Saturday, September 15, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-69

मेरी गंगा यात्रा भाग-69
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों बड़े चन्द्रग्रहण के बाद आज से सावन मास आरंभ हो गया हैं और यह मास शिव और उनके कावड़ियों का है इसके साथ ही सम्पूर्ण भारत मे कावड़ियों की चहल पहल आरम्भ हो जायेगी शिव तीर्थ के पास काँवड़ मेला भरना आरम्भ हो गया हैं ऐसा ही मैला हरिद्वार में संपन्न होगाः क्षमा करें हम मेला को मैला कह गये और हो भी क्यों न,यह मेला कम गंगा को मैला जरूर करेगा,जैसा कि आप जानते ही है कांवड़ मेले में करोड़ों की संख्या में कांवड़ियों जुड़ते है और जाते जाते आस्था के नाम पर गंगा को ऐसे प्रदूषित कर जाते है जिसकी भरपाई शायद नहीं हो सकती,आये कांवड़िये अपनी पुरानी कांवड़ गंगा में विसर्जित कर देगे,और यही नही अपने अंतरंग वस्त्र भी गंगा मे या किनारो पर झोड़ देंगे,करोड़ों रुपये का नशे का व्यापार होगा,लेकिन इन्हें रोकने न तो धर्म का कोई ठेकेदार आगे आयेगा और न प्रशासन, इसे रोकने के लिए आगे आयेगा,हमारी धार्मिक आस्था और हमारी परंपरा गंगा को किस तरह नुकसान पहुंचा रही है, ये सभी जानते है पर सब मौन रहेंगे, न सन्त न राजनीतिक न प्रशासन, कांवड़ मेला संपन्न होने के बाद हरिद्वार की मैली तस्वीरें चीख-चीख कर हमारी करणी का बखान करेंगी,वहीं, हर वर्ष कांवड़ मेले में 3 करोड़ से ज्यादा कांवड़िए हरिद्वार पहुंचते हैं, इनमें से अधिकतर कांवड़ियों ने अपनी पुरानी कांवड़ गंगा में विसर्जित करनी हैं क्योंकि अपनी धार्मिक आस्था को तो संतुष्ट जो करना है जब कि ऐसा कही किसी धार्मिक मान्यता मे नही है,, लेकिन उनकी यह अपनी मानसिकता हैं जो आस्था गंगा पर भारी पड़ती हैं .
आज हालात यह है कि गंगा में पड़ी पुरानी कांवड़ पहले से ही प्रदूषित हो रही गंगा का गला घोंट रही है, एनजीटी के कड़े नियमों के बावजूद अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे नज़र आयेंगे,कोई भी कांवड़ मेले के दौरान एक भी कांवड़िए को गंगा में कांवड़ डालने से नहीं रोकगा जिसके चलते गंगा और भी प्रदूषित हो जायेगी इनका मानना हैं कौन पंगा ले कावड़िये हिंसक हो सकते है ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना कठिन हो जायेगा, जो जैसा चलता है चलने दो मामला धर्म से जुड़ा है ..? तो क्या गंगा का मामला धर्म और आस्था से नही जुड़ा है ऐसी आस्था ने गोमुख ओर गंगोत्री में भी गंगा को नरक बना दिया है समाज मे काँवड़ हो और अधिक हो पर जो गंगा जल आप कंधों पर रख उसकी रक्षा खण्डित होने से करते हैं पवित्र रखना चाहते है तो गंगा को क्यो नही,
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बनाई गई अब तक की सबसे बड़ी योजना 'नमामि गंगे' की उत्तराखंड इकाई के जिम्मेदारों को भी यह सब दिखाई नहीं देता. धार्मिक आस्था के चलते पूरे कांवड़ मेले में गंगा जमकर प्रदूषित होगी

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