मेरी गंगा यात्रा भाग -80
इक प्रयास गंगा बचे
आपके ध्यान के लिये आपको याद दिला दे कि मोदी जी की केंद्र सरकार पर उच्च प्राथमिकता वाली नमामि गंगे परियोजना की सफलता पर अब सवाल उठ रहे हैं। जो जायज़ भी हैं या यु भी कह सकते है चुनाव के आते ही विपक्ष के गंगा जी को लेकर हमले तेज हो गये हैं अब पूर्व केंद्र सरकार के दिगज भी गंगा के प्रति सरकार की योजनाओं और कार्य की विफलता पर उंगली उठा रहे है परियोजना के साढ़े चार साल पूरे होने के बाद इसका कार्य स्वरुप स्पष्ट नहीं है। मूर्खो की टोली शहर बसाये, ये नई कहावत हैं यानि जिस काम की करने वाले अनुभव हीन और बतोलै बाज हो तो वह काम कैसे होगा,अब गंगा नदी के पिछले सफाई अभियानों की असफलता का साया इस पर भी मंडरा रहा है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने गत वर्ष 13 जुलाई 2017 को गंगा की सफाई पर फैसला देते हुए कहा कि सरकार ने गंगा को शुद्ध करने के लिए बीते दो साल में 7,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन गंगा नदी की गुणवत्ता के मामले में रत्तीभर सुधार नहीं दिखा है। 7,000 करोड़ कहा..?नज़र तो नही आते आज टी वी देख रहा था दिल्ली मे अग्रवाल समाज ने बिना सरकार की मदद के 50 करोड़ मे गरीबो के लिये अंतराष्ट्रीय स्तर का रोहिणी के सै.22 मे अस्पताल बनवाया हैं नजर आता हैं पर सरकार के काम क्यों नजर नही आते..? 7,000 करोड़ कम राशि नही होती 14 अंतराष्ट्रीय स्तर के अस्पताल बन सकते है हा बात घपले की हो तो एक का भी पेट नही भरता,एनजीटी ने फैसले में कहा कि यह एक गंभीर पर्यावरण मुद्दा है। ऐसा तब है जब यह योजना केंद्र की कार्यसूची में पहली प्राथमिकता पर है। एनजीटी का यह आदेश इसलिए अभूतपूर्व है क्योंकि एनजीटी ने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि इतना खर्च और ध्यान देने के बावजूद नदी अब और अधिक प्रदूषित हो गई है। फैसले में एनजीटी ने कहा, “आगे अब और इंतजार करने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।” एनजीटी ने कहा, मार्च, 2017 तक 7304.64 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद केंद्र, राज्य सरकारें और उत्तर प्रदेश राज्य के स्थानीय प्राधिकरण, गंगा नदी की गुणवत्ता के मामले में सुधार कर पाने में असफल रहे।हमें लगता जो शर्म की बात है वहीँ एनजीटी ने नदी के 100 मीटर के भीतर सभी निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने सहित नदी से 500 मीटर की दूरी के भीतर कचरा डालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया और आदेश दिया कि ऐसा करने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए। पर यह समस्याओं का ठोस हल नही हैं जब तक कस्बो शहरों को सिवरेज सिस्टम से नही जोड़ा जाता, था
Sunday, September 16, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-80
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