Saturday, September 15, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-71

मेरी गंगा यात्रा भाग-71
इक प्रयास गंगा बचे
भारत का प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद नरेन्द्र मोदीजी ने गंगा नदी में प्रदूषण पर नियंत्रण करने और इसकी सफाई का अभियान चलाया। भाजपा की माने तो मोदी जी ने अपना वादा पूरा करना आरम्भ कर दिया जो उन्होंने ने चुनाव के दौरान जो देशवासियों से किया था इसके बाद उन्होंने आननफानन में जुलाई 2014 में आम बजट में नमामि गंगा नामक एक परियोजना आरम्भ कर दी। इसी परियोजना के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने गंगा के किनारे स्थित 48 औद्योगिक इकाइयों को बन्द करने का आदेश दिया है। कितनी हुई..? विभिन्न उपकरणों की मदद से विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। जून 2015 से इसे आठ शहरों कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन, पटना, साहिबगंज, हरिद्वार व नवद्वीप में पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया गया। पर यह काम घाटों पर किया जा रहा है। इस सौंदर्य करण से कैसे गंगा प्रदूषण मुक्त हिगी..?कहते है इसमें ट्रेश स्कीमर, एरेटर्स, बूम आदि उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। ये मशीनें 50 हजार से लेकर 16 करोड़ रुपये तक की हैं।पर चार वर्षों मे आपने या किसी ने देखी हैं तो हमें भी अवगत कराये कही यह कही विदेशी भूमि पर तो कम नही कर रही..? खैर वादा तेरा वादा, क्या सरकार ने जो बजट घोषित किया है कम है और उसी कमी को पूरा करने के लिये सरकार गंगा के नाम पर चन्दा भी लेगी..? श्रद्धालुओं को उनके परिजनों के नाम से दान देने के लिए कहा जाएगा और शिलापट्ट पर उनके नाम भी लिखे जाएंगे। क्या बिजनेस वाला दिमाग लगाया हैं इसके साथ सरकार को चाहिये सभी गंगा तीर्थ व घाटो पर दान पात्र लगा दे कि गंगा को बचाने के लिये दान दे .?सरकार एक प्रयोग और अंजाम दे सकती हैं वह यह कि  सफाई के लिए 10 से 20 लोगों के समूहों को 10 से 20 दिन के लिए बुलाया जाएगा। इन वालंटियरों को ठहरने व खाने की व्यवस्था के साथ अच्छी खासी प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। पर यह क्या करेंगे साहब ऐसे कई प्रयोग सन्तो ओर संगठनों ने किये और वह भी निशुल्क.?फिर पैसा क्यो बर्बाद करना हजारों संगठन हैं जो अपनी रोटी खा कर मा गंगा के लिये दिल से कार सेवा करने को तैयार हैं सरकार उनका सहयोग ले कुम्भ 2019आ रहा हैं करोड़ों लोग गंगा की सेवा के लिये तैयार हो जायेंगे सभी सन्त भी 10 से 20 दिन गंगा जी के लिये प्रदान कर देंगे फिर क्यू मुफ्त मे पैसा बर्बाद करना मोदी जी चार वर्ष  समाप्त हो गये सोचते सोचते, और आपसे पहले भी 100 वर्ष इसी तरह बीत गये पर कसम से काम पूरा करने वाले कुंभकर्ण नीद मे हैं 50 हजार से 16 करोड़ तक कि मशीने आये पर काम तो हो, कुछ काम नाम के बच्चे की सूरत तो नजर आये और फिर भी पैसा और श्रम दान की कमी हो तो कहै हम घर भीख मांग कर भी सहयोग के लिये तैयार हैं

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