोला में सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। प्रखंड मुख्यालय सहित कुर्सेला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना असंभव-सा हो गया है।गोबराही दियारा, घाट टोला, कैंप टोला रानी दियारा के ग्रामीण घरों में पानी प्रवेश कर जाने से नाव पर खाने पीने की सामग्री, जलावन लाद कर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ का पानी सड़क पर बहने के कारण पत्थर टोला में सड़क पर कटाव हो रहा हैं गंगा के जलस्तर में वृद्धि से मनिहारी प्रखंड के उतरी कांटाकोश, दक्षिणी कांटाकोश के अधिकांश हिस्से में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। धुरियाही पंचायत की हालत ज्यादा खराब है। अंचाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आवागमन के लिए प्रशासनिक स्तर से नाव भी उपलब्ध कराए जा रहे
इक प्रयास गंगा बचे
पहले गंगा जी इंसानो से कहती थी5 प्रदूषण न करें प्रकृति संसाधनों पर दया करे पर कोई सुनता ही नही था मानो कान मे रुई लगा कर घूम रहे हो अब गंगा जी ने कानों मे रुई लगा रखी हैं गंगा जी व उनकी सभी नदियों ने रौद्र रूप मे तांडव मचा रखा है पिछले भाग मे हमने हरिद्वार से वाराणसी तक बाढ़ की चर्चा की थी आज बिहार के राज्यों मे बाढ़ की क्या स्थिति हैं उसको देखेंगे बिहार में एक बार फिर कई नदियां उफान पर हैं. पिछले साल राज्य के 17 जिलों में बाढ़ आई थी. इससे करीब 1.71 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. 8.5 लाख लोगों के घर टूट गए थे और करीब 8 लाख एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी. क्षेत्रों में लगातार बारिश और बाणसागर व वाल्मिकीनगर बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सूबे की नदियां उफान पर हैं। कई जिलों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बक्सर, गोपालगंज, वैशाली, आरा, पटना से लेकर कटिहार तक कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बक्सर में तो एक ओर कर्मनाशा उफान पर हैं वहीं गंगा भी खतरे के निशान से महज आधा मीटर नीचे है। वहीं वाल्मिकीनगर बराज से 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यहां के निचले इलाकों में पानी भर गया है। बक्सर में बांध की सतह के करीब पहुंचा पानी सोमवार सुबह से जलस्तर में जारी वृद्धि देर रात से तेज हो गई। मंझरियां और उमरपुर के बीच बांध की सतह के करीब पानी पहुंच गया है। गंगा की विकराल स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया।केंद्रीय जल आयोग के कनीय अभियंता कन्हैया कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह तीन बजे से जलस्तर बढऩे की रफ्तार तीन सेमी प्रति घंटा है। ये सुबह 6 बजे से पुन: घटकर एक सेमी हो गई। बक्सर में अपराह्न तीन बजे 59.81 मीटर है। यहां खतरे का निशान 60.32 मीटर है। यहां बनारपुर के दर्जनों घरों में पानी समा गया था। इलाहाबाद से वाराणसी तक बढ़ा जल-स्तर बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता एजाज कलीम ने बताया कि इलाहाबाद से वाराणसी तक अभी भी पानी लगातार बढ़ रहा है। इलाहाबाद में रफ्तार आज थोड़ी कम हो गई है। उधर, वाराणसी में अभी समान गति से पानी बढऩे की सूचना है। बाणसागर से छोड़े गए पानी से भोजपुर में संभावित बाढ़ की भयावह स्थिति का खतरा टल गया है। गंगा नदी में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन आधी रात के बाद से सोन नदी के जल स्तर में लगातार गिरावट जारी है। वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने का सिलसिला फिर शुरू होने से गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढऩे लगा है। मंगलवार को वाल्मिकी नगर बराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से निचले इलाके के गांवों में नदी का पानी फैलने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।जलस्तर बढऩे के साथ ही गंडक नदी का कटाव भी तेज हो गया है। नदी के कटाव से विशम्भरपुर, धुपसागर आदि गांव में स्थिति बिगड़ती जा रही है। कटाव रोकने के लिए हो रहा प्रशासनिक कवायद नाकाफी साबित हो रहा है। गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से कुर्सेला और मनिहारी प्रखंड के कई गांव जलमग्न हो गए हैं।कुर्सेला प्रखंड के सलमारी चांय टोला, मैहर मियां टोला, पचकुट्टी, बाघमारा, पत्थर टोला मलिनिया गांव में बाढ़ से परेशानी बढ़ गई है।कई घरों के भीतर भी पानी घुस गया है। फसल को भी नुकसान पहुंचा है। स्कूलों में पठन-पाठन बाधित है। चांय टोला, पत्थर टोला में सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। प्रखंड मुख्यालय सहित कुर्सेला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना असंभव-सा हो गया है।गोबराही दियारा, घाट टोला, कैंप टोला रानी दियारा के ग्रामीण घरों में पानी प्रवेश कर जाने से नाव पर खाने पीने की सामग्री, जलावन लाद कर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ का पानी सड़क पर बहने के कारण पत्थर टोला में सड़क पर कटाव हो रहा हैं गंगा के जलस्तर में वृद्धि से मनिहारी प्रखंड के उतरी कांटाकोश, दक्षिणी कांटाकोश के अधिकांश हिस्से में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। धुरियाही पंचायत की हालत ज्यादा खराब है। अंचाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आवागमन के लिए प्रशासनिक स्तर से नाव भी उपलब्ध कराए जा रहे
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