Monday, May 15, 2017

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-3

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-3
यू तो मैंने पत्रकारिता को छोड़ दिया था पर कहते हैं न चोर चोरी से जाये पर हेराफेरी से न जाये,गङ्गा जी की बिगड़ती स्थिति ओर गङ्गा जी को माँ कहने वाले समाज का बेरुखा पन मुझे अखरने लगा था
मन कहने लगा कुछ करना ही होगा ,ऐसा नही था कि मैं कोई पहला आदमी हुँ जो गङ्गा जी को बचाने के लिये आवाज़ उठाने वाला था सैकड़ों लोग ओर भी थे आवाज़ उठ भी रही थी 
पर सभी के मार्ग अलग थे मुझे लगा इस काम को साधु और पत्रकार मिलकर करै, और आवाज से आवाज को मिलना होगा
तो मैं साधु पत्रकार हो गया एक हाथ कमण्डल और कन्धे पर कैमरा,यू तो पिछले कई वर्षी से मे समाज को जाग्रत करने के लिये कलम उठता था, आज भी वही काम बस पहले जो काम मैं पैसे लेकर करता था अब केवल गङ्गा जी दुआ के लिये करना था निश्चित ही सच मुझे गङ्गा जी की कृपा मिली भी,
गङ्गा की स्थिति पर काफी लेख और फोटो ली गई , पर सबसे अधिक मदद मुझे शोशल मिडिला, के आने पर मिली गङ्गा जी पर लेख, फोटो वीडियो शेयर किये गये गोमुख से एक स्थान को नापा, हरिद्वार को देव भूमि का जाता हैं परंतु हरिद्वार पहुचते पहुचते गङ्गा जल मल होने लगता हैं जांच करता मानते है की हरिद्वार मे पहुचतै पहुचते पीना तो क्या नहाने और खेती के लेकवभी नही रहता,सरकारी आंकड़ों के आधार पर माना जाये तो मात्र हरिद्वार तक इसके मार्ग में पड़ने वाले लगभग 12 नगरपालिका कस्बों के नालों से लगभग आठ करोड़ नब्बे लाख लिटर मलजल प्रतिदिन गंगा में गिरता है। इससे बड़ी बुरी बात और क्या होगी गङ्गा नदी में गिरने वाले मलजल की मात्रा तब अधिक बढ़ जाती है जब मई और अक्तूबर के बीच लगभग 15 लाख(1.5 मिलियन) लोग चारधाम यात्रा पर प्रति वर्ष राज्य में आते हैं।ऐसा होना ही था मामला जो धर्म से जुड़ा है सारे भारत से हर वर्ष इतनी बड़ी संख्या यात्रियों का आना और अपने पाप को देवभूमि पर छोड़ना, गङ्गा के शोषण का बड़ा कारण हुआ
शेष कल

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