मेरी गंगा यात्रा भाग-63
इक प्रयास गंगा बचे
कल हमने वाराणसी मे गंगा के नाम पर होने वाले घोटाले पर चर्चा की थी आज आइये बक्सर की बात करते हैं यह छोटे छोटे कस्बे भी भृष्टाचार से नही बचे भारत मे भूखों की सँख्या बढ़ती जा रही हैं यह वह लोग है जिनकी हवस की खोपड़ी भर्ती ही नही..?यह लोग देश को अंदर और बाहर दोनो और से खोखला कर रहे हैं इन्हें न देश के कानून से डर हैं न भगवान से,आज देश को भृष्टाचार चार के निमित्त कड़े कानून की आवश्यकता है जैसे चाइना या गल्फ देशों मे है बरहाल गंगा जी कि बात करते हैं बक्सर जिले के मझरियां व उमरपुर गांव के आमने गंगा किनारे हुए कटावरोधी कार्यों में एस्टीमेट घोटाले की आशंका जताई जा रही है. 5 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से हुए कटावरोधी कार्यों में महज 1 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किये गए हैं. ऐसा लोक चेतना मंच के जिला संयोजक श्री मिथिलेश कुमार सिंह ने आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को आवेदन दिया है.उन्होंने लिखा है कि मझरियां वे उमरपुर में गंगा किनारे हो रहे कार्यों में बालू डालकर मिट्टी भरने से कोई फायदा नहीं है. इसके पास के गांवों में कार्यस्थल के पूरब और पश्चिम में पत्थर के बोल्डर डालकर भरे गए हैं. ऐसी परिस्थिति में बालू भरकर कटावरोधी कार्य कराने का कोई औचित्य नहीं है. प्राक्कलन तीन गुणा ज्यादा की राशि का बनाया गया है. अतः नियमानुसार जांच कर कार्रवाई करें कटावरोधी कार्यों की जांच रिपोर्ट करें सार्वजनिक डीएम को लिखित आवेदन में कटावरोधी कार्यों में हुई गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है. कहा है कि जिस कंपनी को कार्य का आवंटन किया गया है. वह पहले से ही ब्लैकलिस्टेड की जा चुकी है. प्लास्टिक की बोरियों में बालू भरकर कटावरोधी कार्य किया गया है. इसकी जांच करें. वही बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व संगठन सचिव श्री टीएन चौबे ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि गड़बड़ी का खुलासा नहीं होने से जनता के बीच असंतोष फैला हुआ है. उन्होंने सवालिया लहजे में जिला प्रशासन पर आरोप लगाया, जब गड़बड़ी पाई गई है तो संवेदक सहित कटावरोधी कार्यों में दोषी अभियंताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है. मामला जनहित से जुड़ा है. इसलिए डीएम से मांग किया कि दोषी पदाधिकारियों पर जल्द कार्रवाई की जाय.अब आप ही कहै क्या मोदी जी ऐसे घोटाले बाजो के होते गंगा बचेगी क्या ऐसे मे नमामि गंगा कार्यक्रम सफल हो सकेगा देश को सख्त कानून की आवश्यकता है बिना कठोर दण्ड नियम के न गंगा प्रदूषण मुक्त हो सकती हैं न देश का कल्याण हो सकता हैं यह देश के दीमक देश को खोखला कर रहे है, सरकारी तंत्र ही नही समाज सेवक भी सेवा के नाम पर देश को खोखला कर रहे है
Saturday, September 15, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-63
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