मेरी गंगा यात्रा भाग-27
मित्रों हमने पूर्व लेख मे चर्चा की थी कि जीवन जल है जल नही तो जीवन नही,विज्ञान कहता है हमारा शरीर हो या धरती दोनों जगह ही 71% जल है जल अमृत ही तो है इस भीषण गर्मी मे किसी प्यासे जीव से पूछो जल क्या है पर हमें भरपूर मात्रा मे जल मिला है भारत नदियों का देश जो हैं इसलिए जल का मोल नही मालूम,दुनिया मे ऐसे देश भी है जो जल की सही कीमत जानते हैं वही अपनी नदियों का सही सम्मान करते हैं हम तो केवल तिस्कार ही करते हैं ऐसा ही एक राष्ट्र है इस्राइल जहाँ जल की कमी थी उन्होंने क्रांतिकारी तरह से अपनी नदी को बचाया,आज वह पानी की सफाई में अनुभवी माने जाते हैं और इस काम मे सबका सहयोग करने मे सक्षम है अभी कुछ समय पूर्व ही इस्राएली कंपनियां गंगा को साफ करने उतरना चाहती थी उनका मानना था उन्हें इसमें कम से कम 20 साल लगेंगे.वह भी तब जब पिछली योजनाओं जैसा हाल नहीं हुआ तो, तभी गंगा साफ भी होगी, सिंचाई भी होगी और श्रद्धालु पवित्र डुबकी भी लगा सकेंगे.वही उमा जी का जिन 2018 तक गंगा को प्रदूषण मुक्त कर देगा इसलिये कुछ दिनों से वह अपने जिन को नाव मे सैर कराकर गंगा की(मस्ती सॉरी)गंगा की दशा का अवलोकन करा रही हैं और दो चार बाद जिन गंगा को साफ कर देगा ,...अरे भई हम मजाक नही कर रहे, वरना जो काम इस्राएल 20 वर्ष मे करता जिससे अनुभव है वो उमा जी चार साल मे कैसे करने की बात करती..?जय हो सिद्ध सन्तों की, गिद्ध समाज मे सिद्ध ..?
जिसमें मात्र एक वर्ष रह गया हैं 2018 का लक्ष्य जो था या फिर 2019 मे चुनाव जीतने के बाद , गङ्गा जी की कृपा से फिर मंत्री बनने के बाद फिर से संकल्प लिया जायेगा..? गंगा की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये डूब गए, 26 साल बीत गए. एक पीढ़ी जवान हो गई. जवान बूढ़े हो गए.औरो की बात क्या करूँ मैं स्वयं 1986 मे 16 वर्ष का था आज 47 वर्ष का हूँ लेकिन गंगा की हालत अब भी वैसी ही है.जैसी थी पश्चिमी हिमालय की गंगोत्री से निकलती गंगा की कल कल धारा पश्चिम बंगाल पहुंचने तक एक गंदे नाले में बदल जाती है 2,500 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करने वाली इस नदी पर 40 करोड़ से ज्यादा लोग निर्भर हैं. हिंदू धर्म की मान्यता में इसे दुनिया की एक मात्र मुक्तिदायनी नदी कहा जाता है. यह दुनिया की सबसे बड़ी 20 नदियों में से एक है. लेकिन साथ ही विश्व की सबसे प्रदूषित नदियों में से भी एक है. औद्योगिक कचरे, नालों की गंदगी और अध जले शवों ने नदी को बेइंतहा दूषित कर दिया है. गंगा जी के नाम पर कितनो की कोठियों बन गई कितने गंगा जी की कसम खाकर मंत्री प्रधानमंत्री हो गये,पर गंगा तो गंगा हैं कुछ न कह रही हैं पहले शुद्ध अब प्रदूषित होकर चुपचाप बह रही हैं किसी से कुछ न मांगती बस बन जलधारा दे रही हैं
Tuesday, June 5, 2018
मेरी गङ्गा यात्रा भाग-27
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