मेरी गंगा यात्रा भाग-89
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों गंगा की बाढ़ ने हिमालय के उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक हाहाकार मचा दिया दूसरे शब्दो में कहे कि गंगा के किनारे बसे गाँव,कस्बो शहर पानी ही पानी नजर आ है खेत,खलिहान, गाँव सभी पानी ही पानी हो गये केवल हम इंसानो को छोड़कर..?हम लोग अभी तक नही समझ रहे कि यह सब ग्लोबिम्म वार्मिंग का नतीजा हैं यही हाल रहा तो 2035 तक धरती के तापमान में 2 से 4 प्रतिशत व्रद्धि की आशंका है जिससे हिमालय के साथ साथ ध्रुवीय हिमखंडों के तेजी से पिघलने की आशंका है यू तो वर्षा के रुकने से वाराणसी में गंगा के जलस्तर में पिछले 72 घंटे के भीतर प्रति घंटे दो सेंटीमीटर की कमी आई थी लेकिन गंगा अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। तटवर्ती इलाकों मे बाढ़ के हालात जस के तस हैं। घरों और मोहल्लों मे पानी घुस जाने के चलते अलल-अलग इलाकों मे लाखों लोग बेहाल हैं।इस बीच बिहार के हाजीपुर में आई बाढ़ ने सैकड़ों केला किसानों को भी तबाह कर दिया है। करोड़ों रुपये के केले की फसल पानी में डूब गई है जिसके चलते खेती बर्बाद हो गई है। इस तरह केले के किसानों की जमा पूंजी बाढ़ के पानी में बह गई है। यूपी और बिहार के बाद पश्चिम बंगाल के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। फूलोहर और गंगा नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान के ऊपर है। मालदा जिले में करीब 25 हजार परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। जिले के करीब 25 गांव बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ में फंसे इन लोगों को निकालने के लिए राहत बचाव का काम जारी है।जिले के कई प्राइमरी और हाई स्कूलों में राहत शिविर बनाए गए हैं। राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए खाने पीने की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि बाढ़ प्रभावित कई गांवों के लोगों को आरोप है कि प्रशासन के तरफ से अब तक उनसे कोई मिलने नहीं आया जबकि बाढ़ का पानी लगातार बढ़ते जा रहा है। में पानी खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। नरौरा बांध से गंगा में करीब 117638 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 136.40 मीटर पर पहुंच गया है। दोनों ही नदियों में पानी आने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। ऐसे में गंगा का पानी अब गांवों में पहुंचने लगा, जिससे लोग बेहाल है।
Sunday, September 16, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-89
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