Sunday, September 16, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-81

मेरी गंगा यात्रा भाग-81
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रो आज हम गंगा बचाओ के 81 वे पायेदान पर आ गये हैं और हमने गंगा जी को लेकर हर प्रकार की चर्चा की लोगों के विचार व सरकार की कार गुजरिया भी देखी आज की जर्मनी की खबर के साथ गंगा जी की बात को आगे बढायेंगे कल की ख़बर हैं कि जर्मनी गंगा नदी की सफाई के प्रयासों के तहत भारत को 12 करोड़ यूरो का सस्ता लोन दे रहा है. क्या आप कहै इसकी आवश्यकता है..? यह तब है जब पहली धन राशि का मात्र 22 प्रतिशत ही खर्च हुआ है  फिर इस लोन की क्या आवश्यकता है..? सरकार का मानना है कि लोन की इस राशि से उत्तराखंड में नालों के पानी का शोधन करने का स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. 80 प्रतिशत कम है क्या..? भई पहला हैं..?पहला थाली का खाया नही और रसगुल्ले को रहे हाथ पसारने, खैर जर्मनी के प्रभारी राजदूत जैस्पर विएक ने गुरुवार 30 अगस्त 2018 को इस बारे में जानकारी दी.थी चलो भई ये रसगुल्ला भी ले लो, जर्मनी के दूतावास द्वारा किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी देते हुए विएक ने कहा कि इस परियोजना में करीब 360 किलोमीटर तक नालों के स्ट्रक्चर को बदलना और इनको एक्पेंड किया जाना शामिल है 13 पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे इस परियोजना के तहत घरों को नाले से जोड़ने और करीब 1.50 करोड़ लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला जलशोधन संयंत्र बनाना भी शामिल है. इसके अलावा 13 पंपिंग स्टेशन बनाना भी इसका हिस्सा है. विएक ने कहा, 'इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी में गंदा पानी गिरने से रोकना और नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार करना है
उन्होंने कहा कि जर्मनी की विकास समर्पित एजेंसी जीआईजेड ने गंगा बुक तैयार किया है जो विद्यालय जाने वाले बच्चों को नदी के बारे में सूचित करने के लिए लक्षित है.आज के मोबाइल के युग मे पढ़ेगा कौन स्कूल की किताबें तो पढ़ी नही जाती,उसपर एक और बोझ  जीआईजेड के परियोजना समन्वयक विक्रांत त्यागी ने कहा कि जब डैन्यूब नदी को साफ किया जा रहा था तब डैन्यूब बुक तैयार किया गया था. इसी तर्ज पर गंगा बुक तैयार किया गया है त्यागी जी बी प्रक्टिकल, हर वर्ष लाखों लेख हजारो किताबें गंगा पर छपती हैं पर क्या..?हमारे ही फ़ेसबुक, ट्विटर,ब्लॉग आदि पर लाखों विययवर्स हैं पर पढ़ने वालों की संख्या 100 भी पार नही होती ,गंगा जी चिंता करोड़ों को हैं, पर है दिल मे पर भई इस दिल का क्या अचार डालना है बी प्रैक्टिकल कोई नही यही बड़े शर्म की बात है लगता हैं हम भी भैस के आगे बीन बजा रहे है और हैं कि भैस मोबाइल मे मस्त,..

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