Saturday, June 9, 2018

मेरी गंगा यात्रा भाग-41

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-41

परियोजना की लागत 2037 करोड़ रुपये
आज की यात्रा मोदी सरकार की ओर हैं यू तो  हमारी यात्रा 1990 से ही आरम्भ हो गए थी मैं पेशे से पत्रकार था , हुँ तो निश्चित ही मस्तिष्क मे लेखन,आलोचना, सही समाचार जनता और प्रतिनिधयो तक पहुचना हमारी जिम्मेदारी बनती हैं जो मै कभी नही छोड़ी,गङ्गा जी की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तक पत्र लिखे गङ्गा के किनारों और गङ्गा जी के दुख को महसूस किया चलिये मोदी जी की नमामि गंगे परियोजना को देखते हैं इसके तहत वन लगाने और जैव विविधता केंद्रों को शुरू करने की योजना भी है.जहाँ बांधो से पहाड़ पहले से ही खोखले हो चुके है विकास के नाम पर पहाड़ो पर कब्जे हो चुके हर और अमीरों ने अपनी अय्याशी के केंद्र बना लिये गङ्गा के किनारे जब पूजा पाठ शान्ति के लिये नही अय्याशी के अड्डे हैं तो क्या वन आसमान मे बनेगे,मई में जैव विविधता के लिये सरकार ने इन परियोजनाओं के 2,446 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. पर खर्च कहा होंगे  ये बड़ा प्रश्न हैं जैव विविधता केवल पेपरों न रह जाये यह देखना आवश्यक हैं,नमागि गंगे नरेंद्र मोदी सरकार की अहम परियोजनाओं में से एक है. गंगा हिमालय के ग्लेशियर से निकलती है और सबसे पहले हरिद्वार में यह मैदानी भाग से टकराती है. गंगा के प्रदूषण की प्रक्रिया तो गंगोत्री से जी शुरू होती है. होटलों और आश्रमो का गंदा,व मल यही से गङ्गा जी को समर्पित हैं गङ्गा जी किनारों पर हरिद्वार तक ही हजारों छोटे बड़े कस्बे बन चुके हैं जिनका मल गन्दा पानी की निकासी एक मात्र गङ्गा जी ही हैं, दूसरे गङ्गा जी किनारो पर अवैध कब्जे गङ्गा जी धारा को अवरुद्ध करते है पहाड़ों में इस नदी पर कई जगह बांध बनाए गए हैं जिससे इसकी प्रवाह क्षमता पर असर होता है,वही बात पुनः कहै  साथ ही नदी किनारे बसे 118 शहरों का कचड़ा गंगा जी में गिरता है. इसके अलावा औद्योगिक ईकाईयों से होने वाला प्रदूषण   अलग है तो क्या नमामि गंगे परियोजना के तहत इन सभी चुनौतियों से एक साथ निपटा जा सकेंगे..? मोदी सरकार की ओर से 231 परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी. इन परियोजनाओं को लेकर सरकार की भविष्य की क्या योजनाएं हैं ये अभी स्पष्ट नही है इन सब पर एक नजर डाले तो योजना का मकसद गांवों के जरिये होने वालेे प्रदूषण को रोकना है. इसमें खुले में शौच करने पर रोक लगाना, श्मशान बनाना और कचड़े का प्रबंधन जैसी योजनाएं हैं पर यह प्रमुख प्रदूषण का कारण नही है कहते है इसे 400 गांवों में शुरू किया जाएगा. इनमें से देश के 13 आईआईटी ने 85 गांवों को गोद लिया है. झारखंड के साहेबगंज जिले में सभी गांवों को इस योजना के तहत विकसित किया जाएगा.गंगा कई प्रजातियों का केंद्र है,पर सरकार को अवगत कराये की गंगा नदी के किनारे बसे 118 नगर गंगा में 363.6 करोड़ लीटर कचड़ा प्रवाहित करतेे हैं..? यह नदी को प्रदूषित करने वाला सबसे बड़ा कारण है,नदी किनारे बने कचरा प्रशोधक यंत्र या तो खराब हो चुके हैं या पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं. या प्रशोधक यंत्रो की सफाई भी गङ्गा मे की जाती हैं कचरा और गन्दा पानी गङ्गा जी मे ही प्रवाहित कर दी जाती हैं साथ ही इसे चलाने के लिए पर्याप्त बिजली की जरूरत होती है और स्थानीय निकायों के पास इतना पैसा नहीं होता या सालो साल प्रयोग मे नही लाये जाते,इनका प्रयोग कुम्भ का मेला की तरह है इससे निपटने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया है.क्या यही हल हैं..? जो नकली बिल बनाने मे मास्टर हैं इस क्षेत्र में पैसा लगाने को इच्छुक कंपनियों के लिए मंत्रालय ने हाईब्रिड मॉडल तैयार किया है. हालांकि बिजली की समस्या अभी भी वैसी ही बनी हुई इस बात की सटीक जानकारी तो नहीं है की यह परियोजना कब पूरी होगी या होगी भी के नही,यहाँ सहायक नदियों की सफाई भी इसकी एक प्रमुख गतिविधि होगी अधिकारियों को उन शहरों का भी प्रबंधन करना होगा जहां से यह नदी गुजरती है और औद्योगिक इकाईयां अपना अपशिष्ट और कचरा इसमें डालती हैं। इस परियोजना का एक प्रमुख भाग पर्यटन का विकास करना है जिससे इस परियोजना हेतु धन जुटाया जा सके। अधिकारियों को इलाहाबाद से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक एक चैनल भी विकसित करना होगा ताकि जल पर्यटन को बढ़ावा मिले। नमामि गंगे परियोजना का सबसे बड़ा मुद्दा नदी की लंबाई है।  इससे अलावा नदी का भारी प्रदूषण स्तर और औद्योगिक इकाईयों का अपशिष्ट और कचरा और आम जनता के द्वारा डाला गया कचरा भी एक मुद्दा है। स्वच्छ गंगा परियोजना से कई विवाद भी जुड़े हैं,

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