इक प्रयास मेरी गंगा यात्राभाग-36
मित्रों गंगा यात्रा का पड़ाव आज कल Aआंदोलनो की चर्चा पर है आज हम उमा जी पर चर्चा करेंगे कल ट्विटर पर उमा जी का ट्विट देखा सन्तोष कम आश्चर्य अधिक हुआ उमा जी ने लिखा कि गंगा प्रदूषण नमामि गंगे के अंतर्गत हम अपने लक्ष्य को 2018 तक पुरा करेंगे ऐसे ट्विटर और वक्तव्य वह आये दिन देती रहती है हॉ नाव मे गंगा की सैर भी बा खूबी जारी हैं(शायद नाव से गन्दे नालो को साफ कर रही है.?) शायद उमा जी चापलूसों की भीड़ मे फ़ँस गई है या मुंगेरी लाल के हँसी सपनों का आनन्द ले रही हैं कोई बताये 2018 मे मात्र 6 माह ही शेष हैं आमरण अनशन करने वाली उमाजी शायद गंगा की बीमारी को हल्का ले रही हैं मुख्यतया 100 वर्ष पुरानी बीमारी को हल करने मे 20 वर्ष लगेंगे वो भी अगर ईमानदारी से हो उमाजी आप को मोदी की तारीफ़ से फुर्सत मिले तो आपको उनके साथ इस्राएल का दौरा भी करना चाहिये था तो आप को ज्ञात होता नदियाँ की सेवा किसे कहते है या मोदी जी से कहै की वह तीन दिन इस्राएल मे है वहाँ की एक मात्र जल स्रोत नदी को देखै कैसे उन्होंने ने मरती एक नदी को नव जीवन दिया है आमरण अनशन करना फिर छोड़ देना फिर आंदोलन फिर यात्रा क्या था ये सब.? या केवल राजनीति और सत्ता का सुख भोगने के माध्यम मात्र रहा, ऐसा न हो आप के देखा देखी और भी आपके मार्ग को अपना ले,ये सब दिखावा कुयू..?
वहाँ गांधी ये क्या आंदोलनों का दौर चलाया था आपने आंदोलन तो हैं पर सहज सार्थक प्रयास की जगह प्रपंच ने लायै ली है वही आंदोलनों के दौर मे एक नाम मातृसदन के संत श्री शिवानंद सरस्वती जी का भी है जिनके नेतृत्व में तो गंगा रक्षा के लिए अनेक आंदोलन चलाए गए। कई बार संतों ने हरिद्वार से दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यालयों में पीड़ा व्यक्त की। लम्बे लम्बे पत्रों की झड़ी लगा दी गई कुछ के जवाब मिले कुछ रद्दी की टोकरी मे गये जिन पर विचार करना भी जरूरी नही समझ गया वर्ष 2004 में हरिद्वार के संतों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर गंगा के लिए आवाज उठाई।अब तक अनेक संत भी विभिन्न बैनरों तले दिल्ली में गंगा की आवाज बुलंद कर चुके हैं। लेकिन इन सब का कोई असर कहीं दिखाई नहीं देता।
Tuesday, June 5, 2018
मेरी गङ्गा यात्रा भाग -36
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