मेरी गंगा यात्रा भाग-56
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों गंगा जी की महिमा अपार हैं गंगा जीवन हैं गंगा जी जहां जहां से गुजरी वह जगह सोना उगलने लगी लाखो को जीवन देने वाली गंगा आज उदासीन मृत समाज का पोषण कर रही हैं कहते है गंगाजल का प्रवाह हिमालय के जिस भूमि भाग पर से आया है उसमें रेडियम के समान वस्तु है, जिससे प्रवाहित जल में उपयुक्त गुण दिखाई पड़ते है। भारत ही नही सम्पूर्ण विश्व गंगा जी की महिमा मण्डित करता हैं जो गंगा की प्रवाह धारा के समीप आया वो गंगा के कल कल करते सम्मोहन के मोह पाश में बंद कर रह गया और गंगा जी का होकर रह गया डॉक्टर रिचर्डसन कहते है कि ‘गंगा-गंगा’ कहने और उसके दर्शन करने मात्र से भी मानव हृदय पर अत्यन्त उत्तम प्रभाव पड़ता है। सुविख्यात डॉक्टर मि. डेरेल ने भी गंगा जी पर शोध किया है। वह कहते है भारत में जब हैजे और आँव के रोग व्यापक रूप में फैले हुए थे और इन रोगों से मरे व्यक्तियों के शव गंगा में फेंक दिये जाते थे तब उक्त डॉक्टर महोदय ने इन शवों के कुछ ही फुट नीचे गंगाजल की परीक्षा करके देखा कि हैजे और आँव के कीटाणुओं के होने की आशा थी वहाँ वास्तव में उनका एक भी कीटाणु नहीं था।कप्तान एडवर्ड मूर ने, जिसने टीपू सुलतान के साथ युद्ध में भाग लिया था, लिखाता है- “सबन्नर के नवाब केवल गंगाजल ही पीते थे।” और भी अनेक मुस्लिम नवाबों तथा बादशाहों का इतिहास पढ़ने से यह ज्ञात होता है कि वे अपने पीने में केवल गंगाजल का ही प्रयोग करते थे। प्रसिद्ध इतिहासकार श्री गुलाम हुसैन ने बंगाल के इतिहास ‘रियाजुप्त सलातीन’ में गंगाजल की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उक्त परीक्षा के उपरान्त डॉक्टरो ने गंगाजल के प्रयोग से एक औषधि का आविष्कार भी किया जिसका नाम ‘बैक्टीरिया फैज’ है और जिसे वर्तमान समय में अनेक रोगों की चिकित्सा में प्रयोग किया जा सकता है।हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के वैज्ञानिकों की टीम ने पशुओं और इंसानों में निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर के अलावा बर्न, घाव,सर्जरी व यूरिनल इन्फेक्शन का कारण बनने वाले क्लबसेला, स्यूडोमोनास, स्टेफाइलोकॉकस आदि बैक्टीरिया के चार बैक्टिरियोफाज (जीवाणुभोजी) को गंगा के जल से खोज निकाला है वैज्ञानिकों की टीम ने गंगाजल से मिले कुल आठ बैक्टिरियोफाज के अलावा विभिन्न स्थानों की मिट्टी व डंग आदि से 100 के करीब विभिन्न बैक्टिरियोफाज निकालकर एक फाज बैंक बना लिया है,डॉक्टर कहाविटा के प्रयोगों के अनुसार गंगाजल से सन्निपात ज्वर और संग्रहणी भी नष्ट हो जाते हैं। क्या कोई और नदी हैं जिसमें इस तरह के गुण पाये जाते है बहुत से लोगो ने मुझसे प्रश्न किया कि आप के केवल गङ्गा ही बचाने पर बल क्यू देते हैं ऐसा नही है कि मैं केवल गङ्गा जी को प्रदूषण मुक्त की बात करता हूं पिछले अंक मे मैंने दक्षिण की नदियों पर भी चर्चा की थी पर मेरी सोच कहि हैं गंगा भारत की प्रधान नदी हैं जिसकी अपनी धार्मिक मान्यताऐ हैं यदि गंगा प्रदूषण मुक्त हुई तो गंगा के प्रताप से अन्य नदियों को बचा आसान होगा यदि गंगा जी का अस्तित्व नही रहा तो ये हमारी संस्कृति और सभ्यता का हास् होगा विश्व की एक मात्र नंदी जिसका अपना गर्व है साहब महत्व है
Saturday, June 30, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-56
मेरी गंगा यात्रा भाग-55
मेरी गंगा यात्रा भाग-55
एक प्रयास गंगा बचे
मित्रों आज हम गंगा बचे इस का संकल्प ले चुके हैं आज कहि न कही गंगा को बचाने का मुहिम नजर आ ही जाता हैं इसका मतलब है कि समाज मे गंगा बचे इसको लेकर इच्छा शक्ति है पर वह पूरी तरह से सकारात्मक नही है कहि न कही जाग्रत इच्छा शक्ति पर नकारात्मक सोच अधिक है , गंगा प्रदूषण को लेकर 125 करोड़ भारतीय भी नकारात्मक सोच रखते हैं और यही कायर मन की नकारात्मकता संकल्प शक्ति को कमजोर करता हैं यह निश्चित है कि गंगा प्रदूषण मुक्त होगी यह मेरी जाग्रत इच्छा शक्ति है हम अपने जीते जी गंगा को प्रदूषण मुक्त देखेंगे, चिंता नही बस चिंतन हो,मित्रों सरकारी आंकड़ों के अनुसार हिंदुओं द्वारा पवित्र मानी जाने वाली गंगानदी में बीस लाख लोग रोजाना धार्मिक स्नान करते हैं। और महाकुंभ पर्व पर यह संख्या 5 करोड़ पहुँच जाती हैं बस यह सभी सकरात्मक सोच ले आये गंगा और अन्य सभी नदिया प्रदूषण मुक्त होंगी, जैसा कि हम सभी जानते है हिन्दू धर्म में कहा जाता है कि यह नदी भगवान विष्णु के कमल चरणों से (वैष्णवों की मान्यता) अथवा शिव की जटाओं से (शैवों की मान्यता) बहती है। गंगा जी की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व की तुलना प्राचीन मिस्र वासियों के लिए नील नदी के महत्त्व से की जा सकती है। पर जबकि गंगा जी को पवित्र और मोक्ष दायनी माना जाता है, वहीं पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित इसकी कुछ समस्याएं भी हैं। बढ़ती जनसंख्या ने आज गंगा की हालत बतर कर दी हैं वही सरकारी तंत्र की अनदेखी नाश को सत्यानाश करती हैं 70 वर्ष से अधिक हो गये आजादी को पर गंगा और अन्य नदियों प्रदूषण से आजाद नही हुई, सभी जानते और चाहते है कि गंगा प्रदूषण मुक्त हो पर करे कोई और,..? हर कोई यही कहता हैं उसको देखो कोई स्वयं को नही देखता, कि वह भी गंगा का दोषी हैं लापरवाही की हद तब होती हैं जब इसके किनारों पर सरकार ने स्वयं ही प्रदूषित इकाइयों को बसा दिया उधोगपति सरकार पर प्रतिरोपण करती हैं सरकार उधोगपतियो पर, यहां आवश्यक है सही सोच और इच्छा शक्ति की,कि नही हम प्रयास करेंगे, यह मेरी जिम्मेदारी हैं हम नदियों मे इस रासायनिक कचरे, नाली के पानी और मानव व पशुओं की लाशों के अवशेषों को नही जाने देंगे,गंगा पावन हैं और रहेगी, थोड़ा ही सही प्रयास होगा सब जा साथ होगा जब संकल्प से देश स्वतन्त्र हो सकता है तो गंगा जी प्रदूषण से मुक्त क्यों नही हो सकती,
Thursday, June 28, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-54
मेरी गंगा यात्रा भाग-54
इक प्रयास गंगा बचे
कई बार मुझे लगता हैं कि हमारी नदियों पर या ऐसे भी कह सकते है भारतीय जनमानस पर किसी प्यासे का श्राप लगा है जो नदियों प्रदूषित हो गई हैं जिस देश मे लोग प्याऊ लगाते थे इंसान और पशु दोनों के लिये,जहां जल को पिलाना धर्म और पुण्य का काम था उस देख मे पानी बिकता हैं विश्व का सबसे अधिक प्रकृति जल 4% भारत के पास है फिर भी लानत हैं कल हवा पर भी टैक्स होगा..? पानी क्या किसी फैक्ट्री मे बनता हैं,..? भई यह तो प्रकृति हैं जो क़ुदरत ने बेमोल दिया है फिर उसको बेचना कहा तक उचित हैं गरुड़ पुराण मे इसे महा पाप कहा हैं इसके लिये यम के द्वारा दण्ड का भी प्रवधान हैं प्रकृति देंन का फिर मोल क्यो,पानी मनुष्य की मौलिक आवश्यक हैं जिसके बिना कोई तीन दिन से अधिक जी नही सकता, वह भी बिक्री होने लगा है चलिये गंगाजल पर चर्चा करते हैं आयुर्वेद की दृष्टि से भी गंगाजल में जो गुण पाए जाते हैं। उन्हें देखकर भी चकित रह जाना पड़ता है। आयुर्वेद ने समय समय पर गंगा जल पर शोध किये महात्मा चरक ने जिसका काल आज से दो हजार वर्ष पूर्व है- गंगाजल को पथ्य माना है। आयुर्वेद मे चरक संहिता का अपना स्थान हैं आधुनिक युग मे चक्रमणि दत्त ने भी, जो सन् 1060 के लगभग हुए हैं, इसका समर्थन किया है। ‘भण्डारकर ओरियण्टल इन्स्टीट्यूट’ में एक प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थ है ‘भोजन कुतूहल’। उसमें गंगाजल की उपयोगिता बताते हुए लिखा है- ‘गंगाजल श्वेत, स्वादु, स्वच्छ, रुचिकर, पथ्य, भोजन पकाने योग्य, पाचक शक्ति बढ़ाने वाला और बुद्धि को तीव्र करने वाला है।गीता प्रैस मे भी बहुत सी पुस्तकें हैं जिसमें गंगा जल के शोध पर लेख मिलते है अलबतूता अरबी शोध कर्ता ने भी गंगा जल को औषधि कहा,’प्रसिद्ध विश्व यात्री मार्क टूइन ने अपनी ‘संसार-यात्रा’ में लिखा है- ‘गंगाजल’ की मैंने स्वयं परीक्षा की है। इसमें बीमारियों के कीटाणुओं को मारने की बड़ी शक्ति है। यह जल अत्यन्त शुद्ध और पवित्र है। मैं स्वामी हरिहर इस बात का समर्थन करता हूं जब से मैंने गंगा जल का आचमन लेना आरम्भ किया है इससे आत्म विश्वास बड़ा है हैं शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ी है यही कारण है कि हम भारतीयों का मानना है गंगाजल के पीने और उसमें स्नान करने से पापी मनुष्य के विचार भी शुद्ध और पवित्र हो जाते हैं।’फारसी के सुविख्यात कवि श्री आफरी ने भागीरथी के जल का गुणगान करते हुए लिखा ,गंगाजल में गोता लगाओ ताकि पुण्य का मोती हाथ लगे। यदि तुम अपने होठों को गंगाजल से तर कर लोगे तो फिर महायात्रा (मृत्यु) के वन में प्यास से न तड़पोगे और प्रलय के भयंकर ताप में पड़कर भी न जलोगे।’फ्राँसीसी यात्री टैवनियर ने भी गंगाजल के सम्बन्ध में इस प्रकार का बहुत कुछ लिखा है। गंगाजल की इन्हीं उपयोगिताओं के कारण हमारे यहाँ अनादि काल से राजाओं से लेकर निर्धनों तक इसका प्रयोग होता आया है। केवल हिन्दुओं में ही नहीं किन्तु मुस्लिम शासन काल में बादशाहों के महलों में भी गंगाजल का ही प्रयोग होता था लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एनबीआरआई के निदेशक डॉक्टर चंद्र शेखर नौटियाल ने एक अनुसंधान में प्रमाणित किया है कि गंगा के जल में बीमारी पैदा करने वाले ई कोलाई बैक्टीरिया को मारने की क्षमता बरकरार है.लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एनबीआरआई के निदेशक डॉक्टर चंद्र शेखर नौटियाल ने एक अनुसंधान में प्रमाणित किया है कि गंगा के पानी में बीमारी पैदा करने वाले ई कोलाई बैक्टीरिया को मारने की क्षमता बरकरार है.करीब सवा सौ साल पहले आगरा में तैनात ब्रिटिश डाक्टर एमई हॉकिन ने वैज्ञानिक परीक्षण से सिद्ध किया था कि हैजे का बैक्टीरिया गंगा के पानी में डालने पर कुछ ही देर में मर गया
डॉक्टर नौटियाल ने यह परीक्षण ऋषिकेश और गंगोत्री के गंगा जल में किया था, जहाँ प्रदूषण ना के बराबर है. उन्होंने परीक्षण के लिए तीन तरह का गंगा जल लिया था. एक ताज़ा, दूसरा आठ साल पुराना और तीसरा सोलह साल पुराना गंगा नदी का पानी औद्योगिक प्रदूषण के साथ साथ गंदगी का शिकार है
उन्होंने तीनों तरह के गंगा जल में ई-कोलाई बैक्टीरिया डाला. डॉ. नौटियाल ने पाया कि ताजे गंगा पानी में बैक्टीरिया तीन दिन जीवित रहा, आठ दिन पुराने पानी में एक एक हफ़्ते और सोलह साल पुराने पानी में 15 दिन. यानी तीनों तरह के गंगा जल में ई कोलाई बैक्टीरिया जीवित नहीं रह पाया.अभी गंगा जल पर और शोध होने चाहिए सरकार को चाहिए कि वह गंगा के लिये अलग से मंत्रालय बनाये जो गंगा के रख के साथ ही नये शोध भी करे आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध गंगा जल मिलना चाहिए जैसे हमारे बढ़ो ने हमें दी,
Tuesday, June 26, 2018
मेरी गंगा यात्रा-53
मेरी गंगा यात्रा भाग-53
इक प्रयास गंगा बचे
कल के लेख में हमने चर्चा कि की गंगा जल अमृत क्यो हैं क्यो गंगा जी अन्य नदियों से अलग है आज उसी क्रम को आगे बढ़ाते हैं प्राचीन व मध्यकाल के इतिहास में बहुत से शासको व तपस्वीयो का जीवन गंगा जल पान पर ही निर्भर होने का उल्लेख मिलता है। आज भी बहुत से तपस्वी साधु संत हैं जो अपने दिन की शुरुआत गंगा जल से ही करते हैं यह हम इस लिये कह रहे कि हम भी प्रतिदिन प्रात आचमन गंगा जल से ही करते हैं हर वर्ष हम गंगोत्री जी से 20 लीटर गंगाजल ले आते है और गंगा नाम गंगा जल से प्रात दिनचर्या आरम्भ करते हैं हमें गर्व है कि हम उस देश के वासी हैं जिस देश मे गंगा जी बहती है,सच यह हम सब का सौभाग्य ही हैं यदि हम इतिहास को देख तो पायेंगे इलबतूता अरबी ख़ोज कर्ता (1325—54) में अपनी यात्रा के वृतांत मे लिखता है। कि अकबर और औरंजेब जैसे शासक भी गंगाजल पीतै थे अंग्रेज जब कलकत्ता से इंग्लैंड के लिये रवाना होते थे वह भी हुबली से गंगा जल पीने के लिये भरकर ले जाते थे उन्हें मालूम था गंगा जल कभी सड़ता नही है लम्बे सफर के लिये यही उपयुक्त हैं वही हमारे अपने राजनेताओं ने व भारतीय सरकारो ने गंगाजल को अमृत के बजाय मात्र जल संसाधन समझा और उसका उपयोग बाँध, बाँध कर बिजली बनाने और औद्योगिक अपशिष्ट प्रवाहित करने का सहज सुगम माध्यम बना दिया और दुनियाँ को अमृत विहीन कर दिया। का इस्तमाल पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में किया जाता है। गंगाजल से ही शुद्धिकरण किया जाता है।धर्म ही नहीं किन्तु आयुर्वेद की दृष्टि से भी गंगाजल में जो गुण पाए जाते हैं, उन्हें देखकर हर कोई चकित रह जाता है।गंगाजल को घर रखना शुभ माना जाता है। गंगाजल में कभी दुर्गन्ध नहीं आती इसलिए इसको आसानी से घर में रखा जा सकता है। हिन्दू धर्म में यह बहुत मह्त्व रखता है कहा जाता है कि जिस घर में गंगाजल रखा होता है उस घर से नकारात्मक उर्जा कोसो दूर रहती है। लेकिन कई बार हम गंगाजल रखते समय कुछ गलतियाँ कर देते है इसके कारण कुछ न कुछ मुसीबत का सामना करना पड़ता है हमें । तो आइए आज हम बताते हैं गंगाजल कहा रखना चाहिए जिससे आपके घर में सकारात्मंक उर्जा का आगमन होगाअगर आप गंगाजल का एक छोटा सा उपाय करते हैं तो आपके घर में सकारात्मकता बनी रहेगी। आप सोमवार या गुरूवार के दिन गंगाजल को पीतल या चांदी के बर्तन में बंद करके रख दें और जब उसमें गंगाजल कम होने लगे तो उसमें और गंगाजल भर दें। कहा जाता है कि जिस घर में गंगा जल होता है वहां सुख समृद्धि आएगी।
Monday, June 25, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-52
मेरी गंगा यात्रा भाग-52
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रो जैसा कि आप जानते है कि गंगा जी की लम्बाई लगभग 2510 किलोमीटर हैं अतः हमारी गंगा यात्रा भी कम से कम 2510 भाग में होनी चाहिए अतः अगर इसी तरह गंगा यात्रा को पढ़कर शेयर कर रहे तो निश्चित ही हम इस पर शोध कदम बढ़ाते रहेंगे, आज आप और हम 51 वे कदम पर है और यात्रा अभी लम्बी हैं और उससे भी लम्बी गंगा जी के दर्द की कहानी हैं मा.मदन मोहन मालवीय जी से ही आरम्भ करें तो भी100वर्ष से अधिक हो गये हमने 1800, 1857, 1860,1902, के भी इलाहाबाद और हरिद्वार, वाराणसी की छाया चित्र देखैं हैं उस समय भी गंगा जी स्थिति उत्तम नही कहि जा सकती , अतः नजर दौड़ाये तो पायेंगे गंगा जी के प्रदूषण के पीछे भी एक षड्यंत्र काम कर रहा था,जो नही चाहते थे कि भारत की अति प्राचीन संस्कृति बचे लक्ष्य चार ग को मिटाना,..? गाय, गीता,गायत्री, गंगा, और वह कामयाब भी रहे ज़रा अपने भीतर झांक कर दे, यह आज भी बां दस्तूर जारी हैं यह सब 1हजार वर्ष से अधिक से जारी हैं प्रायः गंगा जी के आसपास ही चमड़ा उद्योग,बूचड़खाना,प्रदूषित उधोग बड़े मन्दिरों से सटा कर मस्जिद का निर्माण हुआ क्यो,आदि आदि की बस्ती बसाई गई..?और ये सब आज से न ही,न ही अंग्रेजो के समय बसाई गई यह उससे भी पहले से है अगर पुराने लेखकों की पुस्तकों का सहारा ले तो आप समझ जायेंगे की यह षड्यंत्र हैं तुलसीदास जी की रचित राम चरित्र मानस 1632 मे भी ऐसी टीस नज़र आती हैं,इतना होने पर भी हिंदू ही क्यो सैकुलर हैं..? बाकी क्यो नही, जब दुनिया के देख बोलना भी नही जानते थे भारत मे हजारों स्कूल गुरुकुल की स्थापना हो चुकी थी,अगर गंगा बच गई तो धर्म की स्थापना हो सकती हैं गंगा बची तो गायत्री गीता गौ को बचाना आसान होगा क्यो क्योंकि गंगा जल अमृत हैं अगर यह जल प्रदूषण मुक्त हुआ तो शक्ति का संचार निश्चित है गंगा जल मुक्ति ही नही शक्ति भी देखता हैं गंगा मे शक्ति प्रदान करने वाले बैक्टीरिया हैं जो शरीर के बैड बैक्टीरिया को मारता हैं गंगा एक मात्र नदी हैं जिसके जल मे कीड़े नही पड़ते इसरो को चाहिए कि गंगा जल पर रासायनिक ख़ोज करें, गंगा जल साधरण जल नही है आयुर्वेद ने गंगा को अमृत कहा हैं आयुर्वेद की दृष्टि से भी गंगाजल में जो गुण पाए जाते हैं। उन्हें देखकर आप चकित रह जायेंगे चरक संहिता ने जिसका काल आज से दो हजार वर्ष पूर्व है- गंगाजल को पथ्य माना है। चक्रमणि दत्त ने भी, जो सन् 1060 के लगभग हुए हैं, इसका समर्थन किया है। ‘भण्डारकर ओरियण्टल इन्स्टीट्यूट’ में एक प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थ है ‘भोजन कुतूहल’। उसमें गंगाजल की उपयोगिता बताते हुए लिखा है- ‘गंगाजल श्वेत, स्वादु, स्वच्छ, रुचिकर, पथ्य, भोजन पकाने योग्य, पाचक शक्ति बढ़ाने वाला और बुद्धि को तीव्र करने वाला है।और अब तो विज्ञान की कृपा से गंगाजल का महत्व भारत से बाहर भी प्रकाशित हो उठा है और इस जल के गुणों पर मुग्ध होकर विदेशियों ने भी इसे अपनाना प्रारम्भ कर दिया है।आज के विज्ञान का परीक्षण यह सिद्ध कर चुका है कि गंगाजल में शरीर की शक्ति बढ़ाने की अपूर्व शक्ति है और इसका सेवन करते रहने पर रोगी तथा दुर्बल व्यक्ति को डाक्टरी टानिक पीने की आवश्यकता नहीं रहती। इसके पीते रहने पर अजीर्ण रोग, जीर्ण ज्वर तथा संग्रहणी, तपेदिक, दमा इत्यादि रोग शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं। प्लेग, हैजा, मलेरिया आदि संक्रामक रोग गंगाजल के सेवन से अदृश्य हो जाते हैं। रोगों के कीटाणुओं को नाश करने की शक्ति इसमें अद्वितीय है।
मेरी गंगा यात्रा भाग-51
मेरी गंगा यात्रा भाग-51
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रो याद होगा जब केंद्र सरकार ने मा.उमा भारती जी का पुलिंदा बाँधा, पिछले भाग मे आपने पढ़ा ही होगा हमने उमा जी कार्य शैली पर प्रकाश डाला था किस तरह वह 2018 तक गंगा प्रदूषण मुक्ति की बात करती थी जो कि असम्भव हैं, हमने पहले ही कहा इस काम मे कम से कम 20 वर्ष लगेंगे,उमा जी से गंगा को बचाने का भार व मंत्रालय छीन लिया गया और नितिन गड़गड़ी को दिया तब 2018 मे केंद्र सरकार ने मार्च 2019 तक गंगा नदी के 80 फीसदी तक साफ हो जाने का भरोसा जताया था। फिर मोदी सरकार हवा मे बात करने लगी,आज 6माह भी बीत गये, क्या परिणाम हुआ..? केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा की सफाई के लिए पिछले 4 साल में किए गए कार्यों का ब्योरा देते हुए बताया कि गंगा को प्रदूषित कर रहे 251 उद्योगों को बंद किया जा चुका है और 938 उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण की रीयल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके साथ ही गंगा के पूरे मार्ग में ऐसे 211 बड़े नालों की पहचान की गई है, अभी पहचान ही हुई हैं.? फिर कैसे अगले 6माह मे सब काम पूरे होंगे,खैर अभी211 नालो की पहचान ही हुई हैं जो इस गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं।साहब हमसे बात करते यह सब काम हमने पहले ही किये हुए है आपका समय बचता, 4 वर्ष लग गये,फिर आप चुनाव मे लग जायेगे,पिछले कई वर्षों इस पर हम काम कर रहे है इस मीटिंग मे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा किनारे के 4,470 गांवों को खुले में शौच की समस्या से मुक्त करा लिया गया है। सच..? कृपया एक बार रिषिकेश से हरिद्वार ही देख ले, दोनों ओर के घाट मल से भरे है उमा जी कहै तो ताजी ताजी भेजे फोटो..? उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने वर्ष 2014 के चुनावों में गंगा को अगले 5 वर्षो में प्रदूषण मुक्त करने का वादा किया गया था। सरकार अब इस कोशिश में है कि अगले साल होने वाले चुनावों से पहले गंगा को ज्यादा से ज्यादा साफ कर दिया जाए। क्या चुनाव से पहले पहले 2 हजार करोड़ साफ कर दिये जाये..? मान्य गडकरी ने बताया कि गंगा को साफ करने के 'नमामि गंगे मिशन' के तहत अब तक 195 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी । इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स बनाने और सीवर लाइनें डालने के साथ ही शवदाह गृहों का निर्माण भी शामिल है। क्या नितिन जी बतायेंगे की कितना काम पूरा हुआ,..?4 वर्षों मे, इसमें से 24 परियोजनाओं का काम पूरा हो गया है। कृपया यह भी बता दे वह कौन कौन सी परियोजनाये हैं ..? इसके साथ ही घाटों के सौन्दर्यीकरण का काम भी किया जा रहा है। हा कुछ को देख था जो आधे अधूरे हैं हरिद्वार के परमानन्द घाट के पार देखै..? सब नजर आ जायेगा या कुछ के पत्थर और लोहा लंगड़ को कंगले उखाड़ कर ले गये उमा भारती ने बताया था कि जिन गांवों को खुले में शौच की समस्या से मुक्त किया गया है, उन्हें अब प्लास्टिक मुक्त बनाने की मुहिम चलाई जा रही है। उमा जी समय समय पर दौरा करती हैं उन गाँव का ..? अब जरूर जायेगा, मोतियाबिंद ठीक हो जायेगा, कुछ नही बदला,गंगा किनारे औषधीय पौधे लगाने का काम भी किया जा रहा है। पर दूसरी ओर विकास के नाम पर और हाईवे के नाम पर लाखों पेड बलि चढ़ गये,दिल्ली हरिद्वार मार्ग को कुम्भ मेला 2010 तक बनना था क्या हुआ वह आज तक अधूरा हैं आज आठ वर्ष हो गये,जो सरकारे 100 किलोमीटर का हाइवे नही बना पाई वह 2500 किलोमीटर लगभग गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की बात करती हैं गडकरी जी ने कहा था कि उत्तराखंड में गंगा को साफ रखने के लिए 31 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई हैं, जिनमें से 18 का काम पूरा हो गया है। कोई गंगा पुत्र बताये क्या क्या हुआ
2014 से अब तक हुआ तो बस टूरिज्म के नाम पर गंगा और उत्तराखंड के पहाड़ी कस्बों का नाश, साहब हो सके तो गंगा को मुक्त करै अविरल बहने दे इसी मे भारतीयों की सच्ची भलाई हैं आपके और जिनके भी मन मे गङ्गा जी को बचाने का ख्याल हैं माँ गंगा उन पर कृपा करें
मेरी गंगा यात्रा भाग-50
मेरी गंगा यात्रा भाग-50
इक प्रयास गंगा बचे
सदियों सदियों से भारतीय जनमानस को मोक्ष दिलाने वाली माँ, माँ गंगा का जल प्रदूषण के कारण काला पड़ता जा रहा है। वह दिन दूर नही जब गंगा व इनकी सहायक नदियों नाला बन जायेगी, गंगा में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण इसके तट पर निवास करने वाले लोगों द्वारा नहाने, कपड़े धोने, सार्वजनिक शौच की तरह उपयोग करने की वजह है। अनगिनत टैनरीज, रसायन संयंत्र, कपड़ा मिलों, डिस्टिलरी, बूचड़खानों और अस्पतालों का अपशिष्ट गंगा के प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा रहा है। औद्योगिक अपशिष्टों का गंगा के प्रदूषण में बढ़ता योगदान प्रमुख चिन्ता का कारण है। जिस पर पहले भी हम चर्चा कर चुके औद्योगिक कचरे के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे की बहुतायत ने गंगाजल को बेहद प्रदूषित किया है एक गन्दी आदत को लोगो ने धर्म से जोड़ दिया कि वह अपने कपड़े स्नान के पश्चात नदियों मे छोड़ आते है यह क्या बैफकूफ़ी है बढ़ते जनसंख्या विस्फोट के कारण गंगा का पानी तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ ही बहाव भी कम होता जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो गंगा में पानी की मात्रा बहुत कम हो जायेगी, जो होगी वह भी प्रदूषित हो जाएगी। देश के प्रमुख धार्मिक शहर वाराणसी की पहचान गंगा के निर्मल जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गंगा का जलस्तर इस तेजी से गिर रहा है कि विगत एक वर्ष के भीतर गंगा में ढाई फिट पानी घट गया है। जिन घाटों पर बैठकर कभी लोग गंगा के निर्मल जल में स्नान कर पापों का नाश किया करते थे उन घाटों से गंगा का जल दूर हो गया है। गंगा के घटते जलस्तर से सभी परेशान हैं। गंगा नदी में आॅक्सीजन की मात्रा भी सामान्य से कम हो गई है प्रदूषण के चलते इन लाभदायक विषाणुओं की संख्या में भी तेजी से कमी आ रही है। इसके अतिरिक्त गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे कछुए, मछलियाँ एवं अन्य जल-जीव समाप्ति की कगार पर हैं या उनका अवैध शिकार हो रहा है वह भी पुलिस की नाक के नीचे,इन सब परेशानीयो के लिये केंद्र सरकार द्वारा ‘गंगा एक्शन प्लान व राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना’ लागू की गई । सरकार द्वारा इन योजनाओं पर अरबों रुपए खर्च किये जा चुके हैं लेकिन हकीकत में क्या गंगा के प्रदूषण में कमी आई है..? बस सरकार आंकड़े ही इकठ्ठे कर रही हैं बाद में इन सबका अचार बनाया जायेगा, जो सरकारी स्कूली बच्चों को मिडेमिल के साथ बस परोसा जायेगा,बस गंगा धर्म का या चुनावी मुद्दा ही बनकर रह गई हैं साहब इस देश मे नारी और नीर दोनों राम भरोसे हैं
जिसकी पीड़ किसी को नही दिखाई पड़ती, हा चुनाव के समय को छोड़कर, एक प्रश्न क्या हिन्दू धर्म पर सँगठित करने वाले बड़े बड़े आश्रम, विशाल कार्यालय बनाने वाले संगठन कभी गंगा का दामन भी पकड़ेंगे,..? या बड़ी बड़ी बिल्डिंगो के नाम पर ही चन्दा, धनदा करते रहेंगे, अगर गो, गीता गाय, गंगा ही नही रहे तो इनका क्या करेंगे, फिर चाहे जितना मर्जी एक दो, एक दो, करते रहना,