Tuesday, June 5, 2018

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-32

इक़ छोटा सा प्रयास
मेरी गंगा यात्रा भाग-32
मित्रों जब साबरमती मे स्वच्छता अभियान को पूर्ण किया तो गंगा से प्यार करने वालों के मन मे भी आशा की किरण जागी की शायद अब गंगा जी भी अपने स्वरूप को पायेंगी अब गंगा जी भी निर्मल स्वच्छ बहेगी गंगा की बेड़ियों कट जायेंगीं, कोई तो राष्ट्र हित मे सच्चाई से काम करेंगा आंकड़े देखै तो सच स्थिति चिंताजनक है  हरिद्वार तक इसके मार्ग में पड़ने वाले लगभग 12 नगरपालिका कस्बों हैं जिसके नालों से लगभग प्रतिदिन आठ करोड़ नब्बे लाख लिटर मलजल प्रतिदिन गंगा में गिरता है। अगर वार्षिक आंकड़े देखै तो यह ग्राफ़ शेयर मार्किट की तरह बढ़ता है पर घटता नही , 8 करोड़ का आंकड़ा 12 करोड़ से अधिक है नदी में गिरने वाले मलजल की मात्रा तब अधिक बढ़ जाती है जब मई और अक्तूबर के बीच लगभग 15 लाख(1.5 मिलियन) लोग चारधाम यात्रा पर प्रति वर्ष राज्य में आते हैं। हरिद्वार मे अंधो और धर्म के धंधों की कमी नही तीन फ़ोटो मैंने भीमगोडा जय राम आश्रम की ली जब 2010 महाकुंभ की तैयारी जोरों शोरो पर थी हरिद्वार को किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था वही के 10-10 साल से सड़ रहे कुओ को साफ किया जा रहा था पर वह ज़हर सीधे गंगा जी मे विलय की गया, यह बात नवम्बर 2009 की है मैं भी कुंभ के लिये भूमि आवंटन के लिये आया था मैंने फ़ोटो उतार ली यह देख मेरा पारा बढ़ गया,हैरानी तो इस बात की यह घटना उनकी नाक के नीचे हो रही थी जो गंगा बचाने की बात करते हैं नाम नही लूंगा उसी दिन रिषीकेश मे मुख्यमंत्री गंगा बचाने पर भाषण दे रहे थे वह भी जो हिन्दू हित की बात करते यहाँ भी गङ्गा राजनीति की भेट चढ़ गई खैर लड़ झगड़ कर जहर को मैदान मे करवा दिया गया पर ना जाने कितने दिनों तक वह ज़हर गङ्गा जी विलय हुआ होगा
आम धारणा यह है कि गंगा की सफाई पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन सच्‍चाई इसके उलट है। पिछले तीन दशकों में जितनी रकम आवंटित की गई है, उसका मामूली हिस्‍सा ही साफ-सफाई पर खर्च किया गया है। 2010 मे भी गंगा जी और महाकुम्भ के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ 70% काम और विकास कागजो पर हुए
प्रिय मोदी जी गंगा को शुद्ध करने के लिए दिल्ली और उत्तराखंड,लखनऊ,पटना, और कलकत्ता को पहले शुद्ध करना होगा, इन लोगों के रहते हुए गंगा के शुद्धीकरण का सवाल ही नहीं है !

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