मेरी गंगा यात्रा भाग-60
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों जल ही जीवन हैं कोई भी जीव जल के बिना जीवित नही रह सकता, जल जीव की मौलिक आवश्यकता हैं हमारे शरीर मे 71 प्रतिशत जल ही हैं थोड़ा भी जल कम हो शरीर का तापमान बड़ने लगता हैं दूसरे जल शरीर मे रक्त का संचार व आक्सीजन की पूर्ति भी करता हैं तेलुगु गंगा परियोजना दक्षिण भारत में चेन्नई शहर की पेय जलापूर्ति परियोजना की योजना है। इसमें आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम क्षेत्र के सरोवर से कृष्णा नदी का जल नहरों ओर पाइपलाइनों द्वारा चेन्नई पहुंचाया जाता है। जब की गंगा से उसका कोई सरोकार नही पर नाम गंगा रखा गया, क्योंकि वह जानते है गंगा जी की महत्वता,और पूर्व के लोग जीने गंगा वरदान के रूप मे मिली हैं वह गंगा के अहसान को भूल गये,भूल गये भगीरथ के परिश्रम को, और हो भी क्यों न बिना परिश्रम के मिली जीत का सम्मान कहा होता हैं यह पूर्व के लोग दक्खन के लोगो से सीखे धर्म और धर्म सम्पदा का सम्मान क्या होता हैं पूर्व के शहर और नदियों जन चेतना के अभाव से ग्रस्त हैं,गंगा और उनकी सहायक नदियों ही नही शहर भी प्रदूषित होते जा रहे है गलियों सड़कों पर कूड़े के ढ़ेर नदियों के किनारे लोटा पार्टी आम हैं 2013 कुम्भ मे पहली बार हमने 3 माह इलाहाबाद मे बिताये हमारा अनुभव हम ही जानते है गंगा के सभी किनारे लोटा पार्टी ने शौच से पाट दिये, वही गंगा जिसमें वह मुक्ति की चाह मे आये थे, वह यह तब था जब सरकार ने शौचालय की कोई कमी नही छोड़ी थी और उन शौचालय की गत नही पूछो बुरा हाल था जानवरों से भी बुरा हाल इंसानो ने किया था और दोष सरकार का,..?हर शाही स्नान के बाद प्रयाग विश्व का सबसे बड़ा शौचालय बन जाता हैं जो बीमारियों का केंद्र नही तो क्या है देवता कैसे आ सकते हैं स्थान पर, कौन कहता है देवता तरसते हैं ऐसे तीर्थ को, तरसते हैं या त्रस्त होते है.?साहब क्या हो गये हम लोग..?और क्या बना दिया हमने अपने दिव्य तीर्थो को,गांधी जी स्वछ भारत का सपना देखा मोदी जी ने स्वच्छता का अभियान चलाया पर सब राजनीति की भेट चढ़ गया दिखावा सफाई हुई मोदी जी शायद भूल गये हम केवल लठ की भाषा समझते है जब तक दण्डऔर सज़ा का प्रवाधान नही होगा कुछ नही हो सकता,आज़ादी सबको चाहिए, पर ये कैसी आज़ादी..?,आजादी समाजिक अधिकार की हो, नियमों को अनदेखा करने और नियमों को तोडने की किसी को न हो,दण्ड और सजा भी ऐसी हो जो सख़्त हो तभी देख मे विकास हो सकता हैं ऐसे छोटे छोटे देश भी हैं जो हम से पीछे हैं पर स्वच्छता और नियमों मे हमसे आगे हैं जपान छोटा देश है हर बार बडी बडी प्राकृतिक आपदाओं को झेलता हैं तुरन्त अपनी विकास की धारा में समिल्लित हो जाता हैं क्यों, क्योंकि वहां के लोग देश को अपना देश मानते हैं देश की आपदा को अपनी परेशानी मानते है न नियम तोड़ते हैं न तोड़ने देते हैं शहरों को गन्दा नही करते, कही गन्दी हो तो साफ करने मे अपमान नही समझते, तो वह देश क्यो न बढ़िया होगा साहब देश भी हमारा हैं समाज भी हमारा, इसी देख भाल हमें करनी है मोदी को नही मोदी जी क्या रोज रोज झाड़ लेकर आपके घर को साफ करेंगे क्या आपके हाथ टूट गये हैं गली, मोहल्ले, शहर, पार्क,सड़के,रेल,रेलवे स्टेशन,बस अड्डा, जहां देखो हैं तो बस कूड़ा किसका हैं ये कूड़ा अपने आप आ गया भई हमने तुमने ही तो किया है
Saturday, September 15, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-60
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