Friday, June 8, 2018

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-40

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-40
एक प्रयास गङ्गा बचे

  2014 में मोदी जी ने गङ्गा जी की सुध लेने की सोची और नमी गङ्गे का नारा लगाया,कमान उमा जी को सौपी क्योंकि उन्हें भूख हड़ताल का काफी एक्सपीरियंस हैं केंद्रीय बजट 2014-15 में 2,037 करोड़ रुपयों की आरंभिक राशि के साथ नमामि गंगे नाम की एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन परियोजना शुरु की गई तब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अब तक इस नदी की सफाई और संरक्षण पर बहुत बड़ी राशि खर्च की गई है लेकिन गंगा नदी की हालत में कोई अंतर नहीं आया। इस परियोजना को शुरु करने का यह आधिकारिक कारण है। इसके अलावा कई सालों से अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को भारी मात्रा में नदी में छोड़े जाने के कारण नदी की खराब हालत को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है। कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से पूछा था कि स्वच्छ गंगा परियोजना कब पूरी होगी? सुप्रीम कोर्ट को जवाब में राष्ट्रीय प्रशासन ने कहा कि इस परियोजना को पूरा होने में 18 सालों का समय लगेगा। इस परियोजना की लंबाई और चैड़ाई को देखते हुए यह कोई असामान्य लक्ष्य नहीं है। जब कि चमत्कारी माता उमा जी ने आनन फानन मे 2018 तक गङ्गा प्रदूषण मुक्त करने का वादा कर दिया जो इस पर मैं पहले ही चर्चा कर चुका हूँ क्या हुआ 2018 आते आते उमा जी से गङ्गा का भार छीन कर नितिन गडकरी जी दे दिया गया, पर एक प्रश्न क्या अब भी अपनी सरकार की अनदेखी पर उमाजी भुख हड़ताल करेंगी..? खैर आगे चलते हैं जैसा कि आप सभी जानते ही हैं यह परियोजना लगभग पूरे देश को कवर करती है इसके साथ करोड़ों लोगों की आस्था भी जुडी हैं क्योंकि यह पूरे उत्तर भारत के साथ उत्तर पश्चिम उत्तराखण्ड और पूर्व उत्तरप्रदेश, बिहार में पश्चिम बंगाल तक फैली है। भारत के पांच राज्य उत्तराखण्ड, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार गंगा नदी के पथ में आते हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल मे गङ्गा सबसे अधिक प्रदूषित है इसके अलावा सहायक नदियों के कारण यह हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और दिल्ली के कुछ हिस्सों को भी छूता है। इसलिए स्वच्छ गंगा परियोजना इन क्षेत्रों को भी अपने अंतर्गत लेती है। कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से पूछा कि स्वच्छ गंगा परियोजना कब पूरी होगी? तब कहा गया था कि उन पांच राज्य सरकारों की सहायता भी इस परियोजना को पूरी करने में जरुरी होगी। क्या यह पहले ही पता था भारत सरकार ने कहा था कि लोगों में नदी की स्वच्छता को लेकर जागरुकता पैदा करना राज्य सरकारों का काम है। मान लिया और आपकी बात बड़ी कर दी साहब उत्तराखंड सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश बिहार मे आपकी सरकार हैं या आप सहयोगी हैं फिर क्या परेशानी है  इस बात की सटीक जानकारी तो नहीं है की यह परियोजना कब पूरी होगी या होगी भी के नही,यहाँ पर यह समझा जा सकता है कि सहायक नदियों की सफाई भी इसकी एक प्रमुख गतिविधि होगी। अधिकारियों को उन शहरों का भी प्रबंधन करना होगा जहां से यह नदी गुजरती है और औद्योगिक इकाईयां अपना अपशिष्ट और कचरा इसमें डालती हैं। इस परियोजना का एक प्रमुख भाग पर्यटन का विकास करना है जिससे इस परियोजना हेतु धन जुटाया जा सके। अधिकारियों को इलाहाबाद से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक एक चैनल भी विकसित करना होगा ताकि जल पर्यटन को बढ़ावा मिले। नमामि गंगे परियोजना का सबसे बड़ा मुद्दा नदी की लंबाई है।  इससे अलावा नदी का भारी प्रदूषण स्तर और औद्योगिक इकाईयों का अपशिष्ट और कचरा और आम जनता के द्वारा डाला गया कचरा भी एक मुद्दा है। स्वच्छ गंगा परियोजना से कई विवाद भी जुड़े हैं
पिछले सौ वर्षों मे गंगा पुत्र और गंगाजी स्वयं इस ताक मे हैं कि राजा लोग (मंत्री) गङ्गा की दशा सुधारने की ओर दिशा दिखायेगे परन्तु सब झूठे साबित रहे! धर्म के नाम और गंगा की कसमें बहुतों ने खाई पर क्या करें सबका हाजमा या तो अच्छा था या खराब, क्योकि जिनका अच्छा था वह कसम को भी हजम कर गये और जिनका हाजमा कमजोर था वह पखाना कर आये, और गङ्गे रही तो बस बेबस,कुछ प्रयास हुए जिनका परिणाम कागजो में ही नजर आया कुछ सरकारों ने बजट भी बनाये पर पैसा कहा लगा पहेली बन कर रह गई राजीव गांधी जी की गंगा के प्रति लगाव दिखा पर उनकी मौत के बाद सब कागजो में ही रहा

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