Saturday, September 15, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-58

मेरी गंगा यात्रा भाग-58
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रो प्लान A 1986  जो कि राजीव गांधी की देन थी के प्रथम चरण की समाप्ति के बाद भी गंगा जल की गुणवत्ता में खास परिवर्तन न दिखाई पड़ने का प्रमुख कारण इसमें प्रयुक्त प्रौद्योगिकी का जटिल होना था। जनजागरूकता का अभाव भी प्रमुख कारण था।लोगो को पता ही नही चला कि गंगा को बचाने का मुहिम आरम्भ हुआ है अच्छा तो वही हैं ऐसे किसी भी प्लान को आरम्भ कुम्भ मेला से किया जाता तो 5 करोड़ लोग वह जो गंगा स्नान को आते तथा वह सभी जो कुम्भ मे आस्था रखते है उन मे जागरूकता आती, सभी जानते है कुम्भ पर विश्व के सभी देशो के मीडिया की नज़र होती हैं तब निश्चित ही जनता पर प्रभाव पड़ता, साहब यह गंगा बचाने का कार्यक्रम हैं कोई अपना भारत का रंगारग कार्यक्रम नही,आपको याद होगा दिल्ली मे बड़े पैमाने पर राजीव गांधी ने यह कार्यक्रम करवाया था सोच थी देश के लोगो को देश की संस्कृति से परिचित करवाया जाये,अच्छा है पर यहाँ बात गंगा जी की हैं निर्मल गंगा के संकल्प ने ठीक 30 साल पहले ‘गंगा एक्शन प्लान’ के रूप में मूर्त रूप लिया था मैं कहूँगा कि राजीव जी सोच अच्छी थी उस युवा ने देश की संस्कृति को बचाने का प्रयास आरम्भ तो किया इससे पहले किसी ने ऐसा नही किया पर वह नये नये राजनीति मे आये थे और जल्दी ही कि चाटूताकारो में फंस गये दूसरे ईश्वर ने उन्हें अधिक समय भी नही दिया,गंगा एक्शन प्लान के रूप में राजीव गांधी ने 14 जून 1986 को वाराणसी में गंगा को निर्मल बनाने के लिए इस प्लान  की शुरुआत की थी। हमें गंगा जी के प्रति सोच के लिये राजीव गांधी को नही भूलना चाहिए कम से कम मर्त व्यक्ति पर कोई लांछन न लगाये उन्होंने भारतीयों की आस्था की धरोहर को बचाने की तैयारी तो की उसके लिये बजट मे प्रवाधान तो किया, वो बात की वह राजनीति और अफसर शाही की भेट चढ़ गये अपने अंतिम कार्यकाल मे मनमोहन सिंह जी न भी गंगा को बचाने की बात अपने भाषण मे लालकिले से 15 अगस्त को की, और हमने तुरन्त ही उन्हें पत्र लिख कर गंगा की स्थिति से अवगत करवाया, पर हुआ कुछ नही एक पत्र का जवाब पत्र के रूप मे आया,आज फिर गंगा का पूराना अध्याय आरम्भ हुआ है वर्तमान मोदी जी की केंद्र सरकार ने गंगा के लिए अलग मंत्रलय के गठन और 20 हजार करोड़ की बड़ी धनराशि का नियोजन करते हुए गंगा निर्मलीकरण के कार्यो और परियोजनाओं को नए सिरे से नमामि गंगे के प्रारूप में पुनर्जीवित किया है,पर गंगा मंत्रालय नही बना, मोदी जी गंगा एक्शन प्लान की विफलता की समीक्षा कर और इससे सीख लेकर आगे बढ़ते तो परिणाम कुछ अलग होते, मोदी जी ने कमान सही हाथो में दी पर उमाजी की पकड़ कमजोर रही शायद वह भी चाटुता कारो में फंस गई दूसरे उनका पेपर वर्क नही था अन्यथा वह 2018 तक गंगा प्रदूषण मुक्त हो जायेगी ऐसी बेतुकी बातै नही करती, जिस गंगा जी के लिये उन्होने कई आंदोलन और भूख हड़ताल की उसके कार्य से उन्हें बेदखल कर दिया गया क्या बहन उमाजी अब भी भूख हड़ताल या आंदोलन करेंगी..? भले सत्ता उनकी पार्टी की हो पर संकल्प अधूरा हैं गंगा आज भी प्रदूषित हैं आसान सी बात जिस तरह मोदी ने सभी सांसदों को एक एक गांव गोद लेने की बात कही थी वैसे ही गंगा जी के कस्बो, शहरों को गोद ले 20 वर्षों मे होने वाला कार्य 8 वर्ष मे पूर्ण हो जायेगा, कल भारत मे सरकारी तंत्र की मूर्खता और लापरवाही की बात करेंगे तथा तीन वर्ष मोदी जी की सेना ने कैसे गंगा बचाओ बचाओ में बर्बाद कर दिये

No comments:

Post a Comment