मेरी गंगा यात्रा भाग-49
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों आज योग दिवस हैं पहले आप सभी को शुभकामनाये आज विश्व के 137 से अधिक देशों मे योग दिवस बनाया जा रहा है यह विश्व मे भारत का बड़ता वर्चस्व नही तो क्या है पर क्या योग के साथ निरोगी रहना होगा,..? जब तक शुद्ध वायु और जल नही होगा, विश्व मे बढ़ता प्रदूषण अधिक चिंता विषय हैं यही ऐसी ही तापमान बढ़ता रहा तो निश्चित ही धरती से जल ही न मिट जाये, सब से बुरी स्थिति भारत की हैं जिसका कारण एक नही अनेक हैं, बढ़ती आबादी भारत मे भुखमरी और केवल बर्बादी हैं, जिस पर शीघ्र विचार होना चाहिए, इंद्रा गांधी का नारा हम दो हमारे दो आज फिर से सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है अन्यथा बढ़ती जनसँख्या नदियों को लील जायेगी,आज भूमि का जल स्तर तेजी से कम हो रहा है जो चिंता और चिंतन का विषय हैं बात गंगा जी की करते है एक अखबार के अनुसार एन.जी.टी. ने हरिद्वार से कानपुर के मध्य कार्यरत जिन एक हजार सत्तर औद्योगिक इकाइयों की सूची वेबसाइट पर स्पष्ट करने का आदेश दिया है, उनमें से अधिकांश बिना पंजीकरण के ही चल रही हैं। जिन मे अधिक ऐसे हैं जिनके पास कोई वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भी नही है आश्चर्य हैं,कि एक ऐसे समय में जब प्रदूषण को जीवन के लिए बतौर एक गंभीर समस्या निरंतर रेखांकित किया जा रहा है, तब भी राज्य सरकारें कुम्भकर्ण की नींद सो रही हैं नदियों की स्वच्छता का मुद्दा अभी भी गौण ही बना हुआ है। हैरानी की बात यह भी है कि नदियों में बढ़ते जा रहे प्रदूषण के संदर्भ में अदालतों की ओर से हमारी सरकारों को कई-कई बार फटकारा जा चुका है। पर कोई असर नजर नही आता,आता हैं तो बस एक दूसरे पर आरोप प्रतिरोपण करना,जन-स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल-प्रभावों के आंकड़े भी समय-समय पर जाहिर किए जाते रहे हैं। यहां तक कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण, केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय भी नदियों में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं, फिर भी हलातों में जरा भी सकारात्मकता दिखाई नहीं देती है, हैरानी की बात है प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर नजर रखने वाले सरकारी संस्थानों की निष्क्रियता देखते ही बनती है। यहां कोई और कारण है..?
Thursday, June 21, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-49
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