मेरी गंगा यात्रा भाग-28
ये लेख मुझे किसी की साइड पर मिला था जिसे कुछ संसोधित कर यहाँ डाल रहा हूं क्योंकि बात तो गंगा को बचाने की है ओर यह भी खोज का हिस्सा हैं पहले लेख मे मैंने इस्राएल राष्ट्र की सफाई करने की तकनीक की बात की थी जो भारत मे नही आ सकी मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनते ही नदियों को विशेष गंगा जी बचाने का अभियान चलाया था और इसे 'नमामि गंगे कहा , फिर वह अति व्यस्त होकर विदेश की सैर मे लग गये और अभियान की कमान साध्वी उमा जी को सौप दी उन्होंने दो वर्ष मे गंगा को स्वछ करने का दावा किया, जो खोखला साबित हुआ गंगा जी महत्वता को देखते हुए विश्व बैंक ने एक अरब डॉलर का कर्ज देने की बात कही सरकारी विभाग की माने तो इस रकम से गंगा रिवर क्लीन अप योजना का पहला चरण चलाया जाना है पर कही कुछ गड़बड़ न हो.?क्योंकि रकम बहुत बड़ी है ?यहाँ पहला लक्ष्य सही प्रकार से प्रदूषण को कम करना कैसे होगा क्योंकि इसके लिए भारत में सालों से चली आ रही कृषि की तकनीक पुरानी और सक्ष्महीन हैं जिसे भी बदलना आवश्यक है अन्यथा सब बेकार होगा भारत में किसान सिंचाई के लिए मॉनसून पर निर्भर रहते हैं या नदियों पर, बरसात में पानी के साथ साथ खेतों में डाली गई रासायनिक खाद के तत्व भी बहते हुए नदी में चले जाते हैं. वही इस्राएल और भारत की साझा कंपनी (नानदन जैन)सिंचाई का नया तरीका गांव गांव तक पहुंचाना चाहती है. जो विकसित खेती को नया जन्म दे सकती है जैसा कि हमने कल बताया था कि इस्राएल में पानी की कमी है लेकिन वहां सिंचाई के उन्नत तरीके अपनाये जाते हैं. हमारे यहां वही पुरानी नीति ही हैं माइक्रो इरिगेशन तकनीक में पानी बूंद बूंद कर पौधे जड़ों तक पहुंचता है. इस तकनीक से पौधे भी जिंदा रहते हैं और पानी भी बचता है. इसके लिए पतले पाइप, वाल्व, ट्यूब और फव्वारों को जोड़ एक ढांचा बनाया जाता है.
जो अधिक उपयोगी हो सकता है नानदनजैन के निदेशक अमनोन ओफेन कहते हैं कि भारत में भी सिंचाई का यह तरीका शुरू कर दिया गया है. वह दावा करते हैं कि यह भारतीय कृषि का चेहरा बदल देगा, “भारत का सिंचाई बाजार अभी आधे अरब डॉलर प्रतिवर्ष से थोड़ा ज्यादा है. अगले दो या तीन साल में ही यह 1.5 अरब डॉलर हो जाएगा, माइक्रो इरिगेशन.” सिंचाई का तेजी से बढ़ता बाजार कई देशों को भारत की तरफ आकर्षित कर रहा है.यदि किसानों ने अधिक से अधिक नई तकनीक को नही अपनाया तो बाजार पर तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के कब्जा है वो कृषि मे भी आ पहुंचेगा यू भी सभी देशी विदेशी कम्पनियों का ध्यान इधर हैं वह अपनी मांग के अनुरूप फसलों को उपजाई जा रही हैं जिससे भविष्य मे अन्न सब्जियों की कम आयेगी निश्चित ही हैं
आपको जानकर हैरानी होगी 2003 में जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक भारत में सिर्फ 27% गंदा पानी ही साफ किया जाता है.ऐसे मे 73% पानी कहा जाता है ?कहा जाता है नदियों मे और कहा,इस्राएल की सरकारी जल कंपनी मेकोरोट के मुताबिक उनके देश में 92 फीसदी गंदा पानी साफ किया जाता है. इसी में से 75 फीसदी पानी का इस्तेमाल सिंचाई में होता है.
इस्राएली तकनीक इतनी आगे पहुंच चुकी है कि वे पानी की सफाई के दौरान छंटी गंदगी को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. गंदगी को ऊर्जा का स्त्रोत माना जा रहा है. इस्राएल में पानी की 45 फीसदी कमी है. लेकिन नई नई तकनीकों के सहारे देश अपनी पानी की जरूरतें पूरी कर रहा है
Tuesday, June 5, 2018
मेरी गङ्गा यात्रा भाग-28
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