Saturday, September 15, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग -61

मेरी गंगा यात्रा भाग-61
इक प्रयास गंगा बचे
सो सोकर नेता सन्तो में गंगा जी को लेकर जाग्रति आती हैं किसके लिये वातानुकूलित होटल आश्रमों मे गंगा मंथन होना आम बात है और यह आज कोई नई बात नही है कुछ समय पहले गंगा पर हल ढूढ़ने और दो दिन के मातृ सदन में संवाद के तहत सरकार पर दबाव और जनसमर्थन के लिए मातृ सदन में खूब मेहनत कि गई।इसके लिये  देश के विद्वान भी जुटे लेकिन दो दिन बाद जब समापन की बारी आई तो तपस्या पर बैठे स्वामी सानन्द ने दो दिन के संवाद को निरर्थक करार दे दिया फिर आरम्भ हुआ नेता कहै जाने वाले सन्तो का नकारात्मक वही रवैया, किसी ने इशारो इशारों में कांग्रेस को लपेट दिया कोई भा ज पा और मोदी में कमियां निकलने लगा फिर लेकिन कुछ देर के लिए आये स्वामी अग्निवेश के रामदेव के साथ मिलकर प्रधानमंत्री से पहल करने की बात उन्हें रास आ गई और इसका उन्होंने समर्थन कर दिया।ये राज तन्त्र के चेहते सन्त राजनीति कर अपने रास्ते हो लिये, क्या निष्कर्ष निकाला, गंगा पर कोई गाईड लाइन तैयार हुई..?जो गंगा के लिये भूखहड़ताल पर बैठा था उसकी महेनत को भी कमजोर कर दिया, हो गई गंगा प्रदूषण मुक्त,? मेहनत तो किसी ने की पर चंद घंटों के लिए आकर महफ़िल सजाई गंगा पर प्रवचन कर वाहवाही  किसी और ने लूट ली।क्यू आते है ये बिजनेस मैन भगवाधारी, याद रहे नेता नही, अभिनेता नही,न ही भगवाधारी बिजनेस मैन गंगा को सन्त फक्कड़  ही बचा सकते है हा एक बात और भूखहड़ताल, जान देखने से गंगा नही बच सकती, प्राण नही दो-प्रण लो गंगा बचाना है जान मत दो जान को गंगाजी के लिये लगा दो पर प्रण बिजनेस न बन जाये..?बात कड़वी लग सकती हैं पर गंगा ऎसे ही बचेगी, ध्यान रहे गंगा नाम पर लूट करने वाले अंत मे गंगा ही सहारा हैं तब गंगा जी ही निर्णय लेगी आपका क्या करना है

No comments:

Post a Comment