मेरी गंगा यात्रा भाग-50
इक प्रयास गंगा बचे
सदियों सदियों से भारतीय जनमानस को मोक्ष दिलाने वाली माँ, माँ गंगा का जल प्रदूषण के कारण काला पड़ता जा रहा है। वह दिन दूर नही जब गंगा व इनकी सहायक नदियों नाला बन जायेगी, गंगा में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण इसके तट पर निवास करने वाले लोगों द्वारा नहाने, कपड़े धोने, सार्वजनिक शौच की तरह उपयोग करने की वजह है। अनगिनत टैनरीज, रसायन संयंत्र, कपड़ा मिलों, डिस्टिलरी, बूचड़खानों और अस्पतालों का अपशिष्ट गंगा के प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा रहा है। औद्योगिक अपशिष्टों का गंगा के प्रदूषण में बढ़ता योगदान प्रमुख चिन्ता का कारण है। जिस पर पहले भी हम चर्चा कर चुके औद्योगिक कचरे के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे की बहुतायत ने गंगाजल को बेहद प्रदूषित किया है एक गन्दी आदत को लोगो ने धर्म से जोड़ दिया कि वह अपने कपड़े स्नान के पश्चात नदियों मे छोड़ आते है यह क्या बैफकूफ़ी है बढ़ते जनसंख्या विस्फोट के कारण गंगा का पानी तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ ही बहाव भी कम होता जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो गंगा में पानी की मात्रा बहुत कम हो जायेगी, जो होगी वह भी प्रदूषित हो जाएगी। देश के प्रमुख धार्मिक शहर वाराणसी की पहचान गंगा के निर्मल जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गंगा का जलस्तर इस तेजी से गिर रहा है कि विगत एक वर्ष के भीतर गंगा में ढाई फिट पानी घट गया है। जिन घाटों पर बैठकर कभी लोग गंगा के निर्मल जल में स्नान कर पापों का नाश किया करते थे उन घाटों से गंगा का जल दूर हो गया है। गंगा के घटते जलस्तर से सभी परेशान हैं। गंगा नदी में आॅक्सीजन की मात्रा भी सामान्य से कम हो गई है प्रदूषण के चलते इन लाभदायक विषाणुओं की संख्या में भी तेजी से कमी आ रही है। इसके अतिरिक्त गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे कछुए, मछलियाँ एवं अन्य जल-जीव समाप्ति की कगार पर हैं या उनका अवैध शिकार हो रहा है वह भी पुलिस की नाक के नीचे,इन सब परेशानीयो के लिये केंद्र सरकार द्वारा ‘गंगा एक्शन प्लान व राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना’ लागू की गई । सरकार द्वारा इन योजनाओं पर अरबों रुपए खर्च किये जा चुके हैं लेकिन हकीकत में क्या गंगा के प्रदूषण में कमी आई है..? बस सरकार आंकड़े ही इकठ्ठे कर रही हैं बाद में इन सबका अचार बनाया जायेगा, जो सरकारी स्कूली बच्चों को मिडेमिल के साथ बस परोसा जायेगा,बस गंगा धर्म का या चुनावी मुद्दा ही बनकर रह गई हैं साहब इस देश मे नारी और नीर दोनों राम भरोसे हैं
जिसकी पीड़ किसी को नही दिखाई पड़ती, हा चुनाव के समय को छोड़कर, एक प्रश्न क्या हिन्दू धर्म पर सँगठित करने वाले बड़े बड़े आश्रम, विशाल कार्यालय बनाने वाले संगठन कभी गंगा का दामन भी पकड़ेंगे,..? या बड़ी बड़ी बिल्डिंगो के नाम पर ही चन्दा, धनदा करते रहेंगे, अगर गो, गीता गाय, गंगा ही नही रहे तो इनका क्या करेंगे, फिर चाहे जितना मर्जी एक दो, एक दो, करते रहना,
Monday, June 25, 2018
मेरी गंगा यात्रा भाग-50
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