मेरी गंगा यात्रा भाग -78
इक प्रयास गंगा बचे
गंगा जी को लेकर समाज मे कुछ संगठन कभी जाग जाते हैं और सरकार से गंगा के प्रति होने वाले कार्य और विकास का लेखा जोखा मांग ही लेते है ऐसा ही किया इंडिया टुडे ने, ग़गा नदी में स्वच्छता का स्तर जानने के लिए इंडिया टुडे ने गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत याचिका भेजी. याचिका थी जिसमें में सरकार ने गंगा को साफ करने के लिए शुरू किए गए नए प्रोजेक्ट, उन्हें कितना पैसा आवंटित किया गया, उनके पूरा होने की तिथि और उनके संभावित असर के बारे में पूछा गया. भारत सरकार की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया, ‘इस प्रोजेक्ट के लिए 20,000 करोड़ रुपए आवंटित किया जा चुका है जो कि अगले पांच साल में खर्च किया जाएगा (2015-2020)’.यहाँ एक प्रश्न सरकार का वादा था 2018 उसका क्या हुआ,..? हवा निकल गई,मोदी जी क्या गंगा पर आप राजनीति नही कर रहे जो पांच वर्ष और का समय बड़ा दिया गया..? अब तक नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कुल 221 प्रोजेक्ट विभिन्न तरह की गतिविधियों के लिए स्वीकृत किए गए हैं प्रशन क्या हुआ. क्या वह(2020)के बाद के लिये है..? इन गतिविधियों में 22,238.73 करोड़ रुपए की लागत से म्युनिसिपल सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरे का ट्रीटमेंट, नदी की सतह की सफाई आदि शामिल है. इनमें से 58 प्रोजेक्ट पूरे कर लिए गए हैं. कृपया कहा है वह भी बताये .? या किला कागजो का ही है इस आधार पर कहा जा सकता है कि प्रोजेक्ट्स पर आवंटित फंड से 2,238.73 करोड़ रुपए ज्यादा स्वीकृत किए जा चुके हैं और अभी डेढ़ साल और बाकी है. लेकिन अभी तक कुल स्वीकृत प्रोजेक्ट्स में से एक चौथाई ही पूरे किए जा सके हैं. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के बारे में आरटीआई से मिले जवाब में कहा गया है, अब तक 105 सीवरेज इफ्रास्ट्रक्चर्स और एसटीपी प्रोजेक्ट्स स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनसे बिना ट्रीट किए हुए 3,293.68 MLD सीवेज को गंगा नदी में सीधे गिरने से रोका जा सकेगा. कुल 26 प्रोजेक्ट अब तक पूरे किए जा चुके हैं’. इस आर.टी.आई को देखें तो स्वामी हरिहर यही कह सकते है सब कुछ राम भरोसे, वादे तो वादे हैं वादों का क्या है
Sunday, September 16, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-78
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