Tuesday, June 5, 2018

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-24

मेरी गंगा यात्रा-24
यू तो मित्रो जितनी लम्बाई गंगा जी की है उससे अधिक गङ्गा जी की दर्द की दास्ता है विशेष 20 वर्ष वो जो गंगा को देखते देखते गुज़रे है वो भी कम है कम तो जीवन भी है दर्द को समझने के लिये, पर प्रयास तो हो सकता है वही करूँगा तब तक जारी रहेगा या गंगा प्रदूषण मुक्त हो या प्राण मुक्त हो, लिखते ही आंखों मे अश्रु आ गये खैर बात करते है यू तो गङ्गा जी के लिये प्रयास आजादी से पूर्व भी हुए समस्याये भले अलग थी पर मुक्ति दायनी मुक्त नही हुई अपितु बांधो ने बेड़ियाँ डाल दी पहले चरण मे कुछ कुछ ही चर्चा की थी कुछ आगे के लेख में देखैगै जैसे हमने बताया था हमारी नदीयो के विनाश का नया अध्याय 1980 मे आरम्भ हुआ मेरी गंगा यात्रा के दूसरे चरण में बिजनौर से आगे वाराणसी तक का सफर करेंगे  ये वह स्थान हैं जहाँ से गंगा प्रदूषित हो,नालो का रूप बनना आरम्भ हो जाती हैं मित्रो आरम्भ मे गंगा जी पर अत्यधिक दबाव है।यही से आरम्भ होता है एक तो बिराज बनाकर गंगा जल को रोका जाता है दूसरे जल आपूर्ति को नाले नदियों मे उतारे जाते है साथ ही घरेलू सीवेज,औद्योगिक और कृषि प्रदूषण से गंगा त्रस्त होती है इसी चरण में प्रसिद्ध तीर्थ गढ़मुक्तेश्वर, कानपुर,प्रयागराज और काशी भी आते हैं। यह वो क्षेत्र हैं जहां गंगा मैली कुचैली बहती है यहां से प्रयागराज मे दिल्ली, फरीदाबाद, मथुरा, आगरा से परेशान मैली कुचैली यमुना जी भी गङ्गा मे विलय हो जाती हैं तो सोचो वाराणसी मे जल का रूप क्या मिला होगा यही संगम पर दुनिया का सबसे बड़ा मेला कुम्भ भी आयोजित होता है जिसमें 8 करोड़ लोग स्नान करते हैं सोचो गंगा की दिशा दशा क्या होगी
यात्रा का तीसरा चरण है  वाराणसी से गंगासागर तक हैगंगा के किनारे बारम्बार बाढ़ की विभीषिका और विनाश झेलता है। प्रकृति और वनों के विनाश ने बाढ़ की बारंबारता और विभीषिका को बढ़ाया है। इतिहास में नदियों की धाराओं ने अनगिनत बार अपनी दिशाओं और मार्ग को बदला है परन्तु हाल के दिनों में हम सब  द्वारा नदी और प्रकृति और पर्यावरण के साथ बेलगाम छेड़-छाड़ और हस्तक्षेप से गंगा नदी के अस्तित्व पर ही संकट आ गया है। यही दशा रही तो गंगोत्री से निकली गंगा 2035 तक भारत के नक्शे से मिट जायेगी हमें इस पूरी प्रक्रिया को गहराई से समझने की जरूरत है, जो इस आसन्न त्रासदी के कारण है। अन्यथा भगीरथ की 5500 वर्ष की तपस्या जो गंगा लाने मे लगी व्यर्थ जायेगी

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