इक प्रयास मेरी गंगा यात्रा भाग-35
गंगा की निर्मलता, स्वच्छता और अविरलता के लिए पिछले 30 वर्षों से हरिद्वार, वाराणसी, दिल्ली, पटना,कानपुर की धरती पर अनशन और धरन होते रहे है जिस पर हम पहले के भाग में बात कर चुके है आज फिर कुछ चर्चा आगे बढ़ाते हैं अपने आंदोलन की चर्चा मे अगले भाग मे करने की कोशिश करूँगा गंगा प्रदूषण मे के मामलों पर शंकराचार्य स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वर्ष 2006 में एक माह तक अनशन कर चुके हैं।वही विरोधी स्वर भी उठने लगे , गंगा जी पर राजनीति हावी होने लगी यू कहै की समाज मे बने समाज धर्म (भाजपा, कांग्रेस,सा पा, ब स पा,) आदि आदि सभी केवल एक दूसरे की टांग खिंचाई के सिवाय कुछ नही था यानी न कुछ करेंगे न किसी को करने देगे,गंगा प्रदूषण पर यही मुद्दे विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की कई धर्मसंसदों में उठाए गए हैं। वर्ष 1992 के अर्द्धकुंभ, 1998 के कुंभ, 2004 के अर्द्धकुंभ और 2010 के हरिद्वार कुंभ 2013 के इलाहाबाद कुंभ के दौरान हजारों संतों ने सम्मेलन कर गंगा रक्षा के सवाल उठाए थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रयासों को कांग्रेसी होने का तगमा मिला जो शर्म की बात है, वही भा ज पा की सरकार के सत्ता मे आते ही गंगा पर उठने वाली आवाजे मन्द पड़ने लगी राम मंदिर, गंगा प्रदूषण सभी ठंडे बस्ते मे चले गये स्वामी भक्त विकास विकास की बात करने लगे नये नये मुद्दों जैसे नोट बन्दी, GST के नीचे दब गये 16 करोड़ रुपये से अधिक वाराणसी के घाटों और गंगा आरती पर खर्च कर दिये गये वाराणसी के दत्तक पुत्र ने आनन फानन में गंगा बचाने के लिये नमामि गंगे का नारा लगा दिया पर ये कोई नई बात थोड़े है ऐसा तो कांग्रेस के समय मे राजीव गांधी ने भी किया था और सार्थक प्रयास भी नज़र आने लगे पर राजीव गांधी के मरने से सब खटाई मे चला गया आज वाराणसी के दत्तक पुत्र मोदी जी विदेशी दौरों मे लग गये और नमामि गंगे जापानी प्रधानमंत्री के गंगा आरती के बाद ठंडा से हो गया घण्टे, घड़ियाल, शंख की नाद मे गंगा जी आहै दब गई हरिद्वार के परमार्थ घाट के सामने नमामि गंगे के अवशेष टूटे फूटे देखै जा सकते हैं जो सौंदर्य कर्ण के नाम पर दीवार का निर्माण था,भाई गंगा सौंदर्य करण नही गंगा प्रदूषण मुक्त की चाह है
वही स्वामी चिन्मयानंद से लेकर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ सहित अनेक संतों ने गंगा रक्षा के लिए गंगा सागर तक की वी वी आई पी यात्राएं की हैं। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भी यात्राएं निकाली।जो मनोरंजन का साधन मात्र रही जो जय गंगा माता की,हर हर महादेव नाम के साथ आरम्भ हुआ और निपट गये बाबा रामदेव ने पहले अकेले बाद में प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के साथ मिलकर आंदोलन किया।जो केवल प्रोडक्ट प्रचार मात्र रहा उसके बाद लाला जी सॉरी बाबा जी अपनी दुकान मे व्यस्त हो गये और हो भी क्यों न दुकान थोड़े बन्द करनी है वही मातृसदन के संत शिवानंद सरस्वती के नेतृत्व में तो गंगा रक्षा के लिए अनेक आंदोलन चलाए गए।अब वह भी थक गये कई बार संतों ने हरिद्वार से दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यालयों में पीड़ा व्यक्त की। वर्ष 2004 में हरिद्वार के संतों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर गंगा के लिए आवाज उठाई। अनेक संत भी विभिन्न बैनरों तले दिल्ली में गंगा की आवाज बुलंद कर चुके हैं। लेकिन इन सब का कोई असर कहीं दिखाई नहीं देता।
Tuesday, June 5, 2018
मेरी गङ्गा यात्रा भाग -35
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