मेरी गंगा यात्रा भाग-23
मित्रों हम सभी अपने जीवन मे जो भी करते अच्छा ही हो यही सोच कर करते हैं अच्छे परिणाम के लिये ही करते हैं पर यहाँ सवाल निजि नही सामुहिक संगठित प्रयास का है नदियों को नव जीवन मिले इस बात का है अभी तक हमने अलग अलग रूप से गंगा जी के प्रदूषण पर चर्चा की अब गंगा जी को तीन मुख्य चरणों मे बांटकर चर्चा करेंगे ताकि आसानी से गंगा जी के मिटते कारणों को समझा जा सके गंगा एक विशाल नदी से जो 8 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं जो इसके किनारों पर बसै है पर गंगा पर प्रदूषित करने मे 30 करोड़ से अधिक लोग का हाथ है जो पाप धोने गंगा मे आते हैं और अपनी ही गन्दगी छोड़ जाते हैं गंगा पर होने वाले उत्सव गंगा को और नर्क बना देते हैं तीन चरणों मे गंगा के प्रवाह को ऐसे देखै
(I) गंगोत्री से बिजनौर बैराज तक
(Ii) बिजनौर से वाराणसी तक
(Iii) वाराणसी से गंगासागर तक
पहले चरण में गंगा तीन भाग से अधिक पहाड़ो का सफर करती है हरिद्वार के बाद ही धरती पर पांव रखती है गंगा मे प्रदूषण के आंकड़े मैं पहले ही बता चुका हूँ कुछ हद तक यहाँ अभी भी जल की शुद्धता बनी हुई है। कम से कम यहाँ का जल नहाने और पीने के योग हैं पर तेजी से पर्यटक का आना बड़ी समस्या पैदा कर था गंगोत्री, गोमुख पर बढ़ते तापमान से हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं मात्र 100 वर्ष मे ग्लेशियर 10, 15 किलोमीटर पीछे खिसक चुका है कहते हैं कभी गंगा का उद्गम गंगोत्री के आसपास ही था आज 20 किलोमीटर दूर है कभी गंगोत्री पर एक मात्र मन्दिर की ईमारत थी आज यहाँ भी पूरा शहर ही बसा दिया गया धर्म के नाम व्यवसायी करण हो गया यहाँ बसाई गई 90%दुकाने धर्मशालायै पंडो की है और कुछ आश्रम सन्तों के, यही नही गंगोत्री से 15 किलोमीटर ऊपर भी आश्रम का निर्माण कर दिया गया , और मैल सब गंगा में, बोलो हर हर गङ्गे,दूसरे इसके साथ ही यहाँ उतराखंड में गंगा की पंच शीर्ष धाराओं पर प्रस्तावित बांध और अन्य प्रकल्प गंगा नदी प्रणाली की प्रकृति और पर्यावरण को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। बांधों का निर्माण बड़े प्रदूषण का कारक है गंगा की बैरोक टोक बहने वाली धाराओं को बांधे जाने से जल प्रदूषित होगा यहाँ का अन्तिम जिला उत्तरकाशी ही जिसे उतर की काशी भी कहते है जो बड़ा शहर यहाँ पर्यटन मुख्य व्यवसाय है होटलो,रेस्टोरेंट, बाजार,सब कुछ है यहाँ नही है तो वाटर ट्रीटमेंट,शहर का सारा मैल गंगा जाता है यही हाल चम्बा,टिहरी,आदि का है टिहरी बांध को देखै गङ्गा जल जहाँ नीला, दूध सा था आज हरा या सड़ा सा लगता हैं
Tuesday, June 5, 2018
मेरी गङ्गा यात्रा भाग-23
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