Tuesday, October 6, 2020

मेरी गंगा यात्रा भाग 109

मेरी गंगा यात्रा भाग 109
इक प्रयास गंगा बचे
चलिये आज उतर प्रदेश के पूर्वी भाग की बात करते है मैंने कुम्भ 2019 के अंतर्गत अपने तीन माह इलाहाबाद प्रयागराज में बिताये, और गंगाजी की स्थिति को भी देखा मात्र जहाँ कुम्भ क्षेत्र था वहां गंगा यमुना की स्थिति उत्तम नजर आती थी परंतु थोड़ा दूर हटते ही स्थिति जस की तस थी, केवल उच्च अधिकारियों और नेताओं के आने पर गंगा की,और घाटों की स्थिति प्रशंसनीय थी, नाले प्रयागराज मे भी खुले आम गंगा में छोड जाते थे उसके एक साल बाद 2020 में जब से कोरोना काल आया स्थिति ही विपरीत हो गई, सम्पूर्ण प्रदेश मे शान्ति, प्रदूषण मुक्त वातावरण दिखने लगा जिले में भी वायु प्रदूषण अपने निचले स्तर पर  था लॉकडाउन लागू होने के एक दिन पहले 24 मार्च को लखनऊ का “एयर क्वालिटी इंडेस्क” (एक्यूआइ) 204 था वह 31 मार्च को 80 के भी नीचे पहुंच गया था। ग्रेटर नोएडा का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 178 से घटकर 90 के नीचे आ गया था। कानपुर शहर को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2018 में विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किया था। यहां भी एयर क्वॉलिटी इंडेक्स लॉकडाउन में 50 से नीचे जा चुका था। गोरखपुर में बीते एक सप्ताह का एक्यूआइ 100 से 50 माइक्रोग्राम घनमीटर के बीच सिमट गया था, जबकि लॉकडाउन से पहले यह आंकड़ा ज्यादातर 200 के करीब रहता था। इसी प्रकार यूपी के मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर जिले जिनका नाम वर्ष 2019 में प्रदेश के सबसे प्रदूषित शहरों में आया था जहां हवा की गुणवत्ता सबसे खराब थी, यहां भी पहली बाद एयरक्वालिटी इंडेक्स अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया।लॉकडाउन की वजह से प्रदेश की हवा जहां शुद्ध हो रही थी वहीं गंगा-गोमती के पानी का रंग बदल गया। अब गंगा और गोमती के जल का आचमन करने से लोग घबरा नहीं रहे हैं नाले से भी बतर दिखने वाली नदियाँ अब शीशे दिख रही गत 15-16 मार्च की बरसात से गंगा का जलस्तर भी बढ़ गया। अगर हम लॉकडाउन के पहले और बाद के हालात पर नजर डालें तो बदलाव साफतौर पर देखा जा सकता है।कानपुर व वाराणसी की जनता ने खुशी जाहिर की एक शिष्य के अनुसार  लॉकडाउन की वजह से गंगा का पानी बहुत साफ नजर आ रहा हैं कानपुर, प्रयागराज, आदिगंगा गोमती का साफ पानी देख चेहरे पर आ रही हैं यही हाल लखनऊ से लेकर जौनपुर तक आदि नदी गोमती का था। आदिगंगा गोमती नदी का जल लॉक डाउन के अंतर्गत निर्मल होकर स्नान, आचमन करने व पानी की गुणवत्ता जलजीवों और मछलियों के लिए उपयुक्त हो गई थी।वही लॉकडाउन की वजह से कचरे को गोमती में फेंकने में काफी कमी आई थी। लखनऊ से लेकर सुलतानपुर तक गोमती नदी के पानी मे काफी निर्मलता दिखी, इसके पहले लखनऊ से लेकर सुलतानपुर तक पूरे गोमती नदी के सफर में नदी का पानी नहाने के लिए भी ठीक नहीं था। लॉकडाउन में आदिगंगा गोमती नदी के जल की अच्छी सेहत दिखाई दे रही है।पर गंगा का पानी कानपुर और वाराणसी में 40 से 50 फ़ीसदी तक निर्मल और स्वच्छ हो गया था। कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी तीनों शहरों में गंगा के स्वच्छ होने की वजह साफ था लॉकडाउन में हर आदमी घर के अंदर था। न सड़कों पर वाहन चल रहे था न फैक्ट्रियां चल रही था सब बंद था तो प्रदेश भी प्रदूषण मुक्त हो गया जो काम कोई सरकार नही कर पाई वह कोविड 19 के डर ने कर दिया यानि डर होना चाहिए, हम मनुष्य बिना डर के कुछ नही करने वाले, 100 वर्ष बाद ही सही गंगा निर्मल और स्वछ नजर तो आई, वरना जो हाल 5,000 वर्षो में नही हुआ वो गंगा का नाश 100 वर्षो मे हमने कर दिया अभी समय है हमें नदियों को बचाना होगा अन्यथा आने वाली पीढ़िया गंगा को वीडियो और तस्वीरों मे ही देखेगी, जैसे हम आज डायनासोर की बात करते हैं

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