Tuesday, June 5, 2018

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-22

मेरी गंगा यात्रा भाग -22
मित्रों कैसे है आप और कैसा लग रहा है आपको मेरी गंगा यात्रा का प्रयास यदि आप को अच्छा लग रहा है तो शेयर अवश्य करे और इस क्रांति को जन जन तक पहुचाये, यहाँ उद्देश्य गंगा जी को बचाना होना चाहिये यहाँ उपलब्ध सभी लेख केवल गंगा पर ही है किसी टी.वी चैनल से जुड़े मित्र ने मुझसे निवेदन किया था कि मैं कुछ पुनः गंगा पर लेख बनाऊ तो ये यात्रा आरंभ हो गई इस यात्रा के मध्य से मैं अपने धर छोड़ने से आज तक कि यात्रा का उल्लेख करूँगा पर विषय गंगा की आत्म कथा होना बन गया  समय समय पर मैंने गंगा के बदलते रूप को देखा, जिसे आप तक पहुँचा रहा हूं पिछले कई वर्षों मे लाखो लोगों से गङ्गा बचाओ अभियान के तहत वार्ता की गई सरकारी गैर सरकारी लोगों से आंकड़ों को इक्कठा किया गया सन्त हो या समाज सेवी सभी से बात की कुछ सच्चे लगे कुछ नॉटकी बाज मिले दुनिया है मित्रो यहाँ तरह तरह के रंग है गंगा जी के नाम पर खुली दुकाने भी देखी, चंदे का धन्धा भी देखा, सभी की चर्चा होगी
प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को पत्र वयवहार द्वारा गंगा प्रदूषण की जानकारी दी गई , कुछ के केवल संतुष्ट करने वाले जवाब भी मिले पर सार्थक कुछ नही हुआ पत्रकारिता से सन्त की यात्रा मे इसी बात का दुःख रहा कि गंगा प्रदूषण पर सन्तुष्टि नही मिली
मित्रों अगर पीछे चले तो हमें ज्ञात होगा कि हमारी नदी के विनाश का नया अध्याय 1980 के दशक में नई उदार आर्थिक नीतियों के अपनाने के साथ शुरू हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विकास नीति और विदेशी कम्पनियों के लिये बनाई  उदार नीतिया नदियों के विनाश मे सहयोगी बनी , ओपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंद्रा जी की हत्या हो गई आनन फानन मे हुए चुनाव मे कांग्रेस को एक तरफा बहुमत मिला विपक्ष न के बराबर रहा राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने पर वह राजनीति मे अनुभवहीन सत्ता के कच्चे रहे , जिन्हें बड़े ग्रुप उन्हें गोलमोल करने मे सफल रहे मैंने भी उन दिनों राजीव गांधी से मुलाकात की थी उन्होंने भी आनन फानन मे कई परियोजना को स्वरूप दिया वही कहि कहि सच्चाई को छुपाने के लिये ,आंदोलन प्रदर्शन, को देखते हुए सन्तों की समाजसेवियों की नाराजगी को देखते हुए 1986 में गंगा एक्शन प्लान –1 बड़े बड़े उत्सवों के साथ शुरू किया गया था। इसमें विदेशी कंपनियों की मोटी कमाई तो हुई पर हमारी प्यारी गंगा जी का गंगा स्वच्छता अभियान पूरी तरह विफल हो गया और गंगा पुत्र आंदोलनकरियो की माने तो गंगा नदी की दुर्दशा पहले से ज्यादा बदतर हो गई। हां प्रशासन असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने में जरूर कामयाब रहा जो हमेशा ही होता हैं जैसे बच्चों के चाँद मांगने पर परछाई से ही खुश कर दिया जाता है और स्वछता अभियान की आड़ में नदी प्रणाली को एक-एक करके नष्ट कर दिया गया था।और लगा दिये गये बड़े बड़े उद्योगों, इस पृष्ठ भूमि में हमें मित्रों राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की आड़ में जो राजनीति खेली गई उसे भी जानना आवश्यक है
यदि हम मुड़कर अपने हाल के इतिहास को ही देखें तों दुर्भाग्य से हम पायेंगे कि विकास विनाश हो रहा है हम उल्टी  दिशा में,यानि विध्वंस और विनाश की दिशा में जा रहें हैं। इन सब बातों को दृष्टीगत रखते हुए ही हम गंगा के मुद्दों को समझने की कोशिश करनी होगी। गंगा नदी की गंगोत्री से गंगासागर तक की यात्रा लगभग 2615 किलोमीटर की है। गंगा जी की वर्तमान स्थिति को उचित तौर पर समझने के लिये इसे तीन चरणों में विभाजित करके हम कल समझने की कोशिश करेंगे

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