मेरी गङ्गा यात्रा भाग-4
घर छोड़ने से पहले जो साधु संत मुझे अजीब से लगते थे अब वही अच्छे और सच्चे जान पड़े , यहॉ मैं घुमक्कड़ महात्मा की बात कर रहा हूं 5 स्टार बाबाओ की चर्चा आगे करूँगा, जो हाथो मे दस्ताने पहन फिल्मी हीरो हीरोइन के साथ गङ्गा बचाने की दास्तान लिखते हैं, ये लम्बी लम्बी गाड़ियों और ए .सी के घरों के बिना रह नही सकते,
अलख जोली पलक खज़ाना, लेगी भूख तो मांग कर खाना मिल गया तो दिवाली, नही मिला तो उपवास, हर हाल मैं प्रसन्न हमें नही चिता उसे चिता हमारी है हमारी नाव का रक्षक वो सुदर्शन चक्र धारी है
मैं मन का राजा मनके का राजा होने लगा , गङ्गा बचाते-बचाते हम पर भगवा रंग चढ़ गया , ऐसा नही है कि गङ्गा जी की चर्चा से पहले मे साधक नही था, था पर साधु होने का गर्व माँ गंगा जी ने दिया उससे पहले मन केवल गुप्त होना चाहता था केवल हरि नाम ही केवलम , हरि कृपा ने एक जीवन जीने का मकसद दिया जल्दी ही हमने एक टीम बनाई जो हर वर्ष श्रावण मे कांवड़ लाने वालो के लिये मैडीकल सेवा प्रधान करें ये लोग हर वर्ष गंगोत्री और गोमुख सेवा करते रहे साथ ही लोगो को गङ्गा के प्रति जाग्रत करने का काम भी आरम्भ होने लगा आठ लोगों की मेहनती टीम मे हर विभाग का सहयोगी था सभी अपने काम मे माहिर, सेवाभाव मे एक से बढ़कर एक है जो आज भी काम कर रहे हैं कोई नाम या सम्मान का इच्छुक नही है बस सेवा भाव है कोई चन्दा नही सब खर्च भी स्वयं ही करते हैं कोई भेदभाव} नही जिसे जैसी भी सेवा या मदद चाहिये करते हैं फिर वह कावड़िया हो , यात्री हो, सन्त हो या लोकल निवासी,सेवा ही करना है विकास की इस दौड़ में सच्ची सेवा करने वाले कम ही है वही आजकल विकास विनाश कब हो जाये पता ही नही चलता मेरी सोच मे भारत की नदियो को मिटाने की तैयारी का नाम विकास है विकास के नाम पर नदियोगंगा में वैसे तो मैट्रो शहरों की पूरी गंदगी ही समां रही है, पर गंगा को प्रदूषित करने में सबसे ज्यादा योगदान शराब व खाद फैक्ट्रियों का ही है। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायनयुक्त प्रदूषित पानी इतना घातक होता है कि यह पानी जहां-जहां से गुजरता है, वहां की भूमि बंजर हो जाती है। कंटीले पेड़ों के अलावा ऐसी जमीन पर और कुछ नहीं उगता। इस जहरीले पानी की बजह से ही गंगा को शुद्ध रखने वाले जीव मर चुके हैं और जो बचे हैं, वह लगातार मर रहे हैं।गंगा मे बहा जा रहा है जहर , जो कर रहा है नदियो को विषैला ,
अब न नदियो का पानी पीने के काबिल है न ही खैती के और देश के नेता कहते हैं हम विकास कर रहे जहाँ दुनिया के सभी छोटे बड़े देश प्रदूषण और पर्यवरण की ओर तेज गति से काम कर रहे और अपने आने वाली पीढ़ियों को भी जाग्रत कर रहे वही भारत मे सौ वर्षों मे बस मीटिंग पर मीटिंग हो रही है
आज भी हमारा पीने का 90% पानी व्यर्थ समुन्द्र मे बह जाता हैं इससे बढ़ी मुर्खता क्या होगी आज भी हम बाढ़ से अपना बचाव नही कर पाते ,आज भी हमें बाढ़ के पानी को उपयोग करना नही आता,
रिश्वत खोर और भ्र्ष्टाचारी लोग इसके मुख्य दोषी है सौ मे से नब्बे बईमान फिर भी मेरा भारत महान करोड़ों रुपये का बजट बनता हैं नदियों को बचाने के लिये पर सब कागज़ो मे या लगा भी तो 10% बाँकी जेब मे जेब भी मानो डोरीमोन की पॉकेट हो जो कभी भरती ही नही, ये देश के कैसे गरीब हैं जिनकी करोड़ों डकार जाने पर भी भूख नही मिटती, गङ्गा के नाम पर हर वर्ष बजट बनता हैं और तो बिदेशो से भी सहयोग मिलता हैं सब कहा जाता है जितना पैसा गङ्गा जी के नाम पर 25 वर्षो मे खर्च दिखया गया है इतनी धन राशि मे गङ्गा कई बार प्रदूषण मुक्त हो जाती शेख चिल्ली नेता शेख चिल्ली अधिकारी शेख चिल्ली चम्मचे, बड़ी बड़ी बातें, बातो का क्या है मैंने पढ़ा है 1911 मे मदन मोहन मालवीय जी ने भी गङ्गा को लेकर आवाज उठाई थी ओर आजाद भारत मे तो आवाजे उठती रही दबाई जाती रही आज मोदी युग आ गया सौ वर्ष से ऊपर हो गये गङ्गा आज भी शोषती असहाय प्रदूषित है
घर छोड़ने से पहले जो साधु संत मुझे अजीब से लगते थे अब वही अच्छे और सच्चे जान पड़े , यहॉ मैं घुमक्कड़ महात्मा की बात कर रहा हूं 5 स्टार बाबाओ की चर्चा आगे करूँगा, जो हाथो मे दस्ताने पहन फिल्मी हीरो हीरोइन के साथ गङ्गा बचाने की दास्तान लिखते हैं, ये लम्बी लम्बी गाड़ियों और ए .सी के घरों के बिना रह नही सकते,
अलख जोली पलक खज़ाना, लेगी भूख तो मांग कर खाना मिल गया तो दिवाली, नही मिला तो उपवास, हर हाल मैं प्रसन्न हमें नही चिता उसे चिता हमारी है हमारी नाव का रक्षक वो सुदर्शन चक्र धारी है
मैं मन का राजा मनके का राजा होने लगा , गङ्गा बचाते-बचाते हम पर भगवा रंग चढ़ गया , ऐसा नही है कि गङ्गा जी की चर्चा से पहले मे साधक नही था, था पर साधु होने का गर्व माँ गंगा जी ने दिया उससे पहले मन केवल गुप्त होना चाहता था केवल हरि नाम ही केवलम , हरि कृपा ने एक जीवन जीने का मकसद दिया जल्दी ही हमने एक टीम बनाई जो हर वर्ष श्रावण मे कांवड़ लाने वालो के लिये मैडीकल सेवा प्रधान करें ये लोग हर वर्ष गंगोत्री और गोमुख सेवा करते रहे साथ ही लोगो को गङ्गा के प्रति जाग्रत करने का काम भी आरम्भ होने लगा आठ लोगों की मेहनती टीम मे हर विभाग का सहयोगी था सभी अपने काम मे माहिर, सेवाभाव मे एक से बढ़कर एक है जो आज भी काम कर रहे हैं कोई नाम या सम्मान का इच्छुक नही है बस सेवा भाव है कोई चन्दा नही सब खर्च भी स्वयं ही करते हैं कोई भेदभाव} नही जिसे जैसी भी सेवा या मदद चाहिये करते हैं फिर वह कावड़िया हो , यात्री हो, सन्त हो या लोकल निवासी,सेवा ही करना है विकास की इस दौड़ में सच्ची सेवा करने वाले कम ही है वही आजकल विकास विनाश कब हो जाये पता ही नही चलता मेरी सोच मे भारत की नदियो को मिटाने की तैयारी का नाम विकास है विकास के नाम पर नदियोगंगा में वैसे तो मैट्रो शहरों की पूरी गंदगी ही समां रही है, पर गंगा को प्रदूषित करने में सबसे ज्यादा योगदान शराब व खाद फैक्ट्रियों का ही है। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायनयुक्त प्रदूषित पानी इतना घातक होता है कि यह पानी जहां-जहां से गुजरता है, वहां की भूमि बंजर हो जाती है। कंटीले पेड़ों के अलावा ऐसी जमीन पर और कुछ नहीं उगता। इस जहरीले पानी की बजह से ही गंगा को शुद्ध रखने वाले जीव मर चुके हैं और जो बचे हैं, वह लगातार मर रहे हैं।गंगा मे बहा जा रहा है जहर , जो कर रहा है नदियो को विषैला ,
अब न नदियो का पानी पीने के काबिल है न ही खैती के और देश के नेता कहते हैं हम विकास कर रहे जहाँ दुनिया के सभी छोटे बड़े देश प्रदूषण और पर्यवरण की ओर तेज गति से काम कर रहे और अपने आने वाली पीढ़ियों को भी जाग्रत कर रहे वही भारत मे सौ वर्षों मे बस मीटिंग पर मीटिंग हो रही है
आज भी हमारा पीने का 90% पानी व्यर्थ समुन्द्र मे बह जाता हैं इससे बढ़ी मुर्खता क्या होगी आज भी हम बाढ़ से अपना बचाव नही कर पाते ,आज भी हमें बाढ़ के पानी को उपयोग करना नही आता,
रिश्वत खोर और भ्र्ष्टाचारी लोग इसके मुख्य दोषी है सौ मे से नब्बे बईमान फिर भी मेरा भारत महान करोड़ों रुपये का बजट बनता हैं नदियों को बचाने के लिये पर सब कागज़ो मे या लगा भी तो 10% बाँकी जेब मे जेब भी मानो डोरीमोन की पॉकेट हो जो कभी भरती ही नही, ये देश के कैसे गरीब हैं जिनकी करोड़ों डकार जाने पर भी भूख नही मिटती, गङ्गा के नाम पर हर वर्ष बजट बनता हैं और तो बिदेशो से भी सहयोग मिलता हैं सब कहा जाता है जितना पैसा गङ्गा जी के नाम पर 25 वर्षो मे खर्च दिखया गया है इतनी धन राशि मे गङ्गा कई बार प्रदूषण मुक्त हो जाती शेख चिल्ली नेता शेख चिल्ली अधिकारी शेख चिल्ली चम्मचे, बड़ी बड़ी बातें, बातो का क्या है मैंने पढ़ा है 1911 मे मदन मोहन मालवीय जी ने भी गङ्गा को लेकर आवाज उठाई थी ओर आजाद भारत मे तो आवाजे उठती रही दबाई जाती रही आज मोदी युग आ गया सौ वर्ष से ऊपर हो गये गङ्गा आज भी शोषती असहाय प्रदूषित है

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