Saturday, September 15, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-75

मेरी गंगा यात्रा भाग-75
इक प्रयास गंगा बचे
जैसे कि हम कई बार चर्चा कर चुके है जल प्रदूषण फैलाने पर एक साथ 119 उधोगों को बंद करने का आदेश दिया गया था। यह सभी उधोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संचालित हो रहे थे कही न कही नदियों को प्रदूषित करने मे इन उधोगों का बड़ा हाथ हैं यही नही इनके गलत रवैये के कारण भूमि का जल भी प्रदूषित हुआ है यदि यह समय के रहते सही कदम उठाते तो आज स्थिति बद से बतर नही होती ,एनजीटी के आदेश पर सभी उधोगो को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से काम बंद करने का आदेश भेजा गया था। आदेश में तीन दिन के अंदर उधोगों को बंद कर प्रदूषण विभाग को सूचित करने का आदेश भी दिया गया था इसमें से 64 फैक्ट्री गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मौजूद हैं। नोटिस मिलने के बाद फैक्ट्री संचालकों में रोष व चिंता थीं। संचालक इससे करोड़ों रुपये का नुकसान व हजारों लोगों के बेरोजगार होने की भी आशंका जता रहे हैं यदि समय रहते इन्होने सही टीटमैट वाटर प्लांट लगाया होता जो मानको पर खरे उतरते तो आज इन्हें भी परेशान नही होना पड़ता, दोआबा पर्यावरण समिति की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में वाद दायर किया गया था। इसमें विभिन्न कंपनियों पर जल प्रदूषण करने का आरोप लगाया गया। जो सही भी है इस पर सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन सचिव एबी अखोलकर के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 316 फैक्ट्री से सैंपल लिए गये जिसकी रिपोर्ट 6 जुलाई को एनजीटी में पेश की गई। रिपोर्ट में 119 उधोगों को जल प्रदूषण करने का दोषी पाया गया। इसके बाद एनजीटी ने उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड को इन सभी उधोगों को बंद कराने का आदेश दिया था। इसके बाद 28 जुलाई को नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड की तरफ से सभी संबंधित उधोगों को बंद करने का नोटिस भेज दिया गया है। इस तरह फैक्ट्री से दूषित हो रहा जल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केमिकल का इस्तेमाल करने वाली कई फैक्ट्रियां हैं। साथ ही ऐसी फैक्ट्रीया भी हैं जिनका नाम ही नही हैं या कुछ रिहायशी इलाकों मे अवैध रूप से पनप रही हैं जिन पर पुलिस का हाथ हैं ये कपड़ा , जीन्स रँगाई ,चमड़ा आदि हैं जो लोनी, साहिबाबाद,भोपुरा, गाजीपुर, आदि मे हैं इन फैक्ट्रियों में केमिकल युक्त पानी जमीन के नीचे डाल दिया जाता है। साथ ही कई फैक्ट्रियों से केमिकल युक्त पानी को हरनंदी (हिंडन) में बहा दिया जाता। कुछ उधोगों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को बिना ट्रीट किए सीधे नालों में बहा दिया जाता है। इस पानी में मरकरी की मात्रा काफी ज्यादा होती है। जिस कारण भूजल जल प्रदूषित होता है। क्षेत्र के लोगों मे इससे खास रोष हैं साथ ही उसे पीने पर कैंसर जैसी घातक बीमारी को होने का खतरा बढ़ रहा है। फैक्ट्री मालिको की माने तो फैक्ट्री बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार होंगे अधिकतर को फैक्ट्री बंद करने का नोटिस मिला है। जिससे नोटिस के बाद हम और सारे कर्मचारी बेहद तनाव में है। फैक्ट्री बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार होंगे। साथ ही क्षेत्र को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। इन जिलों की फैक्ट्री को बंद करने का आदेश गौतमबुद्ध नगर,  गाजियाबाद, सहारनपुर, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर। को मिला है गारमेंट, मशीन निर्माण कंपनी, सिल्वर कोटेड पार्टस बनाने वाली फैक्ट्री, पेंट निर्माण से जुड़ी इंडस्ट्री और बैनर, पोस्टर व कार्ड बनाने वाली फैक्ट्री। प्रमुख है क्या आपको लगता हैं काम ईमानदारी से होगा या राजनीति बीच मे रोड़ा होगी

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