मेरी गंगा यात्रा भाग-20
मित्रों आज की यात्रा आरम्भ करू उससे पूर्व आप सभी को गंगा अवतरण दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये आज के जैसी तपती जैयष्ठ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को माँ गंगा ने धरा पर जलधारा के रुप मे चरण रखें और भगीरथ के मृत पितरों को मोक्ष प्रदान कर तार दिया आज भी निसंकोच गंगा अपने भगतों को तार रही है चाहे उसके भक्त अब उसकी ही हत्या करने पर उतारू है पर मॉ तो माँ है माँ का क्या है , वो कहा कुछ कहती हैं सब चुपचाप सहती है ये भी सही होगा अगर भगीरथ जानते की भविष्य मे गंगा को मैली करने का षड्यंत्र होगा तो वह गंगा को स्वर्ग पुनः लोट जाने के लिये कहते पर उनके मन मे जन कल्याण की भावना थी कौन दोषी हैं गंगा के जलधारा रूप के मैली होने का.? ब्रह्म लोक निवासिनी ,विष्णु पद्गामनी, शिव शीश निवासिनी गङ्गे धरती पर आपका क्या हाल हो गया,पाप के भी पाप धोने वाली गंगा दुग्ध धारा सी दिखने वाली आज काली हो गई,आज भी आपका सत्त्व कम नही हुआ आज भी आप पाप नाशनि है क्या ऐसा हो कि आपकी जलधारा पुनः अपने रूप को पाये धरना,प्रदर्शन,अनशन, सभा,यहाँ तक कि प्राण आहुति भी हो गई, पर कुछ सार्थक नही हुआ
गंगा की निर्मलता, स्वच्छता और अविरलता के लिए पिछले 30 वर्षों से हरिद्वार,कानपुर, वाराणसी, पटना, कलकत्ता की धरती पर अनशन और धरने होते रहे है लेकिन गंगा की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ।उल्टा और सत की गत हो गई आज़ादी से पूर्व वर्ष 1914 से लेकर 1916 तक हुए विश्व के पहले सफल बांध विरोधी आंदोलन के बाद गंगा के लिए कोई भी आंदोलन सफल नहीं रहा। क्योंकि उसके बाद के अधिक आंदोलन राजनीति से प्रेरित रहे कोरे ढोल.? केवल बजे फिर सन्नाटा , यू तो दान चंदे का धन्धा बा दस्तूर आज भी जारी हैं मित्रों गंगा न तो खरबों रुपये के एक्शन प्लान से स्वच्छ हुई और न ही आंदोलनों से,क्या राष्ट्रीय नदी घोषित करने से ही गंगा प्रदूषण मुक्त हो सकती है.? नही गंगा के नाम पर रोटियों सेकने का प्रबंध मात्र होगा जो आज तक होता आया है कहते हैं अब तक गंगा पर सन 1986 से करोड़ो अरबो रुपया खर्च हुआ है जिसकी जानकारी कल लिखेने का प्रयास होगा पर कहा हुआ खर्च नजर तो कुछ भी नही आता बल्कि गंगा गन्दा नाला हो गई, कुछ आंदोलन से इतना जरूर हुआ कि गंगा पर बन रही परियोजनाएं कभी रोक दी गईं तो कभी शुरू कर दी गईं। यानि तमाशा ए सल्तनत रहा,
गंगा रक्षा के लिए गंगा एकात्मकता यात्रा निकाल कर वर्ष 1983 में पहला आंदोलन शुरू किया गया था। पर जिसे सही दिशा नही मिली वर्ष 1916 के बाद पहली बार गंगा नदी के प्रति जागरूकता अभियान चलाया गया। लोगो को लगा कि गंगा मिट रही है पर समय समय पर गुट बाजी , और रणनीतिक करने आंदोलनो का मतलब बदल दिया इसके पश्चात कुक कुछ वर्ष मे गंगा की पवित्रता, निर्मलता, स्वच्छता, अविरलता के लिए आंदोलन होते रहे। जिन मुद्दों पर प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन भी किये, वही शंकराचार्य स्वरूपानंद जी के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वर्ष 2006 में एक माह तक अनशन पर रहे अस्पताल भी रहे जबरन अनशन तोड़ने के प्रयास हुये 2009 मे मोन अनशन गंगोत्री मे स्वामी जी द्वारा 2010 के महाकुंभ हरिद्वार में स्वामी हरिहर,स्वामी दीपांकर, स्वामी ब्रह्मानन्द जी के आशीर्वाद से बड़ा आंदोलन किया गया यही मुद्दे विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की कई धर्मसंसदों में उठाए गए हैं। वर्ष 1992 के अर्द्धकुंभ, 1998 के कुंभ, 2004 के अर्द्धकुंभ और 2010 के हरिद्वार कुंभ 2013 इलाहाबाद कुम्भ के दौरान हजारों संतों ने सम्मेलन कर गंगा रक्षा के सवाल उठाए थे। स्वामी हरीहर की प्रत्यक्ष भेट स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से गंगा बचाओ मुद्दे पर यही हुई कड़े निर्णय लेने वाले अविमुक्तेश्वरानंद इलाहाबाद मे गंगा मैं गिरने वाले नालो को लेकर प्रशासन से सीधे जा भिड़ते वहाँ हमने नालो को गंगा मे जाने से रोकने के लिये नालो मे उतरना भी गवारा किया, स्वामी चिन्मयानंद से लेकर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ सहित अनेक संतों ने गंगा रक्षा के लिए गंगा सागर तक की यात्राएं की हैं। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भी यात्राएं निकाली। बाबा रामदेव ने पहले अकेले बाद में प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के साथ मिलकर आंदोलन किया तो गंगा रक्षा के लिए अनेक आंदोलन चलाए गए। अब सो गये ,कई बार संतों ने हरिद्वार से दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यालयों में पीड़ा व्यक्त की। हरिद्वार के संतों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर गंगा के लिए आवाज उठाई। अनेक संत भी विभिन्न बैनरों तले दिल्ली में गंगा की आवाज बुलंद कर चुके हैं। लेकिन इन सब का कोई असर कहीं दिखाई नहीं दिया
Tuesday, June 5, 2018
मेरी गङ्गा यात्रा भाग-20
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