मेरी गंगा यात्रा भाग 94
मित्रों ये तो अच्छा है कि नदियों के उथान के लिये विश्व के सभी देश प्रयासरत हैं वही भारत की नदियों की बात करे तो यह हमेशा से ही सरकार व समाज द्वारा अनदेखी का शिकार रही, या यूं कहे सरकार लापरवाह रही समाज नदियों की हत्या करता रहा और भूल गया कि जल ही जीवन हैं आज नदियों की अनदेखी का परिणाम आने लगा है प्रदूषित पानी बीमारियों का घर हो गया आज भारत मे कैंसर किड़नी फैलियर के मरीज क्यो बढ़ रहे है..? जिसका एक मुख्य कारण जल प्रदूषण नदियों की हत्या ही है ये मैं नही कहता ये WHO और सीपीसीबी की रिपोर्ट भी बताती है वही यह देखे साल 2013 के मुक़ाबले कई सारी जगहों पर गंगा के पानी का बीओडी लेवल बढ़ गया है, यानि पहले के मुकाबले गंगा और ज़्यादा दूषित हुई हैं साल 2017 की सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 80 में से 36 जगहों पर गंगा नदी का बीओडी लेवल 3 मिलीग्राम/लीटर से ज़्यादा था और 30 जगहों पर बीओडी लेवल 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था. वहीं साल 2013 में 31 जगहों पर गंगा का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा था और 24 जगहों पर 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था.सीपीसीबी के मापदंडों के मुताबिक अगर पानी का बीओडी लेवल 2 मिलीग्राम/लीटर या इससे नीचे है और डीओ लेवल 6 मिलीग्राम/लीटर या इससे ज़्यादा है तो उस पानी को बगैर ट्रीटमेंट (मशीन द्वारा पानी साफ करने की प्रक्रिया) किए पिया जा सकता है.वहीं अगर पानी का बीओडी 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में है तो उसका ट्रीटमेंट करना बेहद ज़रूरी है. अगर ऐसी स्थिति में बगैर ट्रीट किए पानी पीया जाता है तो कई सारी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.इसी तरह अगर पानी का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा और डीओ लेवल 5 मिलीग्राम/लीटर से कम है तो वो पानी नहाने के लिए भी सही नहीं है. इस पानी को पीने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. और लोग आस्था के नाम पर आचमन कर रहे है और बोतलों मे बन्द कर घर ले जा रहे तो परिणाम क्या होगा हालांकि गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादातर जगहों पर पानी की दशा ठीक नहीं है.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) साल 1980 से भारत की नदियों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर रहा है और इस समय ये 2,525 किलोमीटर लंबी गंगा नदी की 80 जगहों पर जांच करता है. इससे पहले सीपीसीबी 62 जगहों पर गंगा के पानी की जांच करता था.सीपीसीबी गंगोत्री, जो कि गंगा नदी का उद्गम स्थल है, से लेकर पश्चिम बंगाल तक गंगा के पानी की गुणवत्ता की जांच करता है. यह देखकर यही कह सकते है 2014 से उम्मीद हुई थी पर जय हो नमामि गङ्गे,.. निश्चित ही कठोर पर परिमाण आना बाकि के हैं मंगल पर जाने वाले भारत को नदियों की भी चिन्ता करनी होगी
Monday, October 14, 2019
मेरी गङ्गा यात्रा भाग 94
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