Saturday, September 15, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-74

मेरी गंगा यात्रा भाग-74
इक प्रयास गंगा बचे
जैसे ही श्रवण मास के साथ मानसून आता है माँ गंगा अपनी स्वयं निर्मल करने की तैयारी करने लगती हैं सारे वर्ष हम गंगा को प्रदूषित करते है इस काल में गंगा सारे वर्ष की गंदगी को धो डालती हैं और देखने वालों के लिये पतितपावनी मां गंगा का रौद्ररूप नजर आता है। सौ सुनार की एक लोहार की वाली कहावत सिद्ध हो जाती हैं गंगा नदी में बढ़ते पानी के दबाव के बाद गंगा की धार गांव की ओर गमन कर लेती हैं। कई ग्रामों के आस-पास की फसलें जलमग्न हो जाती है। पानी तब गांव की दहलीज तक पहुंच जाता है। मचलती लहरें ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा देती हैं वहीं गंगा नदी पुराना इतिहास दोहराने को हमेशा से आतुर दिखाई देती है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी करने के बाद कड़ी निगरानी के निर्देश दिए है।बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बैराजों से आने वाला पानी तेज बहाव से आता है, जबकि जिले से पानी धीमी रफ्तार से गुजर रहा है। जिले की सीमा में तराई इलाके में पानी की रफ्तार तेज न होने के कारण गंगा मैदानी क्षेत्रफल में फैल रही है। नतीजा तटवर्ती इलाकों फसलें जलमग्न हो गईं हैं। जल बढ़ा तो पानी गांव की दहलीज तक पहुंचने में देर नहीं करेगा। इससे तराई क्षेत्र के किसान पूरी तरह ¨चतित हो उठे है। जिला प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा अलर्ट जारी कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ¨सचाई विभाग के साथ-साथ तहसील की राजस्व टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए है। गंगा में जिस तरह से पानी का दबाव बढ़ रहा है, उससे तो प्रतीत हो रहा है कि इस बार वर्ष 2010 और वर्ष 2013 की तरह बाढ़ आ सकती है। शासन को रिपोर्ट, डिस्चार्ज पर नजर
सचाई विभाग द्वारा प्रतिदिन बाढ़ से संबंधित सभी सूचनाएं शासन को भेजी जा रही है, जबकि बैराजों से हो रहे डिस्चार्ज पर सुबह-शाम नजर रखी जा रही है। यदि डिस्चार्ज बढ़ता है तो ¨सचाई विभाग इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को भी देता है। गंगा में आई मध्यम बाढ़
यदि गंगा नदी में पानी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक होता है तो यह पानी मध्यम श्रेणी की बाढ़ में आता है। मंगलवार को गंगा में सुबह 1.56 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया, जबकि हरिद्वार बैराज से 42 हजार, बिजनौर बैराज से 84 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। कछला पुल पर 163.60 गेज मीटर से बढ़कर 163.75 गेज मीटर पहुंच गया है। खतरे का निशान 164.76 गेज मीटर पर है। तब हुआ था बुरा हाल
वर्ष 2010 में गंगा नदी में 6 लाख क्यूसेक से अधिक पानी आया था। इस पानी ने जमकर तबाही मचाई। उस समय गांव भसावली पूरी तरह अस्तित्वविहीन हो गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में 6.11 लाख क्यूसेक पानी गंगा नदी में आया। उस समय कछला पुल पर मीटर गेज 165 मीटर तक पहुंच गया था। तब भी जिले में तबाही हुई थी। यह गांव निशाने पर मध्यम फ्लड में कासगंज तहसील के गांव अभयपुर, रामपुर, चकूपुर, बघेला पुख्ता, कढेरी पुख्ता, पटियाली के सहवाजपुर, नगला खंदारी, गठौरा सहित तीनों तहसीलों के दो दर्जन से अधिक गांव गंगा के निशाने पर आ गए है। पहुंची पीएसी फ्लड यूनिट बाढ़ के दौरान गंगा नदी में कोई हादसा न हो, ऐसे में खाकी भी अलर्ट है। गंगा किनारे पीएसी फ्लड यूनिट ने डेरा डाल दिया है। यह यूनिट गंगा नदी में बाढ़ की निगरानी करेगी और किसी भी हादसे पर तत्काल एक्शन लेगी। बढ़ रहा है पानी कछला गंगा नदी में पानी हर रोज बढ़ रहा है। पानी काफी गंदा आ रहा है। इससे स्पष्ट है कि मैदानी व पहाड़ी इलाकों में पानी बरसात का गंगा नदी तक पहुंच रहा है। ऐसे में गंगा का जलस्तर बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन खतरा नहीं है।

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