Monday, October 14, 2019

मेरी गंगा यात्रा भाग 93

मेरी गंगा यात्रा भाग 93
इक प्रयास गंगा बचे
गंगाजी चेतन हैं और निरन्तर बहकर जहाँ जहाँ से गुजरती हैं उस भूमि को और वहाँ के रहने वाले सभी प्रणियों को भी चेतन कर देती हैं यही विशेषता गंगा जी को विश्व की अन्य नदियों से भिन्न करती हैं आप जानते ही हैं कि  झूठे-सच्चे प्रयास तो हो ही रहे गंगा जी को बचाने के लिये,,राजनीति हो या समाज हित की सोच, पर प्रयास तो नज़र आ रहे है कुछ वर्षों से केंद्र और राज्य सरकारें भी प्रयासरत हैं राष्ट्रहित के लिये किया गया वोट मोदी जी के रूप मे सार्थक जान पड़ता हैं..? अगर इच्छा शक्ति और डण्डा मजबूत हो सब हो जाता है पर लापरवाही किसी भी सार्थक प्रयास की हत्या कर सकती हैं जो हो सकता हैं,गंगा जी को लेकर नितिन गड़गरी जी कठोर कहै जाते है देखे उमाजी के बाद ये कितने सार्थक सिद्ध होते है पर अभी मेरी भेट नही हुई बरहाल यहाँ देखें कुछ समय पहले दिल्ली में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपने ताजा अध्ययन में बताया कि जिन 39 स्थानों से होकर गंगा नदी गुजरती है उनमें से सिर्फ एक स्थान पर इस साल मानसून के बाद गंगा का पानी साफ था...? कुछ समझै यह ‘गंगा नदी जैविक जल गुणवत्ता आकलन (2017-18)’ की रिपोर्ट के अनुसार हैं  रिपोर्ट कहती हैं गंगा बहाव वाले 41 स्थानों में से करीब 37 पर इस वर्ष मानसून से पहले जल प्रदूषण मध्यम से गंभीर श्रेणी में रहा नाश नही सवा सत्यानाश, वही.सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सीपीसीबी ने हाल ही में यह रिपोर्ट जारी की है.माना जाये तो अभी तक नमामि गङ्गा के नाम का पैसा, पानी मे बह गया,.. क्या यही ठोस प्रयास हैं चार वर्षों के, यही तो राजीव गांधी के समय में हुआ था क्या समय वही हालत पैदा कर रहा है..? मानसून से पहले 41 में से केवल चार स्थानों पर पानी की गुणवत्ता साफ या मामूली प्रदूषित कही जा रही हैं और मानसून के बाद 39 में से केवल एक स्थान पर नदी का पानी साफ था. इसमें मानसून के बाद केवल ‘हरिद्वार’ में ही गंगा का पानी ‘साफ’ था ये तब जब ये सरकारी रिपोर्ट हैं यदि ये काम कोई समाजसेवी संस्था करती तो परिणाम और विकट नज़र आते क्योंकि हम सभी हरिद्वार की स्थिति से अवगत हैं वहाँ गंगा मे गिरने वाले नालों की संख्या कम नही है फिर कैसे कहै की हरिद्वार मे पानी साफ है,.सीपीसीबी के द्वारा गुणात्मक विश्लेषण के लिए मानसून से पहले और मानसून के बाद पानी के नमूने लिए गए. इन्हें पांच श्रेणियों में रखा गया, साफ (ए), मामूली प्रदूषित (बी), मध्यम प्रदूषित (सी), बेहद प्रदूषित (डी) और गंभीर प्रदूषित (ई).रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 मानसून पूर्व अवधि में 34 स्थान मध्यम रूप से प्रदूषित थे, जबकि तीन स्थान गंभीर रूप से प्रदूषित थे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की दो बड़ी सहायक नदियां, पांडु नदी और वरुणा नदी गंगा में प्रदूषण बढ़ रहा है जो गंगा जी को प्रदूषित कर रही हैं मैंने पहले भी लिखा गङ्गा जी की सहायक नदियों पर काम किये बिना गंगा को बचाना असम्भव हैं वही दूसरी और मित्रो मद्रास हाईकोर्टअध्ययन में ये भी कहा गया है कि गंगा नदी की मुख्यधारा पर कोई भी स्थान गंभीर रूप से प्रदूषित नहीं था लेकिन अधिकतर जगह मध्यम रूप से प्रदूषित पाए गए. रिपोर्ट में कहा गया कि गंगा बहाव वाले 41 स्थानों में से करीब 37 पर इस वर्ष मानसून से पहले जल प्रदूषण मध्यम से गंभीर श्रेणी में रहा.इसी अध्ययन रिपोर्ट के एक अन्य अंश, जिसका शीर्षक है गंगा नदी के जैविक जल की गुणवत्ता की तुलना (2014-18), में बताया गया है कि रामगंगा और गर्रा नदी के पानी में मानसून बाद 2017-18 में भारी मात्रा में प्रदूषण था.सीपीसीबी की ये रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले चार सालों में गंगा नदी का पानी किसी भी जगह पर साफ नहीं हुआ है. अध्ययन के मुताबिक उत्तराखंड के जगजीतपुर और उत्तर प्रदेश के कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में गंगा नदी का पानी साल 2014-15 के मुकाबले साल 2017-18 में और ज्यादा दूषित हो गया है.साल 2017-18 में हरिद्वारा बैराज का पानी मानसून से पहले और मानसून के बाद दोनों समय साफ था हालांकि कानपुर और वाराणसी जैसे क्षेत्रों में नदी का पानी बहुत ही ज्यादा दूषित था. मालूम हो कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है.सीपीसीबी ने कहा, ‘प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए ताकि सभी स्थानों पर पानी की गुणवत्ता कम से कम ‘बी’ श्रेणी का हो सके.’ ‘बी’ श्रेणी के पानी की गुणवत्ता का मतलब है कि जलीय जीवन का समर्थन करने के लिए नदी का संरक्षण किया जाना चाहिए.बता दें कि गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता का आंकलन सीपीसीबी द्वारा दो तरीके से किया जाता है. एक तरीका होता है कि पानी का बीओडी  (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) , डीओ (डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन), तापमान, पीएच और कोलिफॉर्म बैक्टीरिया इत्यादि मापने के बाद पानी के गुणवत्ता की जानकारी दी जाए.वहीं दूसरा तरीका होता है पानी की जैविक निगरानी यानि की बायोलॉजिकल मॉनिटरिंग की जाए. सीबीसीबी का मानना है कि बायोलॉजिकल मॉनिटरिंग प्रदूषण के स्तर को बताने का ज्यादा बेहद तरीका है.द वायर ने सीपीसीबी द्वारा मुहैया कराए गए बीओडी और डीओ लेवल के आधार पर रिपोर्ट किया जिसमें ये बताया गया था कि पहले की तुलना में किसी भी जगह पर गंगा साफ नहीं हुई है, बल्कि साल 2013 के मुकाबले गंगा नदी कई सारी जगहों पर और ज्यादा दूषित हो गई हैं.केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गंगा सफाई के लिए ‘नमामि गंगे’ जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना चलाई जा रही है. जिसका को महत्व नही रह जाता,बस महत्वकांक्षी परियोजनाओ के नाम बदले गंगा जी हालत नही,या मैं तो यू ही कहूँगा राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप ढोते ढोते, गंगा साफ हुई हो या न हो पैसा साफ हो गया,गंगा के नाम पर 2014 से लेकर नवंबर 2018 तक में गंगा सफाई के लिए 4800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं पर कहा ..? सब कागज की बावड़ी, कागज मे रह गई चोर माल ले गये सरकार सोती रह गई, मॉरल इस देश का कुछ नही हो सकता

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