मेरी गंगा यात्रा भाग-90
इक प्रयास गंगा बचे
नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से उत्तर बिहार की नदियों में उफान जारी है। बागमती, कमला बलान, अधवारा समूह और महानंदा नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है, जबकि लगातार तीन दिनों तक लाल निशान के ऊपर बहने के बाद ललबकिया और भूतही बलान नीचे उतर आई है। हालांकि इन सारी नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि जारी है। उधर, नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद उत्तर बिहार के की इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। गंगा समेत सभी प्रमुख नदियों कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, अधवारा समूह, महानंदा, घाघरा, खिरोई नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा हैनदी बिहार की सहायक नदियों के कारण उफान पर है। उत्तर प्रदेश में इसका जलस्तर घट रहा है तो कई जगहों पर स्थिर बना हुआ था कहीं इसमें बढ़ोतरी नहीं हो रही था जबकि पूर्वी बिहार के हिस्से में इसका जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था बक्सर और पश्चिमी पटना के इलाके में इसका जलस्तर स्थिर बना रहा। पर, पूर्वी पटना में हाथीदह के बाद इसका जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में गंगा तेजी से ऊपर जा रही था। उत्तर बिहार की कई नदियों के पानी के इसमें मिलने के बाद इसका जलस्तर ऊपर जा रहा था।
Sunday, September 16, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-90
मेरी गंगा यात्रा भाग-89
मेरी गंगा यात्रा भाग-89
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों गंगा की बाढ़ ने हिमालय के उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक हाहाकार मचा दिया दूसरे शब्दो में कहे कि गंगा के किनारे बसे गाँव,कस्बो शहर पानी ही पानी नजर आ है खेत,खलिहान, गाँव सभी पानी ही पानी हो गये केवल हम इंसानो को छोड़कर..?हम लोग अभी तक नही समझ रहे कि यह सब ग्लोबिम्म वार्मिंग का नतीजा हैं यही हाल रहा तो 2035 तक धरती के तापमान में 2 से 4 प्रतिशत व्रद्धि की आशंका है जिससे हिमालय के साथ साथ ध्रुवीय हिमखंडों के तेजी से पिघलने की आशंका है यू तो वर्षा के रुकने से वाराणसी में गंगा के जलस्तर में पिछले 72 घंटे के भीतर प्रति घंटे दो सेंटीमीटर की कमी आई थी लेकिन गंगा अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। तटवर्ती इलाकों मे बाढ़ के हालात जस के तस हैं। घरों और मोहल्लों मे पानी घुस जाने के चलते अलल-अलग इलाकों मे लाखों लोग बेहाल हैं।इस बीच बिहार के हाजीपुर में आई बाढ़ ने सैकड़ों केला किसानों को भी तबाह कर दिया है। करोड़ों रुपये के केले की फसल पानी में डूब गई है जिसके चलते खेती बर्बाद हो गई है। इस तरह केले के किसानों की जमा पूंजी बाढ़ के पानी में बह गई है। यूपी और बिहार के बाद पश्चिम बंगाल के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। फूलोहर और गंगा नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान के ऊपर है। मालदा जिले में करीब 25 हजार परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। जिले के करीब 25 गांव बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ में फंसे इन लोगों को निकालने के लिए राहत बचाव का काम जारी है।जिले के कई प्राइमरी और हाई स्कूलों में राहत शिविर बनाए गए हैं। राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए खाने पीने की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि बाढ़ प्रभावित कई गांवों के लोगों को आरोप है कि प्रशासन के तरफ से अब तक उनसे कोई मिलने नहीं आया जबकि बाढ़ का पानी लगातार बढ़ते जा रहा है। में पानी खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। नरौरा बांध से गंगा में करीब 117638 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 136.40 मीटर पर पहुंच गया है। दोनों ही नदियों में पानी आने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। ऐसे में गंगा का पानी अब गांवों में पहुंचने लगा, जिससे लोग बेहाल है।
मेरी गंगा यात्रा भाग-87
मेरी गंगा यात्रा भाग -87
इक प्रयास गंगा बचे
एक बार फिर से केंद्र सरकार द्वारा गंगा के नाम पर 150 करोड़ रुपये आवंटन की खबर आ रही हैं गंगा की के लिये अच्छी खबर हो सकती हैं पर तब जब गंगा जी का पैसा गंगा पर ईमानदारी से खर्च भी हो मेरी यह समझ नही आया जब पहले से प्राप्त आवंटन का ही मात्र 22 प्रतिशत खर्च हुआ है तो ओर क्यो..? वहीं मजे की बात आपको बताते हैं मध्यप्रदेश मे बना 800 करोड़ से बना पुल बाढ़ मे बह गया कैसे..? वह कोई नया पुल नही था..? मात्र तीन माह पूर्व ही बनकर तैयार हुआ, कैसा मजबूत निर्माण था ..? साहब सरकार कोई भी आये, है तो सभी और सभी पैसा खर्च कर जीते हैं राजनीति भी तो व्यपार हैं देश का नुकसान हो नाश हो अपना क्यो हो भइ सारी जिंदगी थोड़े लूटने का मौका है पांच साल की बात है, जितना लूट सको लूटो,800 करोड़ गये पानी में..? मोदी भी अकेले क्या कर सकता हैं सब जगह थोड़े रह सकता इक अकेला ईमानदार क्या कर सकता यह सब तो टीम वर्क हैं खैर बात गंगा जी की जो आदमी को उनकी औकात दिखा रही हैं कई वर्षों से इंसान गंगा जी मिटाना चाहते थे अब गंगा जी अपनी प्रदूषण की सफाई में लगी हैं और प्रकृति तो बाढ़ के रूप मे ही नदियों की सफाई करती हैं उसके पास मैन पावर तो है नही उसका यही तरीका हैं गंगा आजकल अपने अवैध कब्जों को खाली करने पर व्यस्त है पूर्वांचल की बात करें तो पूर्वांचल में गंगा की बाढ़ ने तबाही मचा रखी हैं गाजीपुर और बलिया में डेंजर लेवल पार वाराणसी हैं अगले 24 घंटे गंगा के तटवर्तियों के लिये बहुत ही खतरनाक साबित होने वाले हैं। अगर उत्तराखंड के पहाड़ों मे बरसात होती हैं तो जिस रफ्तार से गंगा में जलस्तर बढ़ रहा है इलाहाबाद से लेकर वाराणसी तक गंगा खतरे के निशान को पार कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो इलाहाबाद, वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर और बलिया में तट से लगे हजारों एकड़ खेत और रिहाइशी इलाके बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। बलिया में गंगा खतरे के निशान से तकरीबन दो मीटर हैं और गाजीपुर में आधे मीटर से भी उपर बह रही है। वाराणसी, इलाहाबाद और मिर्जापुर में गंगा चेतावनी बिन्दु पार कर चुकी है। यदि जलस्तर के बढ़ाव की रफ्तार यही रही तो 24 घंटे में इन जगहों पर भी गंगा खतरे के निशान को पार कर जाएगी। केन्द्रीय जल आयोग की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार सुबह आठ बजे तक बलिया में गंगा 59.75 मीटर, गाजीपुर में 6.35 मीटर, वाराणसी में 71.4 मीटर, मिर्जापुर में 77.1 मीटर, इलाहाबाद में 83.75 मीटर व फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.85 मीटर तक जा सकता है।
मेरी गंगा यात्रा भाग-86
मेरी गंगा यात्रा भाग-86
इक प्रयास गंगा बचे
यू तो बाढ़ और पानी भरना कोई नही बात नही है हर वर्ष गंगा आदि नदियों मे बाढ़ आती ही हैं किंतु इस वर्ष नदियों कुछ ज्यादा ही क्रोध पर नजर आती हैं सावन के बाद भादो भी आ गया पर गंगा और सभी नदियों आज भी उफ़ान पर हैं इस बार इस बार वर्षों का रिकॉर्ड ही टूटता नजर आ रहा है उतर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश के बाणसागर डैम से पानी छोड़े जाने के बाद बिहार में सोन और गंगा नदी उफान पर है. रोहतास में इसके कारण सोन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इंद्रपुरी स्थित सोन बराज पर पानी का दबाव काफी बढ़ गया है. या यूं कहै कि डैम पर भी खतरा आ रहा हैं रोहतास, अरवल, पटना और आस-पास के जिलों में अलर्ट घोषित किया गया है.सोन नदी के तटीय इलाकों में जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित किया है. इंद्रपुरी के बराज से बीती रात 2 लाख, 55 हज़ार क्यूसेक अतिरिक्त पानी सोन नदी में छोड़ दिया गया है. इसके अलावा पूर्वी तथा पश्चिमी नहरों में भी लगातार पानी छोड़ा जा रहा है ताकि बराज पर पानी का दबाव कम हो और.बाणसागर डैम से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण सोन बराज के जल ग्रहण क्षेत्र में पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है. 3 लाख 55 हजार क्यूसेक पानी अभी भी बराज में स्टोर है. डेहरी के सिविल एसडीओ कुमार गौतम ने बताया कि बाणसागर से सोन नदी में पहुंच रहे अतिरिक्त पानी को देखते हुए सोन तटीय इलाकों को हाई अलर्ट किया गया है तथा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बिहार की राजधानी पटना समेत कई जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा उन शहरों पर है जो सोन और गंगा नदी के के किनारे बसे हैं. दरअसल मध्यप्रदेश बाणसागर डैम में जलस्तर बढ़ने पर 5.5 लाख से 7 लाख क्यूसेक तक पानी छोड़ रहा है. इस डैम से पानी छोड़ने की शुरुआत शुक्रवार की रात से ही हो गई.एक साथ भारी मात्रा में पानी आने से बिहार में भारी तबाही हो सकती है. बाढ़ से पहले ही हालात की इस गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों से बात की है. जानकारी के मुताबिक उनके अनुरोध पर मध्यप्रदेश शासन ने एक बार की बजाय कई चरणों में में पानी छोड़ने का भरोसा दिया है.बिहार में गंगा का जलस्तर पटना, भोजपुर और भागलपुर में खतरे के निशान से ऊपर है. बिहार में ही सोन का पानी आखिर में गंगा में आकर मिलता है जिससे बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है.बाणसागर में जलस्तर प्रति घंटे 7 सेमी बढ़ रहा है. पटना में ही गंगा नदी के उफान पर होने के कारण तटीय इलाके पर बसे लोग बाढ़ से खतरा महसूस कर रहे हैं. पटना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी नदियों का पानी प्रवेश करने लगा है.
मेरी गंगा यात्रा भाग-85
मेरी गंगा यात्रा भाग-85
इक प्रयास गंगा बचे
सावन का महीना पवन करें शोर भादो ने कर दीं वर्षा ताबड़ तोड़,उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का कहर अब मैदानी इलाकों में साफ साफ दिखना शुरू हो गया। गंगा व उसकी सहायक नदिया उफान पर हैं और गंगा जी की सहायक नदियां अब उत्तर प्रदेश के रिहायशी इलाकों में पैर पसार चुकी हैं, गंगा जी वैसे ही अपने रौद्र रूप का तांडव कर रही हैं अब आलम यह हैं कि जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के मकानों में पानी घुस गया है और यहाँ के लोग पलायन को मजबूर हैं।अस्सी घाट पर नियमित गंगा आरती कराने वाले पुरोहित ने बताया की गंगा का पानी बहुत तेजी से बढ़ने के कारण सब सामान हटा कर सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे है। गंगा का जलस्तर तो नहीं रोका जा सकता है इसलिए सब हटा रहे है। अभी तक परेशानी नहीं थी लेकिन अब धीरे धीरे परेशानी बढ़ रही है। शाम तक सड़को पर गंगा का पानी आने की उम्मीद थी जो पूरी हो गई जिसके कारण स्थानीय लोगो को ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।जिला प्रशासन ने गंगा का रौद्र रूप देखते हुए पहले ही तटवर्ती इलाकों में चेतावनी जारी कर दी थी फिलहाल गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे यह अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि यदि तटवर्ती इलाकों के निवासियों ने जल्दी सुरक्षित स्थान की तलाश नहीं की तो मुसीबत में घिर सकते हैं। वाराणसी में गंगा का जल स्तर पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ रहा है वाराणसी में अभी गंगा दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से बढ़ रही है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार आज सुबह 8 बजे तक गंगा का जलस्तर 69.01 सेंटीमीटर पर था। ऐसी स्थिति मे गंगा जी मे गिरने वाले सभी नाले बैक मार सकते है ऐसे में गंगा मे मिलने वाला नालो का पानी वापस शहर मे पहुंच जायेगा, वाराणसी के वरुणा नदी के किनारे बसे घनी आबादी वाले कोनिया से लगायत कई मोहल्लों में वरुणा का पानी घुस गया है। बाढ़ के पानी से दहशत में जी रहे क्षेत्रीय निवासी अब धीरे धीरे पलायन को मजबूर हो रहे हैं। कोनिया में इस समय बाढ़ से लगभग 100 घर प्रभावित हुए हैं। गंगा में बाढ़ का विकराल रूप देखकर जिला प्रशासन पहले ही तटवर्ती इलाकों को अलर्ट मोड़ पर कर चुका है। बाढ़ का पानी घुसने की वजह से अपने घरों से पलायन कर रहे हैं। शहर के कोनिया मोहल्ले में वरुणा नदी अपना पांव पसार चुकी हैं गंगा में उफान के कारण उनकी सहायक नदियों ने रौद्र रूप अपना लिया है। इसमें काशी में बहने वाली वरुणा नदी भी शामिल है। वरुणा नदी में आयी विकराल बाढ़ की वजह से कोनिया से लगायत आस पास के दर्जनों मोहल्लों में लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया हैं इस बाढ़ के पानी की वजह से लोग अपने घरों से पलायन को मजबूर हो रहे हैं। लगभग 200 मकानों को लोग खाली करके सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायित हो रहे है इतनी बाढ़ है कि घरों में जाने के लिए बिना नाव के कोई हिम्मत नहीं कर रहा है।
मेरी गंगा यात्रा भाग-84
मेरी गंगा यात्रा भाग-84
इक प्रयास गंगा बचे
"मित्रों कल तक सहते थे अपनो की रुसवाइयों,अब गैरो की बारी है"आप सभी के से स्नहे और प्रेम करने वालो के लिये यह जानकारी क्या है आओ पर ही छोड़ता हूं एक बार फिर से गंगा जी की जलधारा को विश्व की सबसे से प्रदूषित नदी का ताज पहनाया गया हमारे लिये ये शर्म की बात है आप अपनी स्वयं सोचे आजकल में आई आईएएनएस न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार भारत की सबसे प्राचीन और लंबी नदी गंगाजी जो उत्तराखंड के हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है. गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है. उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचने वाली गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती हैं गंगा की भलाई के लिए चाहे मोदीजी की केंद्र सरकार ने नमामि गंगा जैसी परियोजना के जरिए भारी-भरकम धनराशि खर्च करने के बात कही हो, बावजूद इसके देश की सबसे इस पवित्र नदी की सेहत नहीं सुधर रही है.दिन प्रतिदिन और हालात बिगड़ रहे है गंगा प्रदूषण के आंकड़ों का ग्राफ गरीब देश की महंगाई की तरह आकाश को छू रहे है अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस एनजीओ वर्ल्ड वाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ)wwf ने इसे दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी करार दिया है.वह भी तब जब आज गंगा प्रदूषण पर जाग्रति बढ़ रही हैं भारत के 90% लोग गंगा जी को प्रदूषण मुक्त देखना चाहते है हजारों सरकारी तथा गैर सरकारी संगठन गंगा जी पर प्रयास कर रहे है तब ऐसे में यह रिपोर्ट शर्म की बात है..? इसके पीछे तर्क देते हुए संगठन ने कहा है कि गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदी इसलिए है, क्योंकि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में भी लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है. यहां संगठन ने प्रदूषण की बात को नजरअंदाज नही किया, यह बात अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कही हैं अतः विश्व के समान भारत के प्रयासों की साख गिरेगी, अंतरास्ट्रीय संगठन का गंगा को लेकर जारी यह बयान सरकार के लिए झटका माना जा रहा.मोदी जी और भाजपा सरकार को इसे गम्भीर ता से लेना होगा गंगा मोदीजी चुनावी मुद्दओ मे से एक था और अगले चुनाव मे भी विशेष रहने वाला है गंगा जी हिंदुत्व की ही नही राष्ट्र की भी धरोहर हैं
मेरी गंगा यात्रा भाग-83
मेरी गंगा यात्रा भाग -83
इक प्रयास गंगा बचे
इलाहाबाद प्रयागराज की संगमनगरी में अब बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। गंगा और यमुना का जलस्तर शनिवार से और तेजी से बढ़ारहा हैं गंगा यमुना दोनों ही नदियां खतरे के निशान की तरफ बढ़ रही हैं। नजदीकी कई तटवर्ती इलाकों में पानी करीब करीब पहुंच ही गया है। इससे क्षेत्र के संबंधित इलाके में खलबली मची है।जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश दे दिए हैं।
प्रशासन द्वारा शुक्रवार से शनिवार शाम तक यमुना के जलस्तर में 19 सेमी तथा गंगा के जलस्तर में आठ सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी जैसा आप जानते ही कि इलाहाबाद में खतरे का निशान 84 मीटर है। सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) के अधिशासीअभियंता मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। मध्य प्रदेश में बारिश से केन और बेतवा नदियों का पानी यमुना में पहुंच रहा है। बुंदेलखंड में बरसात का पानी चंबल समेत अन्य छोटी नदियों से यमुना में आ रहा है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश के बाद टिहरी और नरौरा बांध से रोज भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। टोंस और बेलन नदियों में भी पानी बढ़ रहा है। यमुना किनारे बसे मड़ौका, महेवा, पालपुर, बसवार तथा गंगा किनारे छतनाग, बजहा, मवैया, लवायन, मनैया, रवनिका, कबरा, डीहा, रामपुर सेमरहा, दुमदुमा,नरौरा बाध से 1.86 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद लगातार बढ़ता गंगा का जलस्तर रविवार सुबह आठ बजे खतरे के निशान पर पहुंच गया। वहीं कटरी क्षेत्र के गावों में बाढ़ से हालात भयावह हो गए हैं, जाजमऊ में बाढ़ के पानी में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। बिठूर के ख्योरा कटरी गाव में पानी भरने से परिवारों ने सड़क किनारे तंबू लगाए हैं।इन दिनों गंगा का बहाव उफान पर है और तटवर्ती गांवों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। रविवार सुबह गंगा का पानी खतरे के निशान पर था।लकटहा आदि गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई मोहल्लों में लोग चिंतितशहर के राजापुर, गंगानगर, बेली कछार, शंकरघाट, चिल्ला, सलोरी, सादियाबाद, दारागंज, नागवासुकि, ककरहा घाट, करैलाबाग आदि इलाकों में गंगा और यमुना का पानी बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोग अपने घरों का सामान समेटने में जुट गए हैं।
मेरी गंगा यात्रा भाग-82
मेरी गंगा यात्रा भाग-82
इक प्रयास गंगा बचे
इस बार गंगा जी व गंगा जी की सहायक नदियां अपने पूरे उफान पर है सभी अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं जिन बरसाती नालो मे बरसात मे भी कभी कभी पानी नजर आता था वह भी आजकल उफ़ान ही नही तूफ़ान हो रही हैं या यूं कहे सभी रौद्र रूप मे बह रही हैं वही रामगंगा और गंगा की बाढ़ से तहसील क्षेत्र के करीब 60 गांव घिर गए हैं।शुक्रवार 31अगस्त 2018 को बाढ़ की स्थिति के चलते इसके किनारों पर बसे हजारों ग्रामीणों के सामने खाने-पीने के साथ ही अन्य समस्याएं खड़ी हो गई हैं। कई गांवों में सड़कें कटने से आवागमन में भी दिक्कतें होने लगी हैं। फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर करीब दो फीट पानी बह रहा है। इससे बाइकें निकलने में दिक्कत हो रही थी शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 137.05 और रामगंगा का 137.40 मीटर पर पहुंच गया। गंगा में 1.86 लाख और रामगंगा में 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा व रामगंगा में खतरे का निशान 137.10 मीटर पर है। गंगा की बाढ़ से बर्राखेड़ा, महमदगंज, हुसैनापुर, हुसैनपुर, तेरा अकबरपुर और खुटिया समेत करीब 40 गांव और रामगंगा की बाढ़ से करीब 20 गांव घिरे हैं। गांवों के चारो ओर पानी भरे होने से लोग परेशान हैं। यह ऊंचे स्थानों पर चूल्हा रखकर भोजन बना रहे हैं। चारे और भूसे की समस्या खड़ी हो गई है। कलक्टरगंज, जोगराजपुर, करनपुरघाट, अमैयापुर, हीरानगर, भावन, रूलापुर, चपरा, गुड़ेरा, गुलरिया, गहलार और खाकिन मार्गों पर पानी कमर से ऊपर बह रहा है। पानी से होकर ही ग्रामीण और स्कूली बच्चे आवागमन कर रहे हैं। अर्जुनपुर-कड़हर मार्ग कटने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। सारे वर्ष हमने गंगा को परेशान किया प्रदूषित करते रहे अब गंगा की बारी हैं तो क्यों परेशान होतो हो अभी भी समय हैं जागो नदियों को प्रदूषित होने से बचायें
मेरी गंगा यात्रा भाग-81
मेरी गंगा यात्रा भाग-81
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रो आज हम गंगा बचाओ के 81 वे पायेदान पर आ गये हैं और हमने गंगा जी को लेकर हर प्रकार की चर्चा की लोगों के विचार व सरकार की कार गुजरिया भी देखी आज की जर्मनी की खबर के साथ गंगा जी की बात को आगे बढायेंगे कल की ख़बर हैं कि जर्मनी गंगा नदी की सफाई के प्रयासों के तहत भारत को 12 करोड़ यूरो का सस्ता लोन दे रहा है. क्या आप कहै इसकी आवश्यकता है..? यह तब है जब पहली धन राशि का मात्र 22 प्रतिशत ही खर्च हुआ है फिर इस लोन की क्या आवश्यकता है..? सरकार का मानना है कि लोन की इस राशि से उत्तराखंड में नालों के पानी का शोधन करने का स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. 80 प्रतिशत कम है क्या..? भई पहला हैं..?पहला थाली का खाया नही और रसगुल्ले को रहे हाथ पसारने, खैर जर्मनी के प्रभारी राजदूत जैस्पर विएक ने गुरुवार 30 अगस्त 2018 को इस बारे में जानकारी दी.थी चलो भई ये रसगुल्ला भी ले लो, जर्मनी के दूतावास द्वारा किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए विएक ने कहा कि इस परियोजना में करीब 360 किलोमीटर तक नालों के स्ट्रक्चर को बदलना और इनको एक्पेंड किया जाना शामिल है 13 पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे इस परियोजना के तहत घरों को नाले से जोड़ने और करीब 1.50 करोड़ लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला जलशोधन संयंत्र बनाना भी शामिल है. इसके अलावा 13 पंपिंग स्टेशन बनाना भी इसका हिस्सा है. विएक ने कहा, 'इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी में गंदा पानी गिरने से रोकना और नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार करना है
उन्होंने कहा कि जर्मनी की विकास समर्पित एजेंसी जीआईजेड ने गंगा बुक तैयार किया है जो विद्यालय जाने वाले बच्चों को नदी के बारे में सूचित करने के लिए लक्षित है.आज के मोबाइल के युग मे पढ़ेगा कौन स्कूल की किताबें तो पढ़ी नही जाती,उसपर एक और बोझ जीआईजेड के परियोजना समन्वयक विक्रांत त्यागी ने कहा कि जब डैन्यूब नदी को साफ किया जा रहा था तब डैन्यूब बुक तैयार किया गया था. इसी तर्ज पर गंगा बुक तैयार किया गया है त्यागी जी बी प्रक्टिकल, हर वर्ष लाखों लेख हजारो किताबें गंगा पर छपती हैं पर क्या..?हमारे ही फ़ेसबुक, ट्विटर,ब्लॉग आदि पर लाखों विययवर्स हैं पर पढ़ने वालों की संख्या 100 भी पार नही होती ,गंगा जी चिंता करोड़ों को हैं, पर है दिल मे पर भई इस दिल का क्या अचार डालना है बी प्रैक्टिकल कोई नही यही बड़े शर्म की बात है लगता हैं हम भी भैस के आगे बीन बजा रहे है और हैं कि भैस मोबाइल मे मस्त,..
मेरी गंगा यात्रा भाग-80
मेरी गंगा यात्रा भाग -80
इक प्रयास गंगा बचे
आपके ध्यान के लिये आपको याद दिला दे कि मोदी जी की केंद्र सरकार पर उच्च प्राथमिकता वाली नमामि गंगे परियोजना की सफलता पर अब सवाल उठ रहे हैं। जो जायज़ भी हैं या यु भी कह सकते है चुनाव के आते ही विपक्ष के गंगा जी को लेकर हमले तेज हो गये हैं अब पूर्व केंद्र सरकार के दिगज भी गंगा के प्रति सरकार की योजनाओं और कार्य की विफलता पर उंगली उठा रहे है परियोजना के साढ़े चार साल पूरे होने के बाद इसका कार्य स्वरुप स्पष्ट नहीं है। मूर्खो की टोली शहर बसाये, ये नई कहावत हैं यानि जिस काम की करने वाले अनुभव हीन और बतोलै बाज हो तो वह काम कैसे होगा,अब गंगा नदी के पिछले सफाई अभियानों की असफलता का साया इस पर भी मंडरा रहा है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने गत वर्ष 13 जुलाई 2017 को गंगा की सफाई पर फैसला देते हुए कहा कि सरकार ने गंगा को शुद्ध करने के लिए बीते दो साल में 7,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन गंगा नदी की गुणवत्ता के मामले में रत्तीभर सुधार नहीं दिखा है। 7,000 करोड़ कहा..?नज़र तो नही आते आज टी वी देख रहा था दिल्ली मे अग्रवाल समाज ने बिना सरकार की मदद के 50 करोड़ मे गरीबो के लिये अंतराष्ट्रीय स्तर का रोहिणी के सै.22 मे अस्पताल बनवाया हैं नजर आता हैं पर सरकार के काम क्यों नजर नही आते..? 7,000 करोड़ कम राशि नही होती 14 अंतराष्ट्रीय स्तर के अस्पताल बन सकते है हा बात घपले की हो तो एक का भी पेट नही भरता,एनजीटी ने फैसले में कहा कि यह एक गंभीर पर्यावरण मुद्दा है। ऐसा तब है जब यह योजना केंद्र की कार्यसूची में पहली प्राथमिकता पर है। एनजीटी का यह आदेश इसलिए अभूतपूर्व है क्योंकि एनजीटी ने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि इतना खर्च और ध्यान देने के बावजूद नदी अब और अधिक प्रदूषित हो गई है। फैसले में एनजीटी ने कहा, “आगे अब और इंतजार करने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।” एनजीटी ने कहा, मार्च, 2017 तक 7304.64 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद केंद्र, राज्य सरकारें और उत्तर प्रदेश राज्य के स्थानीय प्राधिकरण, गंगा नदी की गुणवत्ता के मामले में सुधार कर पाने में असफल रहे।हमें लगता जो शर्म की बात है वहीँ एनजीटी ने नदी के 100 मीटर के भीतर सभी निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने सहित नदी से 500 मीटर की दूरी के भीतर कचरा डालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया और आदेश दिया कि ऐसा करने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए। पर यह समस्याओं का ठोस हल नही हैं जब तक कस्बो शहरों को सिवरेज सिस्टम से नही जोड़ा जाता, था