Tuesday, June 5, 2018

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-31

मेरी गंगा यात्रा भाग-31
दुनिया भर मे गंगा को प्रेम करने वाले लोगो की कमी नही है गंगा जी की महिमा ही अपरम पर है मित्रो सब विश्वास का खेल हैं यदि विश्वास हो तो आस्था परमात्मा का रूप ले लेती हैं पर ये उन लोगों को कभी समझ नही आयेगा जो स्वार्थ की सिद्धि के पुजारी हैं भारत के लोगो को सिखाना हैं तो सूरीनाम से सीखे, यू तो  लाखों-करोड़ों लोगों को अपने जल से सिंचित और मोक्ष प्रदान करने वाली गंगा भारत में बहती है पर आस्था का संसार यही नहीं अपितु भारत के बाहर भी आस्था की प्रतीक है मित्रों आपको जानकर हैरानी और खुशी होगी कि ऐसा ही एक देश है सूरीनाम। भौगोलिक रूप से हमसे 16000 किलोमीटर दूर इस छोटे से देश में लोग गंगा माता मंदिर और वहीं के स्थानीय नदी के पास गंगा घाट बनाकर मां गंगा की पूजा अर्चना करते हैं। उनका मानना है कि गंगा समुद्र में मिलती है और समुद्र एक दूसरे से मिलते हैं इस तरह गंगा सूरीनाम में भी है।भारत मे जो कुम्भ के लिये नही आ पाये उन्होंने  वर्ष 2010 में यहां कुम्भ पर्व का आयोजन भी किया ये है सही मान्य मे आस्था गंगा प्रेम वह सच्चे गंगा पुत्र हैं वहाँ गंगा न होते हुए भी गंगा दिल मे है पूर्वजों की आस्था का सम्मान है उनकी भी आस्था हैं उनकी अस्थियोँ को गंगा मे स्थान मिले ओर यहाँ सब उल्टा हैं अपना काम बनता भाड़ मे जाये गंगा, नदी नालों बने या कुछ और सबका एक ही जवाब हैं हम क्या कर सकते हैं सच कायर और हारे का कौन सहारा, 100 वर्षो मे गंगा की दशा बद से बत्तर हो गई परदेशी करना चाहते है पर करने नही दिया जाता,जो कर सकते है वो सोये हैं

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