Sunday, September 16, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-76

मेरी गंगा यात्रा भाग-76
ई था कि 2018 तक लोग स्वच्छ-शांत गंगा की अविरल धारा देख सकेंगे। पर सब बातें ही रही, उलटे दीदी जी ही उलटे बांस बरेली हो गईं यानि उनसे गंगा छीन ली गई लगभग दो साल बाद अब उनके उत्तराधिकारी नितिन गडकरी का दावा है कि गंगा मार्च, 2019 तक 70 से 80 प्रतिशत तक साफ हो जाएगी। पर मेरी मानो तो केवल कागज़ो मे, सच्चाई कुछ और ही रही हैं गंगा प्रदूषण के लिये आवंटित पैसे में से मात्र 6,7 प्रतिशत ही खर्च हुआ है तो इनका दावा गलत हैं कि 80 प्रतिशत गंगा साफ होगी, देखै तो  तब उमा भारती के दावे को जल संसाधन सचिव यू. पी. सिंह ने प्रमाणित किया था। 2015-17 की अवधि के लिए सीपीसीबी के जल गुणवत्ता निगरानी डेटा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2016 की तुलना में 2017 में पानी की गुणवत्ता (80 स्थानों पर निगरानी) में सुधार हुआ है। डीओ (विघटित ऑक्सीजन) के स्तर में 33 स्थानों पर सुधार हुआ है, 26 स्थानों पर बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) स्तर और कोलिफोर्म बैक्टीरिया 30 स्थानों पर कम हो गए हैं। लेकिन क्या यह सुनिश्चित करता है कि मार्च, 201 9 तक गंगा 70-80 फीसदी स्वच्छ होगी? अब जमीनी स्थिति का जायजा लेने का समय है। कितना सच है यह तभी पता चलेगा एक कुछ समय पहले, दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने गंगा नदी के बहने वाले राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 10 कस्बों और शहरों का दौरा किया और पाया कि कस्बों को अपने फिकल (मलमूत्र) भार का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत, सरकार ने नदी में सीवेज के प्रवाह को रोकने पर काफी हद तक ध्यान केंद्रित किया, लेकिन फिकल कीचड़ के प्रबंधन पर नहीं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत, नदी के किनारे गांवों और कस्बों में अधिक से अधिक शौचालय बनाए जा रहे हैं। 2 अक्टूबर, 2019 तक भारत को खुले में शौच मुक्त करने के लिए, सरकार गंगा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 1.52 मिलियन शौचालय और नदी के किनारे स्थित शहरों में 1.45 मिलियन शौचालय (निजी और सार्वजनिक) बनाने की प्रक्रिया में है। सीएसई का कहना है कि इन शौचालयों में सेप्टिक टैंक और गड्ढे का निर्माण होगा, जिससे 180 एमएलडी फिकल कीचड़ और सेप्टेज उत्पन्न होगा। पर्याप्त उपचार सुविधा नहीं होने की स्थिति में यह गंगा में मिल जाएगा।

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