मेरी गंगा यात्रा भाग-59
इक प्रयास गंगा बचे
कहते है जहां शहद हैं वहां मक्खियों का होना लाज़मी हैं भारत मे कोई काम बिना रिश्वत के नही होता, बड़े बड़े प्रोजेक्ट आते ही इस लिये हैं ताकि गरीब जनता के चुने गरीव नेताओं का कल्याण हो सके एक स्कीम या स्कैम बताये जिसमें घोटालों की गन्ध न आई हो,और हो भी क्यों न करोड़ो रूपये चुनाव में खर्च होते है वह भी हर दल के, तो निश्चित है वह तो निकलना ही हैं फिर लाभ होना आवश्यक हैं अन्यथा व्यपार का लाभ ही क्या,आपने ग़ालिब का शेर तो सुना होगा हर शाख पर बैठा है उल्लू अंजामे गुलिस्तां क्या होगा 2016 मे नामामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा की सफाई के लिए मिले फंड में बड़े स्तर पर हुए घोटाले की शंका के चलते उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर कैग यानि कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ने खर्च के ऑडिट की तैयारी पूरी की । कैग के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर मीडिया को बताया कि ऑडिट की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसमें बड़े घोटाले कि अकांश है अतः ऑडिट से पहले होने वाले काम निपटा लिए गए हैं और दिल्ली ऑफिस को भी सूचित कर दिया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कैग को आदेश दिया कि वह नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत चलने वाली सभी केंद्रीय योजनाओं का ऑडिट करे। ये सभी योजनाएं उत्तराखंड के अलावा यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल में चल रही हैं जहां- जहां से होकर गंगा गुजरती है।अदालत के आदेश के बाद कैग पूरी स्कीम, इसके तहत हुए टेंडर्स, वर्क ऑर्डर्स का ऑडिट करेगा। साथ ही ये भी देखेगा कि अब तक कितना काम हुआ और इस पर कितना खर्च होना चाहिए। माना जा रहा है कि इसमें बड़े स्तर घोटाला हुआ है जिसका खुलासा होना अभी बाकी है। गोरतलब है कि नामामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत चलने वाली अविरल धारा और निर्मल धारा स्कीम में केंद्र की तरफ से करोड़ों का बजट दिया गया था। केंद्र ने प्रोजेक्ट के लिए 20,000 करोड़ का बजट दिया। निर्मल धारा स्कीम के तहत गंगा किनारे बसे अर्बन इलाकों में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर को एक्सपैंड करना है। दूसरी तरफ अविरल धारा स्कीम के तहत गंगा किनारे के ग्रामीण इलाकों में सीवेज सिस्टम बनाना है।
Saturday, September 15, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-59
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