Sunday, September 16, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-79

मेरा गंगा यात्रा भाग-79
इक प्रयास गंगा बचे
सावन माह का अंतिम शुक्रवार हरिद्वार व् आसपास क लिये डरा डरा सा रहा,मानो गंगा आजकल बिना चेतावनी भूख  शेर की तरह घात लगाने वाली हो,यहाँ गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान पार कर 293.30 (चेतावनी निशान 293 मीटर) मीटर पर पहुंच गया था। शनिवार तड़के ग्रामीणों ने इसकी जानकारी तहसील प्रशासन को दी क्या प्रशासन नींद मे रहता है, जो सुचना भी ग्रामीण ही देते है सूचना पर उपजिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसएल कुड़ियाल के साथ निरीक्षण करने पहुंचे। इसके बाद टीम लौट गई।पर कोई कार्यवाही नही की गई व्ही हुआ जिसका डर था दोपहर में तटबंध टूट गया। इससे कलसिया, डुमनपुरी, बालावाली, डेरियो, बादशाहपुर, पोडोवाली, रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला समेत सात गांवों की खेती की जमीन पर बाढ़ का पानी भर गया। तो निश्चित ही प्रशासन ही जिम्मेदार है ,जब निरक्षण भी किया तो ऐसे मे आपदा कार्यवाही होनी चाहिये पर अधिकारी सोते रहे या सोचते रहे,पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के कारण  गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है। वहीं कई जगह पर तटबंध भी टूट गए हैं। ऐसे में प्रशासन ने जिले में हाई अलर्ट जारी किया है। साथ ही लोगों को भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है। वह भी नुक्सान होने के बाद,--? गंगा का जलस्तर बढ़ने से शनिवार को कलसिया गांव के पास करीब 30 मीटर तटबंध ध्वस्त हो गया है। इससे हजारों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। सिर्फ अधिकारियो की कमी के चलते, कई गांवों के संपर्क मार्गों पर जलभराव होने से ग्रामीणों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ, जल पुलिस और मेरठ सेवा समाज के आपदा मित्रों को मौके पर बुला लिया है। साथ ही तटबंध का मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। हालत बिगड़ने पर 700 ग्रामीणों को ठहराने के लिए प्रशासन ने दो राहत शिविर तैयार कर लिए हैं।गंगा किनारे बसे कलसिया, डुमनपुरी, बालावाली, बादशाहपुर, गिद्धावाली, पोडोवाली, डेरियों, खानपुर, इदरीशपुर, शेरपुर बेला, माडाबेला सहित उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला, मोहम्मदपुर मथाना, करणपुर, महेश्वरा, रुहालकी, अब्दीपुर, शाहपुर, यहियापुर, प्रह्लादपुर, आलमपुरा, शाहपुर, हस्तमौली, मदारपुर, जोगावाला, दाबकी खेड़ा, मोहनावाला, आदि इन गांवों को खतरा पैदा हो गया है। इसका मुख्य कारण गंगा की भूमि पर अवैध कब्जा हैं

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