मेरी गंगायात्रा भाग-64
इक प्रयास गंगा बचे
साहब मीडिया समाज मे रीढ़ की हड्डी का काम करता हैं किसी भी देश के संविधान के चार पांव में एक मीडिया भी हैं किसी ने कहा था
तीर निकालो न तलवार निकालो
जब हो युद्ध मुक़मबिल तो अखबार निकालो
आज़ादी की लड़ाई मे मीडिया ने अहम भूमिका निभाई पर आज मीडिया का सरूप ही करूप होता जा रहा है सचाई की बात तो कहते है पर सच्चाई नज़र नही आती जब जब कोई घोटाला नज़र आता हैं या कोई बड़ी खबर आती हैं दो दिन बाद सब कहा खो जाती हैं सब भूल जाते है वही आज गंगा भी मीडिया के लिये कोई मुद्दा मात्र है याद आती है तब ही गंगा की याद आती हैं जब कोई प्रधानमंत्री गंगा जी की बात करता हैं, तब सभी समाचार पत्र और टी वी गङ्गा गङ्गा का गुणगान करते नजर आते हैं फिर सब और शांति छा जाती हैं बड़े बड़े कार्यक्रम बनाने और गंगा को बचाने मे सहयोग करने वाले टी वी चैनल प्रायोजक, कमाई नज़र न आने के कारण डबा बन्द हो जाता हैं कभी कभी गंगा के प्रदूषण की नही गंगा के घोटालाओ की खबर आती हैं वो भी सरकार को घेरने के नाम पर, चलिये इस पर फिर बात करेंगे, यह बात उत्तराखंड के गंगा घोटाले की करते हैं यह बात तब सामने आई जब उत्तराखण्ड की विधानसभा में नमामि गंगे योजना के तहत 95 लाख रुपए के घोटाले का राज खुला।सब जानते है कि जिन-जिन राज्यों से गंगा बहती हुई गुजरती है उन राज्यों की सरकारें गंगा संरक्षण के लिये अपने-अपने स्तर से कार्ययोजना बना रही है। 90% कागज़ो मे,किन्तु आश्चर्य तब होता जब है कि जिस राज्य में गंगा का उद्गम स्थल हो और वहाँ की सरकार पर शुरुआती दौर में ‘नमामि गंगे’ योजना के घोटाले के राज सामने आने लग जाये..? यह बात हजम नहीं होती। पर ये कोई नई बात नही 2010 कुम्भ मैला हरिद्वार भी घोटाले का शिकार हो चुका है, तब भी गंगा के नाम पर बजट मे बड़ी गड़बड़ी नजर आई, बरहाल अगर यह सही पाया गया तो मौजूदा राज्य सरकार के लिये यह सबसे बड़ी दुखद घटना कही जा सकती है। बता दें कि हाल ही में उत्तराखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने ‘नमामि गंगे’ योजना के 95 लाख रुपए के घपले का मामला विधानसभा में उठाया था नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने इस मामले को बजट पर चर्चा के दौरान प्रमुखता से उठाया और कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।उल्लेखनीय हो कि नमामि गंगे योजना के तहत टिहरी वन प्रभाग को 95 लाख रुपए विभिन्न कार्य कराने के लिये मिले ही थे कि योजना से जुड़े लोगों ने इस बजट को ठिकाने लगाने का रास्ता ढूँढ निकाला। अब सवाल उठना जरूरी है कि क्या इस तरह से भविष्य में गंगा की स्वच्छता और अविरलता बनी रहेगी? क्या ऐसी हालातों में प्रधानमंत्री मोदी जी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट सामने आ पाएगा? प्रश्न इस बात का भी है कि नमामि गंगे योजना की पहली ही किस्त पर कला पिला होने लगा हैं। हालांकि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस गड़बड़ झाले पर जाँच बैठा दी थी पर जांच का परिणाम सभी जानते है..?घोटाले करने वाले सरकारी अधिकारी कब दोषी साबित होंगे या सब नमस्ते ..? यह समय की गर्त में है। डॉ. हृदयेश का आरोप है कि नमामि गंगे योजना के लाखों रुपए टिहरी वन प्रभाग ने ऐसे लोगों को कौड़ियों के भाव बाँट दिये हैं जो कि इस योजना के तहत पात्र भी नहीं थे। अन्धा बाटै रेवड़ी और अपने अपनों को दे,,, कुछ लोगों के साथ मिलीभगत कर वन विभाग के अफसरों ने इसमें काफी धन को ठिकाने लगा दिया है। कई ऐसे लोगों के खाते में पैसा जमा कराया गया जो पात्र नहीं थे। एक तीसरी कक्षा के छात्र के खाते में पैसा जमा हुआ है तो वहीं एक 95 साल के उम्र के व्यक्ति के खाते में पैसा जमा कराया गया है। ऐसे ही कुछ बाहरी राज्यों में नौकरी करने वाले लोगों के बैंक खातों में भी पैसा जमा करवा दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर सवाल खड़ा किया कि इस भ्रष्टाचार से जुड़े छोटे-बड़े हर मामले में निष्पक्षता से जाँच होनी चाहिए। इसे राजनीतिक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। क्योंकि यह मामला गंगा जी की प्रतिष्ठा का हैं जबकि राज्य की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की भावना व्यक्त की है। इस पर सरकार को गम्भीरता से अमल भी करना होगा। ऐसा न हो कि यह बात मजाक बनकर रह जाये। उन्होंने कहा कि जीरो टालरेंस केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, धरातल पर होते हुए दिखना भी चाहिए। कहा कि वैसे भी जीरो टालरेंस की हौवा टिहरी वन प्रभाग ने नमामि गंगे योजना की पहली किस्त से निकाल दी है।
Saturday, September 15, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-64
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment