मेरी गंगा यात्रा भाग 115
एक प्रयास गंगा बचे
#गंगाआंदोलन #anhadyog मित्रो आपको मालूम ही होगा कि इस वर्ष 2020 कोरोना संक्रमण के चलते चारधाम यात्रा और सावनमास में होने वाली कांवड़ यात्रा नहीं हुई थी।जिसके चलते 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य गंगा स्थानों पर पूछते थे जो मन मारकर घर ही रहे,वही चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु भी नही आये जो गंतव्य पर पहुँचने से पहले यहाँ स्नान करते थे पता नही किसने ये कुकर्म आरम्भ किया होगा, तो यह लोग अपने पुराने कपड़ों को गंगा में बहा देते हैं। इसी तरह शिव भक्त भी कांवड़ यात्रा शुरू करने पर पुराने कपड़ों को गंगा में बहाते हैं। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में ऐसे शिवभक्त भी आते थे जो अपनी पुरानी कांवड़ लाते थे। इसको भी गंगा में प्रवाहित किया जाता था। तो सोच कर देखो कितनी बड़ी संख्या में यह कचरा गंगा को प्रदूषित करता होगा,इस साल दोनों यात्रा नहीं होने पर गंगा घाटों पर यह गंदगी नहीं दिखाई दी,
गंगा के घाट और गंगा की धारा निर्मल बहती रही , परन्तु कितने दिन यह चमत्कार नज़र आयेगा,क्योकि प्रकृति तो अपना काम कर रही हैं नही कर रहे तो हम,हम जानते है शीध्र ही वही स्थिति हो जाएगी क्योकि हम मान जाये हो ही नही सकता, बहुत जल्दी कचरे के ढ़ेर गंगा घाटों पर होंगे क्योंकि हमने गंगा को आस्था से अधिक पर्यटन का केंद्र मान लिया है, गंगा तटों पर ऐ.सी रूम की चाह ने गंगा के किनारों को खा लिया है भारतीय कानून के अंतर्गत 200 मीटर तक किसी भी नदी का अतिक्रमण निषेध हैं पर क्या सरकार यह जानती हैं क्या गंगा अवैध कब्जों से मुक्त है..? अवैध कब्जे आस्था और धर्म की देन हैं धर्म की आड़ मे व्यपार,साधुओ के राजा महाराजा से महल,ये त्याग है या वासना मैं आप पर छोड़ता हू गंगा को प्रदूषित करने मे इनके आश्रमो का भी हाथ है जब तक गंगा स्वतन्त्र नही बहती गंगा प्रदूषण मुक्त नही होगी
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