मेरी गंगा यात्रा भाग-77
इक प्रयास गंगा बचे
युद्ध कोई सा भी हो जीत सेना अध्यक्ष की योजनाओं पर निर्भर होता है यदि योजना सही और सुचारु हो तो हार का प्रशन ही नही, पर सेना नायक कमजोर हो तो ..? इसी तरह किसी योजना की सफलता का दारोमदार परियोजना के निदेशक पर निर्भर करता है। वही गंगा जी को लेकर सोचे तो इस मामले में नमामि गंगे अपवाद है। क्योंकि नमामि परियोजना शुरू हुए साढ़े चार वर्ष हुए हैं और इस दौरान अबतक इसके छह-छह निदेशक बदले गए। व एक मंत्री भी..? दिल्ली मे जल संसाधन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि इसका एक बड़ा कारण यह था कि कोई भी निदेशक इस परियोजना से जुड़े सभी राज्यों को साथ ला पाने में सफल नहीं हो पा रहा था। इसके कारण नमामि के निदेशकों को इस योजना के क्रियान्यवन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कोई भी केंद्र सरकार जब यह देखेगी कि उसके द्वारा नियुक्त निदेशक राज्यों के साथ काम ही नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें बदलना ही पड़ेगा। इसके अलावा आखिरी जो निदेशक बदले गए, उनका मंत्री के साथ सामंजस्य नहीं बैठा। हिमालयन एनवायरमेंट स्टडीज एंड कनजरवेशन ऑर्गनाइजेशन के अनिल प्रकाश जोशी कहते हैं, “निदेशकों से साथ समन्वय में नाकाम रहने का कारण केंद्र सरकार का रवैया जिम्मेदार है। केंद्र ने योजना ही ऐसी बनाई है जिसमें राज्यों की भागीदारी को न्यूनतम कर दिया। ऐसे में राज्य सरकार से सक्रिय सहयोग की उम्मीद कैसे की जा सकती है। नमामि गंगे योजना की सफलता पांच राज्यों के समन्वय पर टिकी हुई है। लेकिन जब से यह योजना शुरू हुई तब से राज्य व केंद्र सरकार के बीच लगातार गतिरोध बना रहा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जब तक गाद का प्रबंधन नहीं होगा यह योजना सफल नहीं होगी (डाउन टू अर्थ, जुलाई 2017)। तीन दशकों से बनारस के पास कैथी गांव में गंगा की सफाई करने वाले 62 साल के नारायाणदास गोस्वामी कहते हैं कि अभी तक नमामि का लक्ष्य 2020 है । लेकिन मुझे नहीं लगता है कि यह तय समय-सीमा पर अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगी क्योंकि पिछले दो साल में जितना भी नमामि गंगे के तहत काम हुआ है वह बहुत उत्साहवर्धक नहीं है। जहां तक नदी में गिरने वाले सीवेज के लिए एसटीपी बनाए जाने की बात है तो इसके लिए अभी तक निविदाएं ही जारी हो रही हैं। कानपुर में सीवेज लाइन बिछा दी गई लेकिन उससे कोई कनेक्शन नहीं ले रहा है। सरकार की योजना अच्छी है लेकिन इसे लागू करवाने का तंत्र नाकाम हो रहा है।और हरिद्वार की बात करें तो वहाँ भी यही बात लागु होती हैं कुल मिलाकर देखें तो नमामि गङ्गे केवल और केवल एक नारा मात्र ही बनकर रह गया हैं और मोदी जी के शासनकाल के पांच वर्ष भी पूरे होने को हैं अगले चार माह मे क्या होगा अब तो किसी चमत्कार की भी आशा नही है
Sunday, September 16, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-77
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